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UPTET में नॉर्मलाइजेशन से कैसे फेल हो गए कई अभ्यर्थी? जानें क्या है दशमलव का खेल

UPTET Normalization Impact on Result: यूपी टीईटी का रिजल्ट जारी होने के बाद कई अभ्यर्थी आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें दशमलव अंकों से फेल किया गया है, जबकि आंसर की के हिसाब से वो पास हो रहे थे.

UPTET में नॉर्मलाइजेशन से कैसे फेल हो गए कई अभ्यर्थी? जानें क्या है दशमलव का खेल
यूपी टीईटी में दशमलव से फेल हुए अभ्यर्थी

UPTET 2026 का रिजल्ट जारी हो चुका है, जिसमें 13 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी पास हुए हैं. पहली बार इस परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन का इस्तेमाल हुआ, जिससे कई छात्रों को फायदा हुआ, लेकिन कुछ अभ्यर्थी इसके फेर में फंस गए. रिजल्ट में कई अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्हें दशमलव से फेल कर दिया गया है. यानी पासिंग मार्क्स से महज कुछ प्वाइंट अंक ही कम थे, इसलिए उन्हें फेल कर दिया गया. ऐसे में अब ये हजारों अभ्यर्थी रिजल्ट में बदलाव करने और उन्हें पास किए जाने की गुहार लगा रहे हैं. आइए जानते हैं कि कैसे नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस ने ये खेल किया और इससे कितना फायदा या नुकसान हुआ. 

क्या है नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला?

सबसे पहले ये समझ लेते हैं कि ये नॉर्मलाइजेशन क्या होता है. जब भी कोई बड़ी परीक्षा होती है तो उसे एक ही दिन में पूरा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इनमें लाखों अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं. ऐसे में परीक्षा को अलग-अलग शिफ्ट में दो या तीन दिनों में कराया जाता है. जाहिर है कि हर शिफ्ट में सवाल अलग होंगे, ऐसे में अभ्यर्थी आरोप लगाते थे कि पिछली पाली की तुलना में उनका पेपर कठिन आया. 

यानी किसी पाली में आसान तो किसी पाली में मुश्किल पेपर आता है, यही वजह है कि हर शिफ्ट के पासिंग रिजल्ट में भी बड़ा अंतर आता है. इसी अंतर को कम करने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस का इस्तेमाल होता है. हर आयोग या फिर एग्जाम कराने वाली संस्था अलग-अलग फॉर्मूले का इस्तेमाल कर नंबरों के इस अंतर को बैलेंस करती है. 

यूपी TET में नॉर्मलाइजेशन से क्या हुआ?

UPTET में इस साल पहली बार नॉर्मलाइजेशन का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन अभ्यर्थियों को काफी ज्यादा फायदा हुआ, जिनका क्वेश्चन पेपर बाकी शिफ्टों की तुलना में कठिन आया था. ऐसे अभ्यर्थियों के 5 से 10 नंबर तक बढ़े हैं. हालांकि फॉर्मूला लगाने के बाद नंबर प्वाइंट्स में भी आ गए, यानी किसी उम्मीदवार को 81.09 नंबर मिले तो किसी के पासिंग मार्क्स में महज 0.00033 का अंतर रहा. यानी आधे से भी कम नंबर से अभ्यर्थी फेल हो गए, जबकि फाइनल आंसर की से मैच करने के बाद अभ्यर्थियों को लग रहा था कि वो पास हो चुके हैं. 

हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दे रहे अभ्यर्थी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए अभ्यर्थी पास किए जाने की गुहार लगा रहे हैं. इस आदेश में हाईकोर्ट ने आरक्षित वर्ग दशमलव पांच अंकों से फेल होने वाले यानी आधे नंबर से फेल हो रहे अभ्यर्थियों को छूट देने की बात कही थी. यानी अगर किसी उम्मीदवार के 81.5 नंबर हैं और पासिंग मार्क्स 82 है तो उन्हें आधा नंबर देकर पास किया जाए. फिलहाल गलत सवालों और इन सभी समस्याओं के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने एक कमेटी बनाई है, जिसके बाद आखिरी फैसला लिया जाएगा. 

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