- मुंबई के मरीन ड्राइव पर 2017 में जेब्रा क्रॉसिंग पार कर रही छात्रा को तेज रफ्तार कार से टक्कर लगी थी
- ड्राइवर पी. नारायणसामी को नौ साल बाद लापरवाही से गाड़ी चलाने का दोषी ठहराया गया है
- अदालत ने आरोपी की उम्र और आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे जेल की बजाय जुर्माना लगाया है
मुंबई की एक जेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार कर रही छात्रा को तेज रफ्तार कार से टक्कर मारने वाले ड्राइवर को 9 साल बाद दोषी ठहराया गया. लेकिन कोर्ट ने जब अपना फैसला सुनाया, तो लोग हैरान हो गए. मुंबई के मरीन ड्राइव पर 9 साल पहले जेब्रा क्रॉसिंग पार कर रही 17 वर्षीय छात्रा को तेज रफ्तार कार से टक्कर मारकर 'वेजिटेटिव स्टेट' (अचेत अवस्था) में पहुंचाने वाले 66 वर्षीय ड्राइवर पी. नारायणसामी को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने लापरवाही से गाड़ी चलाने का दोषी ठहराया है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट सुप्रिया निकम ने आरोपी के खिलाफ नरम रुख अपनाते हुए उसे जेल भेजने के बजाय सिर्फ 20,000 रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया, जिसे पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा.
आरोपी ड्राइवर ने अपने बचाव में क्या कहा?
सरकारी गाड़ी चला रहे चेन्नई निवासी आरोपी ड्राइवर ने अदालत में खुद को बेकसूर बताते हुए अपनी बढ़ती उम्र और खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देकर नरमी बरतने की गुहार लगाई थी. आरोपी ड्राइवर ने बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है. अदालत ने पूरी स्थिति का आकलन करने के बाद नरमी बरती और सिर्फ जुर्माना लगाया.
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कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि आरोपी का यह पहला अपराध है, इससे पहले ड्राइविंग के दौरान उससे कोई गलती नहीं हुई है. ड्राइवर के नाम कोई गलत गाड़ी चलाने का चालान भी नहीं है. वहीं, घटना साल 2017 की है, आरोपी मुकदमे की लंबी प्रक्रिया से गुजर चुका है और यह उसके जीवन की 'इकलौती चूक' थी, इसलिए केवल जुर्माना लगाना ही उचित सजा है.
9 साल पहले ऐसे हुआ थ एक्सीडेंट
यह दर्दनाक हादसा 28 मई 2017 को मरीन प्लाजा होटल के पास उस समय हुआ था, जब पीड़िता निधि जेठमलानी अपने दोस्तों के साथ 12वीं कक्षा में दाखिले के लिए केसी कॉलेज जा रही थी और रेलवे कमिश्नर को ले जा रही एक तेज रफ्तार इनोवा कार ने उसे टक्कर मार दी थी. चश्मदीदों और निधि के दोस्तों ने अदालत में गवाही दी कि गाड़ी की रफ्तार बेहद तेज थी और टक्कर इतनी भीषण थी कि सिर और कमर में गंभीर चोटें आने के कारण निधि मौके पर ही बेहोश हो गई थी, जिसके बाद उसे उसी कार से अस्पताल ले जाया गया था.
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इलाज के लिए करोड़ों रुपये का फंड
इससे पहले साल 2021 में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने पीड़िता को करीब 70 लाख रुपये का मुआवजा और भविष्य के इलाज के लिए 1.5 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड देने का आदेश दिया था. साल 2025 में इस मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने निधि की तुलना प्रसिद्ध अरुणा शानबाग मामले से करते हुए उसकी स्थिति को अत्यंत संवेदनशील बताया था और रेल मंत्रालय से सहानुभूतिपूर्वक विचार कर 5 करोड़ रुपये के अंतिम निपटान दावे पर पुनर्विचार करने को कहा था.
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