महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो)
श्रीनगर:
जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kshmir) में अनिश्चतता का दौर खत्म होने को है. घाटी में राज्यपाल शासन लागू होने के करीब 6 महीने हो गए और अब ऐसा लग रहा है कि राज्य को गठबंधन की सरकार मिल जाएगी. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जम्मू एवं कश्मीर में सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गई है, जिसके लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) तथा पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और कांग्रेस मिला सकते हैं. सूत्रों ने बताया है कि इसके लिए कांग्रेस हाईकमान से हरी झंडी मिल गई है. माना जा रहा है कि गुरुवार को इसकी घोषणा होगी.
अमित शाह के आरोपों पर महबूबा मुफ्ती का पलटवार, हर फैसले में साथ थी BJP
हालांकि, बताया जा रहा है कि पीडीपी बाहर से समर्थन देगी. बता दें कि जून में जम्मू-कश्मीर में आए सियासी संकट के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तत्काल प्रभाव से जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू करने को मंजूरी दे दी थी. भारतीय जनता पार्टी ने महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी से गठबंधन तोड़ सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद वहां सियासी संकट के हालात पैदा हो गये थे. हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी ने लगे हाथ राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर दी. बता दें कि जम्मू- कश्मीर में छह साल का कार्यकाल होता है और वहां पर राष्ट्रपति के बदले राज्यपाल शासन लागू होता है.
हालांकि, एनसी-पीडीपी के संभावित गठबंधन पर पीडीपी के सांसद, मुजफ्फर बैग ने कहा कि जम्मू कैसे रिएक्ट करेगा? यह पूरी तरह से मुस्लिम गठबंधन है, लद्दाख कैसे रिएक्ट करेगा? ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बातचीत से जम्मू और कश्मीर में मुश्किलें बढ़ेंगी. लद्दाख, जम्मू उस राज्य का हिस्सा नहीं रहेगा जिसपर किसी एक समुदाय का शासन हो.
समर्थन वापसी से ही नहीं, BJP की इस 'हरकत' से भी हैरान रह गई थीं महबूबा
कांग्रेस, नेशलन कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच गठबंधन पर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम पार्टियों का यह कहना था कि क्यों ना हम इकट्ठे हो जाए और सरकार बनाए. अभी वो स्टेज सरकार बनने वाली नहीं है, एक सुझाव के तौर पर बातचीत चल रही है.
सियासी संकट के बीच जम्मू-कश्मीर में लगा राज्यपाल शासन, राष्ट्रपति कोविंद ने दी मंजूरी
गौरतलब है कि जम्मू एवं कश्मीर की 87-सदस्यीय विधानसभा के लिए वर्ष 2014 में 25 नवंबर और 20 दिसंबर के बीच पांच चरणों में चुनाव करवाए गए थे, जिनमें तत्कालीन सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस की हार हुई, और कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार चला रही पार्टी को सिर्फ 15 सीटों से संतोष करना पड़ा. दूसरी ओर, वर्ष 2008 में सिर्फ 11 सीटों पर जीती BJP ने इस बार 'मोदी लहर' में 25 सीटें जीतीं, और 52 दिन के गवर्नर शासन के बाद पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की PDP को समर्थन देकर सरकार बनवा दी.
नोटबंदी के बाद जो आतंकवाद ख़त्म हो गया था, उसी कारण गठबंधन ख़त्म हो गया
1 मार्च, 2015 को सत्तासीन हुए सईद का जनवरी, 2016 में देहावसान होने के कारण सरकार फिर संकट में आ गई, और राज्य में एक बार फिर गवर्नर शासन लगाना पड़ा. बीजेपी पर ये आरोप भी लग रहे थे कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने ये फ़ैसला लिया ताकि घाटी में बढ़ रही आतंकी घटनाओं को लेकर केंद्र की छवि ख़राब न हो. इसलिए सीज़फ़ायर ख़त्म करने के बाद तुरंत गठबंधन तोड़ दिया. लेकिन इस गठबंधन पर सवाल हमेशा उठते रहे. दोनों दलों ने कई मुश्किल मुकाम पार भी किए. लेकिन अब ऐसा क्या हो गया कि बीजेपी ने बिना बताए पीडीपी का साथ छोड़ दिया.
जम्मू कश्मीर विधानसभा
कुल 87 सीटें
पीडीपी- 28
बीजेपी-25
नेशनल कॉन्फ्रेंस-15
कांग्रेस-12
जेकेपीसी-2
सीपीएम-1
जेकेपीडीएफ़-1
निर्दलीय-3
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अमित शाह के आरोपों पर महबूबा मुफ्ती का पलटवार, हर फैसले में साथ थी BJP
हालांकि, बताया जा रहा है कि पीडीपी बाहर से समर्थन देगी. बता दें कि जून में जम्मू-कश्मीर में आए सियासी संकट के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तत्काल प्रभाव से जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू करने को मंजूरी दे दी थी. भारतीय जनता पार्टी ने महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी से गठबंधन तोड़ सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद वहां सियासी संकट के हालात पैदा हो गये थे. हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी ने लगे हाथ राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर दी. बता दें कि जम्मू- कश्मीर में छह साल का कार्यकाल होता है और वहां पर राष्ट्रपति के बदले राज्यपाल शासन लागू होता है.
हालांकि, एनसी-पीडीपी के संभावित गठबंधन पर पीडीपी के सांसद, मुजफ्फर बैग ने कहा कि जम्मू कैसे रिएक्ट करेगा? यह पूरी तरह से मुस्लिम गठबंधन है, लद्दाख कैसे रिएक्ट करेगा? ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बातचीत से जम्मू और कश्मीर में मुश्किलें बढ़ेंगी. लद्दाख, जम्मू उस राज्य का हिस्सा नहीं रहेगा जिसपर किसी एक समुदाय का शासन हो.
How will Jammu react? It will be an all Muslim alliance, how will Ladakh react? These irresponsible talks will only lead to trifurcation of J&K. Ladakh&Jammu will not remain a part of the state which is ruled by only one community:PDP MP Muzaffar Baig on potential NC-PDP alliance pic.twitter.com/1jgGBOT8mM
— ANI (@ANI) November 21, 2018
समर्थन वापसी से ही नहीं, BJP की इस 'हरकत' से भी हैरान रह गई थीं महबूबा
कांग्रेस, नेशलन कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच गठबंधन पर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम पार्टियों का यह कहना था कि क्यों ना हम इकट्ठे हो जाए और सरकार बनाए. अभी वो स्टेज सरकार बनने वाली नहीं है, एक सुझाव के तौर पर बातचीत चल रही है.
कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी की सरकार गिरनने के बाद किसी भी पार्टी ने सरकार बनाने का दावा नहीं पेश किया था. नेशनल कॉन्फ्रेंस और बीजेपी ने राष्ट्रपति शासन की मांग की थी. वहीं पीडीपी भी रेस में नहीं थी. कांग्रेस ने पहले ही कह दिया कि पीडीपी के साथ जाने का कोई सवाल ही नहीं है. ज़ाहिर है सिर्फ़ एक मात्र विकल्प राष्ट्रपति शासन बचता था. इस बीच जम्मू कश्मीर के गवर्नर ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी थी. उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा की थी.Hum parties ka yeh kehna tha ki kyu na hum ikatthe ho jaye aur sarkar banaye. Abhi vo stage sarkar banne wali nahi hai,ek sujhaav ke taur par baatcheet abhi chal rahi hai: Ghulam Nabi Azad, Congress on potential Congress-PDP-NC alliance pic.twitter.com/QqahukNrXp
— ANI (@ANI) November 21, 2018
सियासी संकट के बीच जम्मू-कश्मीर में लगा राज्यपाल शासन, राष्ट्रपति कोविंद ने दी मंजूरी
गौरतलब है कि जम्मू एवं कश्मीर की 87-सदस्यीय विधानसभा के लिए वर्ष 2014 में 25 नवंबर और 20 दिसंबर के बीच पांच चरणों में चुनाव करवाए गए थे, जिनमें तत्कालीन सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस की हार हुई, और कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार चला रही पार्टी को सिर्फ 15 सीटों से संतोष करना पड़ा. दूसरी ओर, वर्ष 2008 में सिर्फ 11 सीटों पर जीती BJP ने इस बार 'मोदी लहर' में 25 सीटें जीतीं, और 52 दिन के गवर्नर शासन के बाद पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की PDP को समर्थन देकर सरकार बनवा दी.
नोटबंदी के बाद जो आतंकवाद ख़त्म हो गया था, उसी कारण गठबंधन ख़त्म हो गया
1 मार्च, 2015 को सत्तासीन हुए सईद का जनवरी, 2016 में देहावसान होने के कारण सरकार फिर संकट में आ गई, और राज्य में एक बार फिर गवर्नर शासन लगाना पड़ा. बीजेपी पर ये आरोप भी लग रहे थे कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने ये फ़ैसला लिया ताकि घाटी में बढ़ रही आतंकी घटनाओं को लेकर केंद्र की छवि ख़राब न हो. इसलिए सीज़फ़ायर ख़त्म करने के बाद तुरंत गठबंधन तोड़ दिया. लेकिन इस गठबंधन पर सवाल हमेशा उठते रहे. दोनों दलों ने कई मुश्किल मुकाम पार भी किए. लेकिन अब ऐसा क्या हो गया कि बीजेपी ने बिना बताए पीडीपी का साथ छोड़ दिया.
जम्मू कश्मीर विधानसभा
कुल 87 सीटें
पीडीपी- 28
बीजेपी-25
नेशनल कॉन्फ्रेंस-15
कांग्रेस-12
जेकेपीसी-2
सीपीएम-1
जेकेपीडीएफ़-1
निर्दलीय-3
VIDEO: Exclusive: NDTV से बोले सत्यपाल मलिक, कश्मीर के लिए मोदी सरकार बेस्ट
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