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क्या होता है नॉर्मलाइजेशन, जिसने कर दी UPTET देने वालों की मौज

UPTET Normalization: यूपी टीईटी का रिजल्ट इस बार काफी बेहतर रहा है. नॉर्मलाइजेशन के चलते लाखों अभ्यर्थियों के नंबर थोड़े बढ़े हैं और यही वजह है कि पिछली परीक्षा के तुलना में इस बार कई ज्यादा अभ्यर्थी टीईटी में पास हुए हैं.

क्या होता है नॉर्मलाइजेशन, जिसने कर दी UPTET देने वालों की मौज
यूपी टीईटी में इस वजह से बढ़ गए उम्मीदवारों के नंबर

UP TET 2026 का रिजल्ट जारी हो चुका है. करीब 20 लाख अभ्यर्थियों ने ये परीक्षा दी थी, जिनमें से 13 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी पास हुए हैं. यानी इस बार का रिजल्ट 65% से भी ज्यादा रहा है. परीक्षा में ढाई लाख से ज्यादा वो टीचर्स भी शामिल थे, जो सरकारी नौकरी कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद टीईटी निकालना उनके लिए जरूरी था. इनमें से दो लाख से भी ज्यादा टीचर्स ने टीईटी क्वालिफाई कर लिया है. पिछली बार की तुलना में रिजल्ट इस बार काफी शानदार रहा है, इसके पीछे नॉर्मलाइजेशन को बड़ी वजह माना जा रहा है. पहली बार यूपी टीईटी में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया, जिसने अभ्यर्थियों की मौज कर दी. 

यूपी TET में कितने अभ्यर्थी हुए पास?

UP TET में प्राइमरी और अपर प्राइमरी लेवल पर रिजल्ट काफी बेहतर रहा है. प्राइमरी स्तर की परीक्षा यानी पेपर-1 में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या कुल 7,13,648 थी, जिनमें से 5,71,435 (80.07%) अभ्यर्थी पास हुए हैं. वहीं जूनियर लेवल पर 10,57,021 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, इनमें से 7,59,513 ने टीईटी क्वॉलिफाई कर दिया है. नौकरी कर रहे टीचर्स की बात करें तो 93,387 (76.29%) प्राइमरी लेवल में और 1,13,384 (77.45%) जूनियर लेवल में पास हुए हैं. इन सभी को नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस के चलते 5 से 10 नंबर एक्स्ट्रा मिले हैं. 

क्या होता है नॉर्मलाइजेशन?

बड़े राज्यों या फिर देश की बड़ी परीक्षाओं में उम्मीदवारों की संख्या काफी ज्यादा होती है. कई बार ये 20 लाख से ज्यादा हो जाती है, ऐसे में एक साथ इतने अभ्यर्थियों का एग्जाम करवाना नामुमकिन होता है. इसीलिए अलग-अलग शिफ्ट में एग्जाम कराने पड़ते हैं और कई दिनों तक परीक्षा आयोजित होती है. अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा होने के चलते किसी शिफ्ट का पेपर आसान आ जाता है और किसी शिफ्ट में सवाल काफी मुश्किल होते हैं. ऐसे में आसान पेपर वाली शिफ्ट के अभ्यर्थी ज्यादा नंबर लेकर आते हैं और पास हो जाते हैं, वहीं मुश्किल पेपर वाली शिफ्ट में आने वाले अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट में पिछड़ जाते हैं. 

इसी समस्या से निपटने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस का इस्तेमाल किया जाता है, जो आसान या मुश्किल पेपर से पैदा हुए इस अंतर को बैलेंस करने का काम करता है. इसमें एक फॉर्मूला लगाया जाता है, जिसमें देखा जाता है कि तमाम शिफ्ट का पेपर्स का एवरेज स्कोर क्या था. इसे ऐसे समझ सकते हैं - आज हुए पेपर में सभी उम्मीदवारों का एवरेज स्कोर 60 था, वहीं एक दिन बाद के पेपर में ये एवरेज स्कोर 100 पहुंच गया. ऐसे में इसे नॉर्मल करके 80 किया जाता है. इसके लिए हर राज्य और आयोग का अपना-अपना फॉर्मूला होता है. 

कैसे बढ़ जाते हैं नंबर?

अब कुछ हद तक आप समझ चुके होंगे कि नंबरों में बदलाव कैसे आता है. जब नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस का इस्तेमाल होता है तो जिस शिफ्ट में मुश्किल पेपर होता है, उसके अभ्यर्थियों के नंबर थोड़े ज्यादा बढ़ सकते हैं, वहीं आसान पेपर वाली शिफ्ट के अभ्यर्थियों के नंबर थोड़े कम बढ़ सकते हैं. आमतौर पर इस प्रोसेस से किसी के 2 नंबर तो किसी अभ्यर्थी के 5 से 7 नंबर तक बढ़ते हैं. 

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