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112 एनकाउंटर कर चुके प्रदीप शर्मा- गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस का साथ नहीं देते स्टार, सिर्फ एक एक्ट्रेस आगे आई

मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने बताया कि 90 के दशक में गैंगस्टर्स की तूती बोलती थी, बॉलीवुड में सिर्फ प्रीति जिंटा ने हिम्मत दिखाकर गवाही दी.

112 एनकाउंटर कर चुके प्रदीप शर्मा- गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस का साथ नहीं देते स्टार, सिर्फ एक एक्ट्रेस आगे आई
पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ने सुनाई अंडरवर्ल्ड से जुड़ी कहानियां.
मुंबई:

मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने 90 के दशक के अंडरवर्ल्ड राज और बॉलीवुड कनेक्शन पर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग डर के मारे पुलिस का सहयोग नहीं करते, सिर्फ प्रीति जिंटा ही एक ऐसी अभिनेत्री थीं, जिन्होंने निडर होकर गवाही दी थी और पुलिस का सपोर्ट किया था. NDTV के साथ बातचीत में उन्होंने यह भी बताया कि अब शूटर्स की भर्ती सोशल मीडिया के जरिए हो रही है. प्रदीप शर्मा अपने करियर के दौरान 112 एनकाउंटर मामलों में शामिल रहे हैं. 90 के दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, "मुंबई के अंदर गैंगस्टर की तूती बोलती थी. अंडरवर्ल्ड में कनेक्शन बड़ी बात मानी जाती थी. यह कोई फिदाईन नहीं होते हैं, इनका मकसद सिर्फ पैसा कमाना होता है."

प्रदीप शर्मा ने आगे बताया कि इंडस्ट्री के लोग माफियाओं को खबर भी पहुंचाते थे और सेटेलमेंट भी करवाते थे. फिल्म इंडस्ट्री में कुछ लोग मशहूर हो चुके थे कि फला गैंगस्टर का फोन आए, तो फला शख्स के पास जाओ, मामला सुलझ जाएगा.

क्यों हुआ प्रीति जिंटा का जिक्र?

फिल्म 'चोरी-चोरी, चुपक-चुपके' से जुड़े मामले पर मुंबई को पुलिस को बॉलीवुड कलाकारों की तरफ से सपोर्ट न मिलने से जुड़े सवाल पर प्रदीप शर्मा ने कहा, "प्रीति जिंटा ने एक लेडी होकर भी पुलिस का सपोर्ट किया था और कोर्ट में आकर गवाही थी.उन्होंने सब कुछ बताया था." 

प्रदीप शर्मा आगे कहते हैं कि जो लोग पुलिस के लिए कोर्ट में आकर गवाही नहीं दे सके, उनकी कुछ मजबूरियां रही होंगी. बॉलीवुड में टॉप क्लास एक्टर, एक्ट्रेस, प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स कभी इन मामलों से नहीं इन्वॉल्व होते हैं.

90 के दौर में कैसे खत्म हुआ गैंगस्टर्स का खौफ?

प्रदीप शर्मा ने बीते दौर को याद करते हुए बताया कि गैंगस्टरों का नेटवर्क ध्वस्त करने के लिए सोर्सेज डेवलप किए गए. टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया. इसके बाद गैंगस्टर के सर्कर जो कुछ भी होता था, वो पुलिस को पता चल जाता था. उन्होंने आगे बताया कि गैंग मेंबर्स को ही इन्फॉर्मर बना दिया जाता था. किसी पर फायरिंग से पहले ही आरोपी को पकड़ लिया जाता था. 

'सोशल मीडिया के जरिए भर्ती हो रहे शूटर्स...'

मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए प्रदीप शर्मा ने कहा, "जो लोग बाहर बैठे हैं, उनके जरिए शूटरों की भर्ती की जाती है. पहली वजह है रोजगार और दूसरी वजह है कि लॉरेंश बिश्नोई को ग्लैमराइज कर दिया गया है. ऐसे में छोटे-मोटे अपराध करने वाले लोग शूटर बनकर इनकी गैंग में भर्ती हो रहे हैं."

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