विज्ञापन

चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवालों के जवाब देगी बीजेपी, ये है पूरी रणनीति

ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के हमलों का जवाब देगी बीजेपी, SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर शुरू करेगी बड़ा अभियान

चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवालों के जवाब देगी बीजेपी, ये है पूरी रणनीति
ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी अभियान के खिलाफ BJP का जवाबी प्लान
NDTV
  • बीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के आरोपों का प्रचार अभियान चलाने का निर्णय लिया है
  • फॉर्म 6 में बदलाव को मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग ने तीनों आयुक्तों की सहमति से जोड़ा है
  • बीजेपी का कहना है कि SIR प्रक्रिया पर विपक्ष का राजनीतिक लाभ नहीं होगा

पूरे देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे विपक्ष के अभियान का बीजेपी ने तथ्यों के साथ मुकाबला करने का फैसला किया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार बीजेपी इस मामले पर विपक्ष के दबाव में नहीं आएगी. जिस तरह से विपक्ष ज्ञानेश कुमार के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साध रहा है, बीजेपी ने इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाने का फैसला किया है.

बीजेपी ने सोशल मीडिया पर इसकी शुरुआत कर भी दी है. पार्टी के आधिकारिक हैंडल से एक्स पर आज फ़ॉर्म 6 को लेकर विपक्ष के आरोपों का सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया गया है. बीजेपी ने लिखा है कि 'फॉर्म 6 को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम की पूरी सच्चाई जानिए. राहुल गांधी और कांग्रेस सहित विपक्ष की ओर से फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर लगातार झूठ फैलाया जा रहा है. लेकिन SIR के दौरान आवश्यक डिक्लेयरेशन को फॉर्म 6 की प्रक्रिया के साथ जोड़ा गया है, ताकि मतदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान हो और उन्हें अलग-अलग प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े. यह फैसला तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिया गया मकसद सिर्फ मतदाताओं की सुविधा बढ़ाना है. सुप्रीम कोर्ट ने भी SIR को कानूनन जरूरी माना है.' बीजेपी ने आगे लिखा है कि भ्रम नहीं, तथ्यों पर भरोसा करें, पूरी जानकारी पढ़ें, समझें और आगे साझा करें.'

पार्टी नेताओं के अनुसार आयोग पर लगाए जा रहे सवालों का सीधे जवाब देने का फैसला किया गया है. पार्टी के प्रमुख नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से भी एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर उठाए गए सवालों का विस्तृत जवाब दिया है. संवैधानिक संस्था होने के नाते मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य अधिकारी सीधे मीडिया में आकर बयान नहीं देते हैं. जिस तरह से आयोग के बहाने पूरी सरकार और बीजेपी की कई राज्यों में जीत पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसके बाद पार्टी ने यह कदम उठाया है.

जहां तक कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, टीएमसी और सीजेपी आदि द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का प्रश्न है, बीजेपी का मानना है कि यह मुद्दा जनता को सीधे प्रभावित नहीं करता, इसलिए विपक्षी दलों को इसका राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा. पार्टी नेता बिहार का उदाहरण देते हैं जहां सबसे पहले विशेष गहन पुनरीक्षण या SIR अभियान चलाया गया था. वहां राहुल गांधी ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना कर इसके खिलाफ राज्य में यात्रा भी निकाली थी. लेकिन उसके कुछ ही महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक ने अपना सबसे खराब प्रदर्शन किया था. एक बीजेपी नेता ने कहा कि अगर विपक्षी दल बिहार और प बंगाल में बीजेपी के प्रदर्शन को SIR से जोड़ रहे हैं तो फिर केरल और तमिलनाडु के चुनाव परिणामों का क्या, जहां SIR के बाद कांग्रेस और टीवीके की जीत हुई.

बीजेपी नेताओं के मुताबिक यह ऐसा मुद्दा नहीं जिससे जनता सीधे तौर पर जुड़ती है. वे पूछते हैं कि क्या मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण नहीं होना चाहिए. क्या ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूचियों में होने चाहिए जो या तो इस दुनिया में नहीं हैं या फिर जिनका पता बदल गया हो. वे कहते हैं कि चुनाव आयोग के मुद्दे पर वैसा देशव्यापी जनाक्रोश नहीं दिखता जैसा नीट पेपर लीक के मुद्दे पर दिखा था.

हालांकि पार्टी नेता यह अवश्य मानते हैं कि चुनाव आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा. जिस तरह से द इंडियन एक्सप्रेस ने उजागर किया कि था कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के भीतर 14 बार लिखित में गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं, उससे यह अंदरूनी मतभेद सार्वजनिक हुए हैं. पार्टी नेताओं के मुताबिक यह मतभेद ‘अहम का टकराव' हैं जो कि एक समान पद और अनुभव के लोगों के साथ काम करने पर अमूमन होते हैं. बीजेपी नेता आयोग के उस बयान की ओर ध्यान दिलाते हैं जिसमें कहा गया था कि सभी फैसले आम राय से किए गए. इसके साथ ही, जिस तरह से एसआईआर की खामियों को दूर करने के लिए आयोग ने एक के बाद एक कई फैसले किए, उससे भी इस पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मजबूत होगी. 

इसमें एक बड़ा फैसला यह भी है कि उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाया जाएगा जहां एसआईआर हो चुका है. वहां छूटे गए लोगों और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए अभियान चलेगा. इसमें कोई नया घोषणापत्र नहीं देना होगा और बीएलओ घर-घर जाकर छूटे हुए लोगों का सत्यापन करेंगे और मौके पर फॉर्म छह भरवाएंगे.

पार्टी नेता विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के औचित्य पर भी सवाल उठाते हैं. उनके अनुसार क्या मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से फैसले अपने आप रद्द हो जाएंगे? उनके मुताबिक ऐसा नहीं होता क्योंकि किसी संवैधानिक पदाधिकारी के पद से हटने या इस्तीफा देने मात्र से उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए सभी निर्णय स्वतः रद्द नहीं हो जाते. बल्कि किसी चुनाव को रद्द करने, चुनाव परिणाम को चुनौती देने या किसी निर्णय को निरस्त कराने के लिए संबंधित कानून में निर्धारित प्रक्रिया और वैधानिक आधार मौजूद हैं. इसलिए राजनीतिक मांग और कानूनी रूप से प्रभावी कार्रवाई के बीच अंतर समझना जरूरी है.

बीजेपी नेता विपक्ष को इस मुद्दे पर कठघरे में खड़ा भी कर रहे हैं. उनके मुताबिक एसआईआर को लेकर किए जा रहे दावे, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दबाव और सर्वोच्च न्यायालय को भी विवाद में घसीटने की कोशिश जिस तरह से की गई है, यह अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं. उनके मुताबिक यह एक बड़े संस्थागत दबाव का हिस्सा लगते हैं. चुनाव आयोग ने इन आरोपों के जवाब दिए हैं. लेकिन अगर ये दबाव और भ्रम फैलाने वाले दावे कामयाब हो गए, तो असर सिर्फ मतदाता सूची तक नहीं रुकेगा. न्यायपालिका, चुनावों की वैधता और कानून-व्यवस्था तक पहुंच सकता है. इसीलिए तथ्यों के साथ विपक्ष के इस अभियान का मुकाबला करना जरूरी है और पार्टी ऐसा ही कर रही है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
BJP, ECI, Election Commision, Election Commision News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com