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क्या पिछले जन्म के रिश्ते आज की जिंदगी को प्रभावित करते हैं? बीके शिवानी ने बताया संबंधों का रहस्य

क्या पिछले जन्म के रिश्ते हमारी आज की जिंदगी को प्रभावित करते हैं. बीके शिवानी बताती हैं कि हर संबंध केवल इस जन्म का नहीं, बल्कि कर्मों और आत्मिक जुड़ाव का परिणाम हो सकता है. जानिए रिश्तों से जुड़ा यह गहरा आध्यात्मिक रहस्य क्या है.

क्या पिछले जन्म के रिश्ते आज की जिंदगी को प्रभावित करते हैं? बीके शिवानी ने बताया संबंधों का रहस्य
बीके शिवानी

कभी-कभी हमारी जिंदगी में कुछ ऐसे लोग आते हैं, जिनसे पहली मुलाकात में ही गहरा जुड़ाव महसूस होने लगता है. वहीं कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जिनमें बिना किसी स्पष्ट कारण के तनाव, दूरी या टकराव बना रहता है. कई बार मन में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? ब्रह्माकुमारी बीके शिवानी (BK Shivani) ने अपने अपने यूट्यूब पर एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में उन्होंने बताया कि वर्तमान रिश्तों को केवल इस जन्म की घटनाओं से नहीं, बल्कि आत्मा की लंबी यात्रा के नजरिए से भी देखा जा सकता है.

रिश्ते सिर्फ इस जन्म तक सीमित नहीं हैं

बीके शिवानी के अनुसार, हम केवल शरीर नहीं बल्कि आत्मा हैं और आत्मा की यात्रा कई जन्मों तक चलती है. ऐसे में जिन लोगों से हमारा आज गहरा संबंध है, संभव है कि उनका हमारी आत्मा से पहले भी कोई जुड़ाव रहा हो. यही कारण है कि कुछ रिश्तों में सहज अपनापन महसूस होता है, जबकि कुछ में बिना वजह कठिनाइयां नजर आती हैं.

बीके शिवानी ने बताया कि बम जब लोगों को देखते हैं, तो हम रिश्तों के थ्रू देखते हैं. यह मेरा बेटा, यह मेरी बेटी, यह मेरा बहू, यह मेरा पति, यह मेरा पत्नी, यह मेरे मात-पिता, हम लोगों को रिश्तों के थ्रू देखते हैं और जब हम रिश्तों के थ्रू देखते हैं, तो हम सर्टेन एक्सपेक्टेशंस रखते हैं. यह रिश्ते ऐसे होंगे. यह लोग ऐसे होंगे, हम दोनों के बीच का यह जो कनेक्शन है, यह ऐसा होगा. हम सब रिश्तों के लेबल के थ्रू एक दूसरे के साथ इंटरेक्ट करना चाहते हैं. स्पिरिचुअलिटी आंसर देती है कि यह हम रिश्तों के लेबल के थ्रू नहीं है. हम सिर्फ आत्माएं हैं.

हर संबंध में कर्मों की भूमिका

बीके शिवानी ने अपनी वीडियो में यह भी बताया कि हर विचार, शब्द और कर्म एक एनर्जी पैदा करता है. यह एनर्जी हमारे रिश्तों को प्रभावित करती है. अगर किसी संबंध में बार-बार तनाव आता है, तो उसे केवल दूसरे व्यक्ति की गलती मानने के बजाय अपने कर्मों और प्रतिक्रियाओं को भी देखना जरूरी है.

पुराने दर्द को ढोने के बजाय रिश्तों को करें हील

बीके शिवानी कहती हैं कि चाहे किसी रिश्ते में कितनी भी परेशानी क्यों न हो, उसे प्रेम, माफी और सकारात्मक सोच से बेहतर बनाया जा सकता है. पुराने गिले-शिकवे पकड़े रखने से मन की शांति भी प्रभावित होती है और रिश्ते भी कमजोर होते जाते हैं.

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