- बिहार के अशोक कुमार चौधरी ने समाजशास्त्र में एससी वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया
- टॉपर अशोक के पिता शिक्षक और माता गृहिणी हैं.
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की
Success Story Bihar: कहा जाता है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या अकूत धन-दौलत की मोहताज नहीं होती. अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, इरादे मजबूत हों और मेहनत में निरंतरता हो, तो साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भी इतिहास रचा जा सकता है. इस बात को अक्षरशः सच कर दिखाया है बिहार के नवादा जिले के वारिसलीगंज (नवाजगढ़) निवासी डॉ. अशोक कुमार चौधरी ने.
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में डॉ. अशोक कुमार चौधरी ने समाजशास्त्र विषय के एससी वर्ग में पूरे बिहार में प्रथम स्थान हासिल कर जिले और परिवार का नाम रोशन किया है.
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साधारण परिवार, लेकिन शिक्षा को प्राथमिकता
डॉ. अशोक एक अत्यंत साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता दिलीप चौधरी एक शिक्षक हैं और माता कमला देवी गृहिणी हैं. एक शिक्षक पिता के घर में जन्म लेने के कारण उन्हें बचपन से ही घर में पढ़ाई-लिखाई का अनुकूल माहौल मिला. भले ही संसाधन सीमित थे, लेकिन माता-पिता ने अपने बेटे के सपनों के बीच कभी कोई कमी नहीं आने दी.
वारिसलीगंज से बीएचयू और पीएचडी तक का सफर
डॉ. अशोक की प्रारंभिक शिक्षा वारिसलीगंज में ही हुई. इसके बाद उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय (वैशाली) के लिए हुआ, जहाँ से उन्होंने मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने देश के प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में प्रवेश लिया. बीएचयू से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने यूजीसी नेट परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (मोतिहारी) से समाजशास्त्र विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की.
7 वर्षों के कड़े अनुशासन का परिणाम
पीएचडी के लंबे सफर के दौरान उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया. दिन-रात का कड़ा अनुशासन, गहन शोध और प्रतियोगी परीक्षाओं की निरंतर तैयारी का ही नतीजा है कि जब परिणाम आया, तो वे सीधे बिहार के टॉपर बनकर उभरे.
'सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता'
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर बात करते हुए डॉ. अशोक कुमार चौधरी कहते हैं कि "सफलता कभी भी रातों-रात नहीं मिलती. इसके पीछे सालों की मेहनत, निरंतरता और असफलता से सीखने का जज्बा होता है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से मेरा यही कहना है कि अपना लक्ष्य तय करें और बिना भटके पूरी ईमानदारी से मेहनत करें. सफलता अवश्य मिलेगी."
क्षेत्र में खुशी का माहौल, युवाओं के लिए बने मिसाल
डॉ. अशोक के टॉपर बनने की खबर मिलते ही वारिसलीगंज और आसपास के इलाकों में जश्न का माहौल बन गया. स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने उनके घर पहुंचकर पुष्पगुच्छ और मिठाइयों के साथ उन्हें सम्मानित किया. छोटे से कस्बे से निकलकर प्रदेश स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करने वाले डॉ. अशोक कुमार चौधरी आज उन तमाम युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुके हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं.
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