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This Article is From Apr 16, 2026

परिसीमन में तेलंगाना की हिस्सेदारी कम हुई तो सड़क पर उतरेंगे...के कविता की केंद्र को चेतावनी

के. कविता ने एक्स पर पोस्ट में कहा, 'तेलंगाना के लोगों की आवाज को परिसीमन की आड़ में दबाया नहीं जा सकता. तेलंगाना समेत दक्षिण भारतीय राज्यों के आनुपातिक प्रतिनिधित्व की रक्षा होनी चाहिए.'

परिसीमन में तेलंगाना की हिस्सेदारी कम हुई तो सड़क पर उतरेंगे...के कविता की केंद्र को चेतावनी
परिसमीन पर के कविता की केंद्र को चेतावनी.
  • केंद्र सरकार संसद के बजट सत्र के विशेष सत्र में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से जुड़ा प्रमुख विधेयक पेश किया
  • तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने कहा कि यदि तेलंगाना की हिस्सेदारी कम हुई तो विरोध प्रदर्शन होंगे
  • के कविता ने मांग की है कि संसद में तेलंगाना का वर्तमान प्रतिनिधित्व का 3.13 प्रतिशत न्यूनतम आधार बना रहे

केंद्र सरकार ने संसद में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से जुड़ा प्रमुख विधेयक पेश किया. विपक्ष परिसीमन के पक्ष में नहीं है. तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने केंद्र को इसे लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि परिसीमन में अगर तेलंगाना की हिस्सेदारी कम हुई तो लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र ने अगर परिसीमन की आड़ में राज्य के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की कोशिश की तो तेलंगाना में बड़ा आंदोलन होगा.

तेलंगाना को इनाम मिले, न कि दंडित किया जाए

के. कविता की मांग है कि वर्तमान में संसद में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व 3.13% है, जिसका भविष्य में भी न्यूनतम आधार बना रहना चाहिए. अगर इसमें कमी की गई तो जनता सड़क पर उतरेगी. पूर्व सांसद में कहा कि जिस राज्य ने दशकों तक परिवार नियोजन और आर्थिक विकास का नेतृत्व किया है, उसे इनाम मिलना चाहिए, न कि राजनीतिक मताधिकार से वंचित कर दंडित किया जाना चाहिए.

तेलंगाना की आवाज को दबाया नहीं जा सकता

के. कविता ने एक्स पर पोस्ट में कहा, 'तेलंगाना के लोगों की आवाज को परिसीमन की आड़ में दबाया नहीं जा सकता. तेलंगाना समेत दक्षिण भारतीय राज्यों के आनुपातिक प्रतिनिधित्व की रक्षा होनी चाहिए. उनकी मांग है कि वर्तमान में संसद में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व न्यूनतम है. हमारी मांग है कि यह 3.13 प्रतिशत न्यूनतम होना चाहिए, अधिकतम नहीं.

अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े रहेंगे

उन्होंने कहा कि केंद्र ने अगर तेलंगाना के लोकतांत्रिक हितों को कमजोर करने की कोशिश की तो बड़ा और तेज आंदोलन होगा. ये लड़ाई संसद के गलियारों से तेलंगाना की हर गली तक जाएगी. इस जनसांख्यिकीय अन्याय के खिलाफ सभी डटकर खड़े रहेंगे.  तेलंगाना की राजनीतिक संप्रभुता पूरी तरह से सुरक्षित होने तक लड़ते रहेंगे. उन्होंने केंद्र के उस प्रस्ताव पर सवाल उठाए, जिसमें सीटों को 50% तक बढ़ाने की बात कही गई है. उनका तर्क है कि कुल संख्या बढ़ना तो ठीक लग सकता है, लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में यह दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए क्षेत्रीय असंतुलन पैदा करेगा.

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