- UP के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने वोटर लिस्ट में अजीबोगरीब नामों पर की गई टिप्पणी के लिए माफी मांगी
- नवदीप रिणवा ने कहा कि कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते, लेकिन पोस्ट की भाषा अनुचित थी
- विवाद तब शुरू हुआ जब राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मतदाता सूची में गलत नामों को लेकर सवाल उठाए थे
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची में अजीबोगरीब नाम 'राम ने शर्मा को मारा' पर सफाई देने के लिए किये गए पोस्ट की भाषा को लेकर माफी मांगी है. नवदीप रिणवा ने गलत मतदाता पर्ची को लेकर जातिगत पक्षपात के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सोमवार को कहा था कि कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते. रिणवा ने हाल में हुए विधान परिषद चुनाव में मतदाता सूची में 'राम ने शर्मा को मारा' जैसे अजीबोगरीब नाम पर अपनी सफाई देते हुए तंज करते हुए कहा था कि भगवान का यह शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, वरना जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का इल्ज़ाम भी लगता.
पोस्ट की भाषा के लिए मांगी माफी
नवदीप रिणवा पोस्ट की भाषा को लेकर माफी मांगते लिए लिखा, "इस हैंडल के किये गए पोस्ट में टिप्पणियों की भाषा के स्तर और भाव और इनकी तीखी प्रकृति इस आधिकारिक हैंडल से अपेक्षित संचार की प्रकृति के अनुरूप नहीं है. पोस्ट में टिप्पणियों से उत्पन्न वास्तविक आक्रोश को अच्छी तरह से नोट किया गया है. हम इससे अचंभित और नाराज लोगों से ईमानदारी से माफी मांगते हैं. हम आगे से ध्यान रखेंग और हमारी सोशल मीडिया पोस्ट की भाषा शालीन और औपचारिक होगी."

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कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
सीईओ ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह द्वारा निर्वाचन आयोग से उठाए गये सवालों का जवाब देते हुए यह टिप्पणी अपने आधिकारिक 'एक्स' पर एक पोस्ट में की थी. इस पोस्ट में कहा कि हालिया विधान परिषद के चुनाव की मतदाता सूची में एक अजीबोगरीब नाम ‘राम ने शर्मा को मारा' भी है. सीईओ ने अपनी पोस्ट में एक मतदाता पर्ची भी शेयर की, जिसमें इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य के चुनाव में रवि शर्मा नामक मतदाता के पिता के नाम के आगे 'राम ने शर्मा को मारा' दर्ज है.
"ज्ञानेश कुमार जी राम ने यादव को ही क्यों मारा?"
इसके पहले रविवार शाम राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे संबोधित करते हुए 'एक्स' पर एक पोस्ट में सवाल उठाया था- "ज्ञानेश कुमार जी आखिर राम ने 'यादव' को ही क्यों मारा? राम ने किसी सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय, बिष्ट को क्यों नही मारा? आपका कंप्यूटर घोर जातिवादी है क्या? क्या आप किसी पार्टी का एजेंडा चला रहे हैं? यह राजेश यादव का जायज सवाल है."
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सिंह ने इस पोस्ट में वोटर लिस्ट की गलतियों को लेकर आजमगढ़ के राजेश यादव का करीब तीन मिनट का एक वीडियो भी शेयर किया. उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में नामों के स्थान पर ‘राम ने यादव को मारा', ‘राम ने शर्मा को मारा' जैसे नाम और मतदाता के पिता के नाम के स्थान पर ‘बी.कॉम' जैसी प्रविष्टियां सामने आई हैं, जिसके बाद निर्वाचन आयोग को इन गलतियों पर सफाई देनी पड़ी है.
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