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मोबाइल स्क्रीन और गंदे तकिए के कवर मानसून में बढ़ा सकते हैं मुंहासे? एक्सपर्ट से जानिए कैसे

एक्सपर्ट के अनुसार, मोबाइल स्क्रीन और गंदे तकिए के कवर मानसून में मुंहासे की समस्या बढ़ा सकते हैं. मानसून में सिर्फ स्किनकेयर रूटीन ही नहीं, बल्कि इन रोजमर्रा की चीजों की सफाई पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है.

मोबाइल स्क्रीन और गंदे तकिए के कवर मानसून में बढ़ा सकते हैं मुंहासे? एक्सपर्ट से जानिए कैसे
मानसून स्किनकेयर रूटीन
file photo

बारिश का मौसम आते ही कई लोगों को लगता है कि चेहरे पर निकलने वाले दाने, खुजली या फंगल इंफेक्शन की वजह सिर्फ नमी और पसीना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके हाथ से कभी न छूटने वाला मोबाइल फोन और हर रात इस्तेमाल होने वाला तकिए का कवर भी इन स्किन प्रॉब्लम्स के बड़े कारण बन सकते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, इन दोनों चीजों पर जमा होने वाले बैक्टीरिया, गंदगी और तेल त्वचा के संपर्क में आकर मुंहासों, रैशेज और संक्रमण का खतरा बढ़ा देते हैं. ऐसे में मानसून में सिर्फ स्किनकेयर रूटीन ही नहीं, बल्कि इन रोजमर्रा की चीजों की सफाई पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है. सीके बिड़ला अस्पताल, गुरुग्राम, सलाहकार- त्वचा रोग विशेषज्ञ, डॉ. रूबेन भसीन पासी ने बताया कि कैसे मोबाइल स्क्रीन और गंदे तकिए के कवर मानसून में मुंहासे की समस्या बढ़ा सकते हैं.

मोबाइल स्क्रीन

मोबाइल स्क्रीन को लेकर बात करें तो जब आप फोन कान से लगाकर बात करते हैं, चेहरा सीधे स्क्रीन को छूता है. आपका मेकअप, सनस्क्रीन, चेहरे का जो कुछ भी ऊपर लगा है, वो फोन पर ट्रांसफर हो जाता है. दिनभर में यही फोन खाना खाते वक्त भी हाथ में रहता है यानी हाथों के ज़रिए इन्फेक्शन सिर्फ स्किन तक नहीं, गट तक भी पहुंच सकता है. उमस भरे मौसम में बात करते वक्त चेहरे पर पसीने की एक परत बनती है, जो सीधे फोन पर चिपक जाती है और अगर फोन बार-बार साफ नहीं होता, तो यही परत इन्फेक्शन की जड़ बन जाती है.

डॉ. रूबेन भसीन पासी के मुताबिक, इसमें एक और आदत शामिल हो जाती है. फोन को वॉशरूम तक ले जाना. वॉशरूम पहले से ही बैक्टीरिया का घर होते हैं और वहां स्क्रॉलिंग करते हुए फोन उस बैक्टीरिया को इकट्ठा कर लेता है. नतीजा यह होता है कि शाम तक आपका फोन बैक्टीरिया का पूरा हब बन चुका होता है और जब भी उसे कान पर लगाया जाता है, एक नया इन्फेक्शन ट्रांसफर हो जाता है. यही वजह है कि कई मरीजों में कान के आसपास और चेहरे के उसी हिस्से पर बड़े, लाल और पस से भरे मुंहासे देखने को मिलते हैं.

तकिए के कवर

तकिए के कवर की भूमिका भी कम नहीं है, जिन मरीजों में बड़े और लीक होते मुंहासे होते हैं. अगर उनका तकिया कवर लंबे समय तक नहीं बदला जाता, तो यह इन्फेक्शन का सीधा संकेत बन जाता है. सबसे क्रॉनिक फंगल एक्ने की वजह भी अक्सर यही गंदे तकिए निकलते हैं.

एक्सपर्ट की सलाह

डॉ. पासी के मुताबिक, जिन्हें एक्टिव एक्ने की दिक्कत है, वे तकिए का कवर हर दो दिन में या जरूरत पड़ने पर रोज बदलें और जो लोग दिनभर वर्क कॉल्स पर रहते हैं. वे मोबाइल स्क्रीन को दिन में कम से कम दो बार और मुमकिन न हो तो कम से कम एक बार जरूर साफ करें. स्किनकेयर सिर्फ क्रीम-सीरम तक सीमित नहीं है, कई बार सबसे बड़ा फर्क वो चीजें डालती हैं, जिन्हें हम स्किनकेयर मानते ही नहीं.

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