- बीजेपी ने खरगे के बयान के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किए और उनके खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई गई
- बीजेपी एसआईआर मुद्दे पर जनसंपर्क अभियान चला रही है, जिसमें पदयात्राएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे
- कांग्रेस ने खरगे के बयान को बीजेपी की साजिश बताया, साथ ही पीएम मोदी के अपमानजनक भाषणों का हवाला दिया है
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमला कर एसआईआर के मुद्दे पर दबाव झेल रही बीजेपी को आक्रामक होने का मौका दे दिया है. यही कारण है कि बिना देरी किए बीजेपी आज देश भर में सड़कों पर उतर आई. कल खरगे ने कहा था कि ‘मोदी का बाप भी जाएगा'. पटना में पार्टी के एक कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ता के नारे के जवाब में उन्होंने यह बात तीन बार कही थी. यह कार्यकर्ता उनके भाषण के बीच ही नारे लगाने लगा था कि ‘केवल विद्रोह से ही मोदी को हटा सकते हैं, अन्यथा मोदी नहीं जाएंगे.' इससे उत्तेजित होकर खरगे ने यह विवादास्पद बात कही थी.
बीजेपी ने पुराने बयानों की दिलाई याद
बीजेपी नेताओं के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पीएम मोदी पर इस तरह व्यक्तिगत हमला किया. इससे पहले उनकी स्वर्गीय माताजी के बारे में भी अपमानजनक बातें कहीं गईं. इसी तरह पीएम मोदी को ‘मौत का सौदागर', ‘नीच व्यक्ति', ‘आतंकवादी', ‘भस्मासुर', ‘गंदी नाली का कीड़ा', ‘ज़हरीला साँप', ‘जनरल डायर' आदि कहा जा चुका है.
देशव्यापी विरोध और शिकायत
यही कारण है कि पीएम मोदी के दिवंगत पिता के बारे में खरगे के इस बयान से बीजेपी ने बड़ा मुद्दा बना लिया. खरगे के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करा दी गई. देश भर में बीजेपी ने खरगे के खिलाफ प्रदर्शन किया. दिल्ली में उनके सरकारी घर के बाहर बीजेपी कार्यकर्ता जुटे और नारेबाज़ी की. वे खरगे से माफ़ी मांगने की मांग कर रहे हैं.
बीजेपी पर दबाव की पृष्ठभूमि
बीजेपी के इस आक्रामक रवैये के राजनीतिक कारण भी हैं. नीट पेपर लीक पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के बाद से ही बीजेपी दबाव में है. न केवल शिक्षा मंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ा था बल्कि पूरा मॉनसून सत्र ही विपक्षी हंगामे में धुल गया था. उसके बाद विपक्षी एसआईआर का मुद्दा उठा लिया और अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विरोध कर रहा है. इंडिया ब्लॉक ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान पर दस लाख लोगों को इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा है. उससे पहले ‘मॉक पार्लियामेंट' में ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा.
एसआईआर पर बीजेपी का जवाबी अभियान
उधर, बीजेपी ने देश भर में एसआईआर को लेकर तथ्य जनता के बीच ले जाने का फैसला किया है. इसके लिए पार्टी पांच नवंबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान चला रही है. इसके माध्यम से भाजपा जनता तक संदेश पहुंचाने की कोशिश करेगी कि विपक्षी दल और खासकर कांग्रेस अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है, जो लोकतंत्र के खिलाफ है.
पदयात्रा और संवाद कार्यक्रम की तैयारी
अभियान का उद्देश्य एसआईआर (मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण) पर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर कर मतदाता सूची की शुद्धता के बारे में आम जनता को अवगत कराना है. अभियान के तहत प्रत्येक जिला मुख्यालय पर पदयात्राएं निकाली जाएंगी. प्रत्येक पदयात्रा में 10 हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही हर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 200 प्रबुद्ध एवं आमंत्रित नागरिकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.
युवाओं तक पहुंचने की रणनीति
युवाओं और विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए विश्वविद्यालयों, कालेजों, आईटीआई और कोचिंग संस्थानों में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे. राष्ट्रीय स्तर पर 10 लाख से अधिक युवाओं और पेशेवरों तक पहुंचने और जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर पर प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की जाएगी. पार्टी ने इसके लिए बुकलेट भी बनायी है. इस बीच खरगे का बयान आ गया. पार्टी इसे बड़ा मुद्दा बना रही है. आने वाले समय में इसे लेकर आंदोलन और तेज किया जायेगा. एक बीजेपी नेता के अनुसार खरगे के बयान से एक नवंबर की रैली से ध्यान हटाने में सफलता मिल सकती है. इससे विपक्ष बचाव की मुद्रा में भी आ सकता है.
कांग्रेस का पलटवार
हालांकिकांग्रेस नेता ऐसा नहीं मानते. पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दावा किया कि खरगे के कार्यक्रम में हंगामा करने वाला व्यक्ति बीजेपी कार्यकर्ता था. खेड़ा ने यह भी याद दिलाया कि पीएम मोदी खुद भी कई बार सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बारे में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं. इनमें ‘कांग्रेस की विधवा', ‘जर्सी गाय' आदि शामिल हैं. कांग्रेस नेताओं के अनुसार खरगे वोट चोरी करने वालों को जेल भेजने की बात कह रहे थे. इसी सिलसिले में उन्होंने यह बात कही थी.
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