विज्ञापन

Success Story : स्कूल में हुआ अपमान, हॉस्टल में झेला भेदभाव, फिर ऐसे बनी देश की पहली ट्रांसजेंडर IAS

First Transgender IAS Officer India : ओडिशा के कंधमाल जिले के छोटे से गांव कनाबागिरी से निकलकर ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान ने समाज के तानों, भेदभाव और कई मुश्किलों का सामना करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई.

Success Story : स्कूल में हुआ अपमान, हॉस्टल में झेला भेदभाव, फिर ऐसे बनी देश की पहली ट्रांसजेंडर IAS
आज ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान का नाम संघर्ष, आत्मसम्मान और दृढ़ इच्छाशक्ति की कहानी के तौर पर सामने आता है.

Transgender IAS Journey : कनाबागिरी के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर… समाज के तानों, भेदभाव और मुश्किलों से गुजरते हुए एक ऐसे मुकाम तक पहुंचा, जहां पहचान खुद मिसाल बन गई. यह कहानी है ओडिशा के कंधमाल जिले की ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान की. जिन्होंने अपने सपनों को परिस्थितियों के आगे झुकने नहीं दिया. कभी स्कूल में उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठे, कभी साथियों के मजाक और भेदभाव का सामना करना पड़ा. कॉलेज और हॉस्टल के दिनों में भी मुश्किलें कम नहीं हुईं. लेकिन हर चुनौती के बीच ऐश्वर्या ने एक चीज नहीं छोड़ी. अपनी पढ़ाई और अपने सपनों पर भरोसा.

 छोटे से गांव से बड़े सपने तक 

ओडिशा के कंधमाल जिले के कनाबागिरी गांव से आने वाली ऐश्वर्या का जन्म रतिकंत प्रधान के रूप में हुआ था. बचपन से ही उन्हें अपनी पहचान को लेकर सामाजिक दबाव और सवालों का सामना करना पड़ा. छठी कक्षा के दौरान उन्हें पहली बार अपनी लैंगिक पहचान और भावनाओं को लेकर गहराई से एहसास हुआ.

लेकिन उस उम्र में अपनी बात को समझना और उसे समाज के सामने स्वीकार करना आसान नहीं था.

स्कूल के दिनों में कुछ शिक्षकों और आसपास के लोगों की टिप्पणियों ने उनके लिए पढ़ाई का सफर कठिन बनाया. इसके बावजूद ऐश्वर्या ने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया.

Latest and Breaking News on NDTV
 जब पहचान बनी संघर्ष की सबसे बड़ी चुनौती 

स्कूल के बाद जब ऐश्वर्या उच्च शिक्षा के लिए भुवनेश्वर पहुंचीं, तो चुनौतियां एक बार फिर सामने आईं. पोस्ट-ग्रेजुएशन के दौरान हॉस्टल में उन्हें कथित तौर पर मजाक, भेदभाव और उत्पीड़न जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा.

ऐसे हालात किसी के भी हौसले को तोड़ सकते थे. लेकिन ऐश्वर्या ने मुश्किलों को अपनी मंजिल के बीच दीवार नहीं बनने दिया.

उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया और इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म की पढ़ाई की.

उनके सफर में परिवार का साथ भी बेहद महत्वपूर्ण रहा. उनकी मां और बहन ने उनकी पहचान को स्वीकार करने और अपने सपनों की ओर आगे बढ़ने में उनका समर्थन किया.

Latest and Breaking News on NDTV
 2014: जब ऐश्वर्या ने खुद को खुलकर अपनाया 

अप्रैल 2014 ऐश्वर्या की जिंदगी में एक अहम मोड़ लेकर आया. उन्होंने पुरुषों के कपड़े छोड़कर साड़ी पहनना शुरू किया. यह केवल पहनावे में बदलाव नहीं था. यह अपने अस्तित्व और पहचान को खुलकर स्वीकार करने का फैसला था. शुरुआत में लोगों की निगाहें बदलीं, सवाल उठे और स्वीकार्यता पाने में समय लगा. लेकिन ऐश्वर्या पीछे नहीं हटीं. धीरे-धीरे उनके सीनियर्स और साथियों ने भी उनकी पहचान को स्वीकार किया. जिस पहचान को कभी सवालों के घेरे में रखा गया था, वही पहचान आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई.

Latest and Breaking News on NDTV
 कमर्शियल टैक्स ऑफिसर से IAS तक 

ऐश्वर्या ने प्रशासनिक सेवा में भी अपनी जगह बनाई. वह ओडिशा फाइनेंशियल सर्विसेज में कमर्शियल टैक्स ऑफिसर के रूप में कार्य कर चुकी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IAS अधिकारी बनने के बाद उन्होंने देश की पहली ट्रांसजेंडर IAS अधिकारी के रूप में पहचान हासिल की. उनका सफर केवल एक प्रशासनिक पद तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष की कहानी है जिसमें एक इंसान ने सामाजिक पूर्वाग्रहों के बावजूद अपनी शिक्षा, मेहनत और आत्मविश्वास को अपनी ताकत बनाया.

 ताने बहुत मिले… लेकिन जवाब कामयाबी ने दिया 

ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान की कहानी उस सोच को चुनौती देती है, जो किसी व्यक्ति की क्षमता को उसकी लैंगिक पहचान के आधार पर आंकती है. कनाबागिरी से शुरू हुआ यह सफर बताता है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए रास्ता आसान होना जरूरी नहीं, हौसला मजबूत होना जरूरी है. स्कूल के अपमान से लेकर उच्च शिक्षा की चुनौतियों तक, अपनी पहचान स्वीकार करने से लेकर प्रशासनिक सेवा में मुकाम हासिल करने तक ऐश्वर्या ने हर पड़ाव पर एक बात साबित की:

पहचान छिपाने से नहीं, उसे स्वीकार करने और उसके साथ आगे बढ़ने से इंसान अपनी असली ताकत पहचानता है.

Latest and Breaking News on NDTV

आज ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान का नाम संघर्ष, आत्मसम्मान और दृढ़ इच्छाशक्ति की कहानी के तौर पर सामने आता है. उनकी यात्रा सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों के लिए उम्मीद की कहानी है जो समाज की सीमाओं के बीच अपने सपनों के लिए रास्ता तलाश रहे हैं.कनाबागिरी की बेटी से देश की पहली ट्रांसजेंडर IAS अधिकारी तक ऐश्वर्या की कहानी सच में है, तानों से ताकत तक, संघर्ष से सम्मान तक और पहचान से नई मिसाल तक.

 यह भी पढ़ें- Success Story :पोती की बात दिल पर लगी, 85 साल की उम्र में कर ली MA, अब PhD की तैयारी में लाल चंद गोदारा

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com