
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली:
पीएनबी घोटाले की जांच सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने शुरू कर दी है. हर ओर छापे मारे जा रहे हैं. हर पल नई जानकारियां मिल रही हैं जो चौंका देने वाली हैं. लेकिन इन सबके बीच सवाल सबसे बड़ा यही है कि घोटाला सामने आने के बाद नीरव मोदी और मेहुल चौकसी हजारों करोड़ रुपये का घोटाला कर देश छोड़ने में कैसे कामयाब हो गए. उधर पीएनबी धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार पंजाब नेशनल बैंक के डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उसने अनधिकृत रूप से स्विफ्ट प्रणाली के पांचवें स्तर के पासवार्ड को प्राप्त कर लिया था, जिसका इस्तेमाल इस घोटाले में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग(एलओयू) और विदेशी साख पत्र (एफएलसी) के जरिए पैसा जारी करने के लिए किया गया. शेट्टी ने यह खुलासा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों द्वारा उनसे एलओयू के अंतर्गत दूसरे बैंकों को गारंटी और एफएलसी मुहैया कराने की कार्यप्रणाली के संबंध में पूछताछ के बाद किया.
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इस घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के निदेशक करनैल सिंह ने NDTV को बताया कि ईडी बैंक से जुड़े लोगों को भी समन कर रही है. साथ में बैंक के बड़े अफ़सरों से पूरी प्रक्रिया भी समझने की कोशिश है. अभी तक की जानकारी में स्विफ़्ट पेमेंट सिस्टम के लिए हर ब्रांच में 2 लोगों को पासवर्ड का एक्सेस मिलता है, जिसमें अभी गोकुलनाथ शेट्टी और मनोज खरात का हम पता लगाने की कोशिश में हैं कि क्या मैनेजर को भी पासवर्ड एक्सेस था? हम ये भी जांच कर रहे हैं कि बैंक के आरोपियों का ट्रांसफर क्यों नहीं हआ. क्यों इतने सालों से वो एक ही बैंक में थे? फ़र्ज़ी कंपनियों के बारे में हमने इनकम टैक्स से रिपोर्ट मांगी है. विदेशों में जो कंपनियां हैं, उसकी हम जांच कर रहे हैं. हमने पंजाब नेशनल बैंक की 2011 से अब तक की पूरी ऑडिट रिपोर्ट मांगी है. अब तक हमने 5716 करोड़ के जेवरात ज़ब्त किए है.
वीडियो : पीएनबी घोटाले के तार कहां-कहां तक फैले?
उधर पीएनबी के प्रमुख सुनील मेहता सुबह-सुबह सीवीसी के दफ़्तर पहुंचे. उनके साथ उनके अपने विजिलेंस विभाग के अफ़सर थे और वित्त मंत्रालय के अधिकारी भी थे. दो घंटे उनसे पूछताछ हुई. सूत्रों के मुताबिक सीवीसी ने और भी ब्योरे मांगे हैं. कांग्रेस का इल्ज़ाम ये भी है कि मेहुल चौकसी 4 अगस्त को ही फ़रार घोषित किए जा चुके हैं. फिर वो जनवरी में देश से कैसे निकल भागे. कांग्रेस इस मामले में पीएम की चुप्पी पर भी सवाल खड़े कर रही है. इसमें शक नहीं कि काले धन से लड़ने की बात करने वाली सरकार के लिए ये गले की हड्डी बन गया है.
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उधर पीएनबी के प्रमुख सुनील मेहता सुबह-सुबह सीवीसी के दफ़्तर पहुंचे. उनके साथ उनके अपने विजिलेंस विभाग के अफ़सर थे और वित्त मंत्रालय के अधिकारी भी थे. दो घंटे उनसे पूछताछ हुई. सूत्रों के मुताबिक सीवीसी ने और भी ब्योरे मांगे हैं. कांग्रेस का इल्ज़ाम ये भी है कि मेहुल चौकसी 4 अगस्त को ही फ़रार घोषित किए जा चुके हैं. फिर वो जनवरी में देश से कैसे निकल भागे. कांग्रेस इस मामले में पीएम की चुप्पी पर भी सवाल खड़े कर रही है. इसमें शक नहीं कि काले धन से लड़ने की बात करने वाली सरकार के लिए ये गले की हड्डी बन गया है.
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