- तेलंगाना के चर्च पादरी ने तीन साल तक 10 रुपये के सिक्के जमा कर एक्टिवा खरीदने का सपना पूरा किया
- जोसेफ ने रोजाना मिलने वाले 10 रुपये के सिक्कों को अलग रखकर कुल 1.23 लाख रुपये की बचत की
- पादरी ने पैसे इकट्ठा करना 10 अक्टूबर 2020 को शुरू किया था और लगातार मेहनत से सिक्के जोड़ते रहे
हौसले अगर बुलंद हों तो इंसान क्या नहीं कर सकता. अगर कुछ महंगा खरीदने का मन हो और जेब में एकमुश्त रकम न हो तो इसका मतलब ये नहीं कि सपनों को मार लिया जाए. पाई-पाई जोड़कर भी सपने को पूरा किया जा सकता है. तेलंगाना के एक चर्च पादरी ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है. उन्होंने अनोखी मिसाल पेश की है. 51 साल के चर्च पादरी बी. रवि जोसेफ रॉयल एनफील्ड बुलेट खरीदना चाहते थे. लेकिन पैसों की तंगी की वजह से वह इसे खरीद ही नहीं पा रहे थे. फिर उन्होंने सोचा बाइक नहीं तो एक्टिवा ही सही. लेकिन इसके लिए भी उनके पास पैसे नहीं थे. फिर क्या था. उन्होंने प्लानिंग के तहत बचत शुरू कर दी.

NDTV इमेज
पादरी ने अपने सपने को पूरा करने के लिए 10 रुपये के सिक्के जोड़ना शुरू किया. उन्होंने तीन साल तक 10-10 रुपये के सिक्के एक जगह इकट्ठा किए.चर्च पादरी जोसेफ ने 10 अक्टूबर, 2023 को सिक्के जमा करना शुरू किया था, वह रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान मिलने वाले हर 10 रुपये के सिक्के को अलग रख लेते थे.उन्होंने तीन साल तक ऐसा किया और आखिरकार वह दिन आ ही गया जब उनकी एक्टिवा उनके पास थी. 10-10 रुपये के सिक्के जमाकर पादरी ने 1.23 लाख की नई होंडा एक्टिवा खरीद ली. पादरी तेलंगाना के मंचेरियल जिले के लक्सेट्टीपेट के रहने वाले हैं.

NDTV इमेज
उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों से वह सिक्के जोड़ने में जुटे थे. वह रोजमर्रा की जरूरतों, कभी किराने के खर्च तो कभी बाहर जाते समय थोड़ा-थोड़ा करके पैसे बचाते रहते थे. इस तरह उन्होंने करीब 1,23,000 रुपये जमा कर लिए. हालांकि पैसे बहुत ज्यादा नहीं होने की वजह से रॉयल एनफील्ड बुलेट नहीं खरीद पाने पर उनको बहुत अफसोस है.

NDTV इमेज
जोसेफ ने बताया कि उन्होंने 10 अक्टूबर, 2023 को सिक्के जमा करना शुरू किया था. शुरू में उनको लगा कि इस पैसे से वह घर की जरूरत की चीजें खरीद लें. लेकिन बाद में उन्होंने टू-व्हीलर खरीदने का फैसला लिया. पैसा बचाना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था. बीच में उन्होंने सुना कि 10 रुपये के सिक्के बंद हो सकते हैं. उनकी कानूनी मान्यता खत्म हो सकती है. ये सुनते ही परिवार ने उनको सिक्के जमाने से रोकने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी. वह एक-एक करके सिक्के जमा करते रहे.

NDTV इमेज
जब वह जमा किए गए सिक्कों को लेकर जगदंबा होंडा मोटर्स के शोरूम पहुंचे तो वहां के कर्मचारी हैरान रह गए. उनको सिक्के गिनने में करीब दो घंटे लगे और कुल रकम 1.23 लाख रुपये निकली. एक्टिवा देखते ही उनके और उनके परिवार के चेहरे खुशी से खिल उठे. गाड़ी लेते समय जोसेफ के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे. इस अनोखे तरीके से पेमेंट करने की बात शोरूम और स्थानीय लोगों के बीचचर्चा का विषय बन गई. उनकी तीन साल की मेहनत और बचत की वजह से ही उनका टू-व्हीलर खरीदने का लंबे समय से चला आ रहा सपना पूरा हो सका.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं