- देश में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच जनगणना अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगी
- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल के बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों और चुनावी राज्यों में जनगणना की प्रक्रिया स्थगित रहेगी
- यूपी, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में जनगणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक घर-घर जाकर पूरी होगी
देश भर में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच जनगणना होगी. इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है. लेकिन जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी से प्रभावित इलाकों में इस दौरान जनगणना की प्रक्रिया नहीं होगी. इसके अलावा चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में भी इस अवधि में जनगणना नहीं होगी. यूपी समेत 4 राज्यों में घर-घर जाकर जनगणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक की जाएगी. इसके अलावा 5 जनवरी से 9 जनवरी के रिविजनल राउंड चलेगा. इससे पहले इन राज्यों में 16 नवंबर से 30 नवंबर के दौरान सेल्फ एम्युनरेशन के लिए भी विंडो खुलेगी.
इन राज्यों में पहले जनगणना इसलिए कराई जा रही है क्योंकि मार्च-अप्रैल के दौरान चुनाव होने हैं. ऐसे में पहले ही जनगणना की पूरी प्रक्रिया करा ली जाएगी. केंद्रीय कैबिनेट ने जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार जनगणना के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च, 2027 होगी.
भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार मणिपुर (अगली घोषणा तक), गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख, तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर शेष सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना का कार्य किया जाएगा.
अधिसूचना के अनुसार, जनगणना के लिए ‘पुनरीक्षण चरण' एक मार्च 2027 से पांच मार्च 2027 तक आयोजित किया जाएगा. इसमें कहा गया कि घर-घर जाकर जनगणना शुरू होने से ठीक पहले, 10 जनवरी 2027 से 24 जनवरी 2027 तक ‘स्व-गणना' का विकल्प उपलब्ध रहेगा. बता दें कि इस बार की जनगणना में जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे.
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