
दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पुलिस कार्रवाई और विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) कानून के खिलाफ सोमवार को देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शन का समर्थन नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी करते नजर आए. कहीं-कहीं ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, तो कहीं इसने हिंसक रूप ले लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन प्रदर्शनों को दुखद एवं निराशाजनक बताया और शांति की अपील की. जामिया के छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और नागरिकता कानून के खिलाफ गुस्से का असर उत्तर प्रदेश से लेकर केरल और महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल तक में देखा गया.
जामिया के छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष एकजुट हो गया. कांग्रेस के अलावा चार अन्य राजनीतिक दल के नेताओं ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन कर जामिया परिसर में रविवार शाम की घटनाओं की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से जांच कराने की मांग की. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार एक ऐसा कानून लाकर देश में हिंसा के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है जिसका देशभर में विरोध किया जा रहा है और सभी विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं. अगर सरकार यह कानून नहीं लाती तो कोई हिंसा नहीं होती.''
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देशभर में फैल गया है.#JamiaProtests #JamilaMillia #CitizenshipAct pic.twitter.com/KPNgsWCAC7
— NDTVIndia (@ndtvindia) December 16, 2019
पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में कांग्रेस ने इंडिया गेट पर शाम चार बजे से शाम छह बजे तक मूक प्रदर्शन भी किया. प्रियंका ने कहा, ‘‘छात्रों पर हमला भारत की आत्मा पर वार है.'' वहीं उनकी मां और पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी ने एक बयान जारी कर भाजपा पर देश में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बयान में आरोप लगाया, ‘भाजपा हिंसा और बंटवारे की जननी है.' छात्र प्रदर्शनकारियों ने जामिया विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बिना पुलिस के परिसर में घुसने के साथ जामिया के पुस्तकालय में आंसू गैस का इस्तेमाल करने की जांच कराने की भी मांग की.
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास और आईआईटी मुंबई में भी प्रदर्शन हुए, जहां के छात्र प्राय: प्रदर्शनों से दूर रहते हैं. आईआईएम अहमदाबाद, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरू के छात्रों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया. इसके साथ ही मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में भी प्रदर्शन हुआ. आईआईएम बेंगलुरू के छात्रों ने जामिया के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिसिया कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है.
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में बड़ी रैली निकाली और कहा कि संशेाधित कानून और एनआरसी को उनकी लाश पर से गुजर कर ही राज्य में लागू किया जा सकता है. इस बीच राज्य में नागरिकता (संशोधन) कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान राजमार्ग और रेलमार्गों को बाधित किये जाने तथा आगजनी और लूटपाट की घटनाओं से यह पूरा विरोध उग्र स्वरूप धारण करता जा रहा है.
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केरल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी यूडीएफ और एलडीएफ ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ संयुक्त प्रदर्शन किया. इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कानून को लेकर हो रहे हिंसक प्रदर्शन दुर्भाग्यपूर्ण और बेहद निराशाजनक हैं. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘संशोधित नागरिकता कानून स्वीकार्यता, सौहार्द, करुणा और भाईचारे की भारत की सदियों पुरानी संस्कृति की व्याख्या करता है. हम निहित स्वार्थी समूहों को हमें बांटने और गड़बड़ी पैदा करने की इजाजत नहीं दे सकते.''
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से हिंसा रोकने तथा जान-माल को किसी तरह का नुकसान होने से रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को कहा. उच्चतम न्यायालय ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान दंगे और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने को लेकर कड़ा संज्ञान लिया और कहा कि यह तत्काल रुकना चाहिए. पूर्वोत्तर में कई स्थानों पर जनजीवन ठहर-सा गया है. पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के बीच ट्रेनों को रद्द कर दिया गया.
दिल्ली विश्वविद्यालय के कई छात्रों ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ एकजुटता दर्शाने के लिए सोमवार को परीक्षाओं का बहिष्कार कर प्रदर्शन किया. हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद कुछ छात्रों ने जामिया के गेट के बाहर कमीज उतारकर प्रदर्शन किया. छात्रों के समूह ने ‘इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए और मार्च निकाला. उन्होंने पुलिस की बर्बरता की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की.
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सैकड़ों और छात्र सड़कों पर उमड़ पड़े तथा कुछ छात्रों ने यातायात के सुचारू संचालन के लिए मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया. इस बीच जामिया के कई छात्र अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो गए. एक छात्र खानजाला ने कहा, ‘‘जब पुलिस विश्वविद्यालय में घुसी, तब हम वहीं थे. करीब 20 पुलिसकर्मी द्वार नंबर सात से घुसे और करीब 50 अन्य पीछे के द्वार से घुसे. हमने उन्हें बताया कि हम हिंसा में शामिल नहीं थे. उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी. उन्होंने महिलाओं को भी नहीं बख्शा.''
खानजाला के पैरों और पेट में चोटें आई हैं. खानजाला की चोटें देखकर एक महिला रो पड़ी. जामिया के हिरासत में लिए गए 50 छात्रों को सोमवार तड़के रिहा कर दिया गया लेकिन परिसर में तनाव बना हुआ है. जामिया की कुलपति नजमा अख्तर ने भी छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि पुलिस बिना अनुमति के परिसर में घुसी.
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उन्होंने कहा कि परिसर में पुलिस की मौजूदगी को विश्वविद्यालय बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की उच्च स्तरीय जांच की मांग की. लखनऊ स्थित नदवतुल उलमा (नदवा) कॉलेज में सैकड़ों छात्रों ने एकत्रित होकर ‘‘आवाज दो, हम एक हैं'' के नारे लगाए. उन्होंने पुलिस पर पथराव भी किया.
प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश के मऊ में एक पुलिस थाने और वाहनों में तोड़फोड़ की जिसके चलते पुलिस को हवा में गोली चलानी पड़ी. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि दक्षिण टोला थाने के कम्प्यूटर कक्ष में जबर्दस्त तोड़फोड़ की गयी है. इसके अलावा एक अन्य वीडियो में दमकलकर्मी थाने की बाहरी दीवार के पास लगी आग को बुझाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं.
हैदराबाद के मौलाना आजाद उर्दू विश्वविद्यालय में छात्रों ने जामिया के छात्रों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए आधी रात के समय मार्च निकाला और अपनी परीक्षाएं स्थगित करने की मांग की. हैदराबाद विश्वविद्यालय और उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी प्रदर्शन किए और दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की.
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और पश्चिम बंगाल में यादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ ही प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी जामिया के छात्रों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और मांग की गई कि सरकार पुलिस की ‘‘गुंडागर्दी'' के खिलाफ कार्रवाई करे. महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने जामिया और एएमयू में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया.
प्रदेश कांग्रेस प्रमुख बालासाहेब थोराट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और पार्टी के अन्य नेताओं ने नागपुर में धरना दिया. दरअसल, वहां राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है. थोराट ने कहा, ‘‘हम दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस के अमानवीय बर्ताव की निंदा करते हैं.'' केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल, कासरगोड और पांडिचेरी विश्वविद्यालय में छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया. पटियाला के पंजाब विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय और चेन्नई लोयोला कॉलेज के छात्रों ने भी प्रदर्शन किए.
जामिया में हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन में सबसे पहले एएमयू शामिल जहां रविवार देर रात को पुलिस के साथ हुई झड़पों में कम से कम 60 छात्र घायल हो गए. प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय ने पांच जनवरी तक अवकाश की घोषणा कर दी और छात्रों से हॉस्टल खाली करने के लिए कहा गया. जवाहर लाल नेहरू विश्विवद्यालय के छात्र भी जामिया के छात्रों का साथ देने रविवार रात आईटीओ स्थित पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंचे थे.
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं