- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर पटाखों के इस्तेमाल पर रोक को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रखा है
- अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए हर साल आदेश जारी करना अपर्याप्त बताते हुए ठोस प्रयासों की जरूरत जताई
- कोर्ट ने वायु प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता में विराट कोहली जैसी लोकप्रिय हस्तियों को शामिल करने का सुझाव दिया है
दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर पटाखों के इस्तेमाल पर रोक को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना वी. बराले की पीठ ने कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल हर साल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उच्च स्तर पर ठोस और दीर्घकालिक प्रयास करने होंगे.
अदालत ने कहा कि हर साल इस मुद्दे पर आदेश जारी किए जाते हैं, लेकिन उनका उल्लंघन ज्यादा और पालन कम होता है. कोर्ट ने कहा कि यह मामला अब उसके लिए लगभग 'अकेडमिक प्रैक्टिस' बन गया है. कोर्ट ने सरकारों और एजेंसियों से कहा कि वे प्रदूषण नियंत्रण के लिए कुछ नए और इनोवेशन आधारित उपायों पर काम करें.
विराट कोहली का किया जिक्र
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समाज को एक स्पष्ट संदेश देने की जरूरत है. अदालत ने सुझाव दिया कि वायु प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान में विराट कोहली जैसी लोकप्रिय हस्तियों को शामिल किया जा सकता है ताकि युवाओं तक प्रभावी संदेश पहुंचे.
कोर्ट ने कहा कि मौजूदा पीढ़ी और पिछली पीढ़ी के नजरिये में अंतर दिखाई देता है और पटाखों के इस्तेमाल के प्रभाव को व्यापक संदर्भ में देखने की जरूरत है. अदालत ने कहा कि वह संतुलित आदेश पारित करेगी, लेकिन असली चुनौती उसके प्रभावी क्रियान्वयन की है.
ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं
अदालत की सहायता के लिए नियुक्त अमाइकस क्यूरी ने कहा कि पटाखों से बड़ी मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर (PM) निकलता है. विशेष रूप से PM 2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों और रक्त प्रवाह के जरिए शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंच सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं.
उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली के चेस्ट एक्सपर्ट डॉक्टरों के अनुसार अब ऐसे किशोरों के फेफड़ों में भी काले धब्बे दिखाई दे रहे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया. साथ ही फेफड़ों के कैंसर के गैर-धूम्रपान करने वाले मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है.
अमाइकस ने यह भी कहा कि तथाकथित 'ग्रीन पटाखे' भी पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं हैं. उनके अनुसार इनमें सामान्य पटाखों की तुलना में उत्सर्जन कम हो सकता है, लेकिन ये भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं. उन्होंने दलील दी कि जब तक प्रभावी निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था नहीं बन जाती, तब तक प्रतिबंध जारी रहना चाहिए.
पटाखा बिजनेस से जुड़े लोगो की क्या दलील?
पटाखा कारोबारियों की ओर से सीनियर वकील जे. साई दीपक ने तर्क दिया कि पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी नहीं रहा है. उनके अनुसार इससे अवैध कारोबार, तस्करी और गैर-मानक पटाखों की बिक्री बढ़ी है. उन्होंने कहा कि नियमों का पालन करने वाले निर्माताओं को भी अवैध कारोबारियों के साथ एक ही नजर से देखा जाता है.
उन्होंने अदालत से कहा कि ग्रीन पटाखों के लिए वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा तय मानकों के आधार पर नियमन किया जा सकता है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.
केंद्र और दिल्ली सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और CAQM की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार ने बताया कि दिल्ली में 1 नवंबर से BS-VI मानक से नीचे के वाहनों पर रोक लगाई गई है. इसके अलावा सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव, कंस्ट्रक्शन साइट पर एंटी-स्मॉग गन की तैनाती, 608 एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल और ट्रैफिक कंट्रोल जैसे नियम लागू किए गए हैं. दिल्ली सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि पिछले सालों की तुलना में इस बार प्रदूषण से निपटने की तैयारियां ज्यादा व्यापक हैं.
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