लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों में सफर करना अपने आप में एक अलग अनुभव है, लेकिन इस सफर के बीच 13,862 फीट की ऊंचाई पर चाय की चुस्की लेना इसे और खास बना देता है. कैफे हिमांक (Cafe Himank) जिसे BRO Cafe के नाम से भी जाना जाता है. पैंगोंग त्सो के रास्ते तंगत्से के पास यात्रियों के लिए एक खास यात्रा है. यहां ठंडे मौसम में गर्म चाय, कहवा और मोमोज का आनंद लिया जा सकता है.
लेह से ऐसे पहुंचे BRO Cafe

जानकारी के अनुसार, इंस्टाग्राम पर malang_the.traveller नाम से एक पोस्ट शेयर की गई है. पोस्ट के कैप्शन में लिखा, 'Bro cafe situated at 13862 Feet run by Indian Army ..' वीडियो में बताया गया है कि लद्दाख जाते समय पैंगोंग त्सो झील के रास्ते में तंगत्से के पास Cafe Himank है. यह भारतीय सेना (Indian Army) द्वारा चलाया जा रहा है. लेह से निकलकर करू और फिर चांगला पास पार करना होता है. इसके बाद रास्ता तंगत्से की तरफ जाता है. तंगत्से पार करने के बाद पैंगोंग झील से करीब 15-20 किलोमीटर पहले सड़क किनारे यह कैफे पड़ता है.
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दिल्ली से लद्दाख जाने के दो रास्ते
बता दें कि दिल्ली से लद्दाख पहुंचने के लिए मनाली और श्रीनगर, दोनों तरफ से सड़क मार्ग लिया जा सकता है. मनाली-लेह रूट करीब 1,000 किलोमीटर का है और इसमें अटल टनल, केलांग, बारालाचा ला, सरचू और तंगलंग ला जैसे पड़ाव आते हैं. वहीं श्रीनगर-लेह रूट करीब 1,035 किलोमीटर का है, जिसमें सोनमर्ग, जोजिला, द्रास और कारगिल जैसे प्रमुख पड़ाव मिलते हैं.

चाय के साथ मिलेगा पहाड़ी नजारा
कई लोगों का प्लान होता है कि वो परिवार में माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ छुट्टियों में लद्दाख जाएं. अगर कोई लद्दाख आने का प्लान कर रहा है तो यहां कैफे में गर्म चाय, कश्मीरी कहवा, मैगी और मोमोज जैसे विकल्प यात्रियों को पसंद आते हैं. बर्फीले और ऊबड़-खाबड़ इलाके में साफ वॉशरूम और बैठने की सुविधा मिलना भी इस पड़ाव को खास बनाता है.

सफर में रखें ऊंचाई का ध्यान
आपकी जानकरी के लिए बता दें कि लेह-लद्दाख की यात्रा में अचानक ऊंचाई बढ़ने से परेशानी हो सकती है. इसलिए यात्रा की योजना बनाते समय मौसम, सड़क की स्थिति और शरीर को ऊंचाई के अनुकूल होने का पर्याप्त समय जरूर दें.
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