दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर मंडराते संकट के बादल के बीच भारत के लिए सुखद खबर है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि पिछले तिमाही का देखें या पिछले 3 साल का अगर GDP ग्रोथ रेट देखें वह 7% से ज्यादा रहा है. उन्होंने NDTV से बात करते हुए कहा, "पिछले सालों में भी चुनौतियां रही है लेकिन जिस तरह से सरकार ने हस्तक्षेप किया है और कदम उठाए हैं अलग-अलग क्षेत्र में और घरेलू सेक्टर और कारपोरेट सेक्टर का जो रिस्पॉन्स रहा है उसकी वजह से इंडिया की इकोनॉमी काफी लचीला रही है."
सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा, "सरकार की नीतियों की वजह से, हस्तक्षेप की वजह अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है. मैं आशा करता हूं कि जिस हिसाब से जीडीपी की ग्रोथ रेट रही है वही मजबूती फ्यूचर में भी रहेगी."
अगले तिमाही में क्या होने वाला है?
डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा है कि अगले तिमाही में क्या नंबर्स आएंगे इस पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता हूं, लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि पिछले तीन सालों में जीडीपी की ग्रोथ रेट 7% से 8% के बीच लगातार रही है और ऐसा नहीं लगता की ग्रोथ रेट में आगे कोई अंतर होना चाहिए. ग्रोथ रेट में थोड़ा उतार-चढाव रहता है लेकिन जो लचीलापन है इकोनॉमी की वह बरकरार रहेगी.
RBI के पूर्व गर्वनर शक्तिकांत दास ने क्या कहा?
शक्तिकांत दास बताया कि कोविड महामारी के बाद के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था ने लगातार मजबूती दिखाई है. वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2026 के बीच देश की औसत आर्थिक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया युद्धों, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों जैसी चुनौतियों से जूझ रही है. ऐसे समय में कौटिल्य के विचार और उनकी आर्थिक समझ पहले से अधिक प्रासंगिक दिखाई देती है. दास के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनसे निपटने में भारत की नीतिगत मजबूती मददगार साबित हुई है.
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