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बिहार यूनिवर्सिटी कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव, नौकरी पक्की करने और प्रमोशन के लिए देनी होगी परीक्षा

Job promotion rule in Bihar : बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नौकरी पक्की करने और प्रमोशन पाने के लिए विभागीय परीक्षा अनिवार्य करने का ड्राफ्ट तैयार किया गया है. परीक्षा साल में दो बार होगी.

बिहार यूनिवर्सिटी कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव, नौकरी पक्की करने और प्रमोशन के लिए देनी होगी परीक्षा
कुल मिलाकर, इन बदलावों का मकसद विश्वविद्यालयों में कामकाज को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है.

बिहार की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में काम करने वाले टीचर्स और एंप्लॉई के लिए नए नियम लाने की तैयारी चल रही है. अगर ये नियम लागू होते हैं, तो नौकरी पक्की कराने और प्रमोशन पाने के लिए विभागीय परीक्षा पास करनी होगी. बिहार शिक्षा विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर सभी विश्वविद्यालयों को भेज दिया है. प्रस्ताव के मुताबिक यह परीक्षा साल में दो बार होगी और विश्वविद्यालय ही इसे आयोजित करेंगे. तो चलिए जानते हैं पेपर पैटर्न क्या होगा, कितने नंबर का पेपर होगा, पासिंग मार्क कितना होगा, ये सारी डिटेल्स हम आपको आगे आर्टिकल में बता रहे हैं...

पेपर पैटर्न क्या होगा 

परीक्षा में दो पेपर होंगे, हर पेपर 100 नंबरों का होगा. पास होने के लिए कम से कम 45 फीसदी लाना जरूरी होगा. पहले पेपर में हिंदी, लेखा-जोखा, वित्त, सेवा नियम, ऑफिस का कामकाज, बजट और कंप्यूटर की जानकारी से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे.

दूसरे पेपर में विश्वविद्यालय से जुड़े कानून, नियम, सरकारी आदेश और विश्वविद्यालय शिक्षा से संबंधित प्रावधान शामिल होंगे. प्रमोशन के लिए सिर्फ परीक्षा पास करना ही काफी नहीं होगा.

इसके साथ पिछले तीन साल की गोपनीय रिपोर्ट (ACR) और इंटरव्यू भी देखा जाएगा. लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू होगा, जिसके लिए 40 नंबर सुनिश्चित किए गए हैं. फाइनल सिलेक्शन और पदोन्नति समिति की सिफारिश के आधार पर होगा.

छुट्टियों के नियम बदलने का भी प्रस्ताव है

छुट्टियों के नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव है. नए ड्राफ्ट के अनुसार शिक्षकों को साल में अधिकतम 12 दिन और नॉन टीचिंग फैेकल्टी को 16 दिन कैजुअल लीव मिलेगी. रेग्यूलर टीचर्स को मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर हाफ-पे लीव की सुविधा भी दी जाएगी. इसके अलावा उच्च शिक्षा या अन्य विशेष कारणों के लिए एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव लेने का ऑप्शन भी रहेगा.

कंटॅक्चुअल अप्वाइंटमेंट्स को लेकर भी नियम तय किए गए हैं. विभागाध्यक्ष की सिफारिश और कुलपति की मंजूरी के बाद अधिकतम एक साल या उससे कम अवधि के लिए नियुक्ति की जा सकेगी. नए प्रावधान में कर्मचारियों को समान स्तर के दूसरे संस्थानों में ट्रांसफर करने की व्यवस्था भी रखी गई है. कुल मिलाकर, इन बदलावों का मकसद विश्वविद्यालयों में कामकाज को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है.

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