नई दिल्ली:
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस से उनके अलग होने के घटनाक्रम पर कोई भी टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इससे यह संदेह पैदा होगा कि वह यूपीए को अस्थिर करना चाहते हैं।
पवार ने कहा कि अगले दशक में गठबंधन की राजनीति का बोलबाला होगा और ऐसी मानसिकता पैदा करने की जरूरत है, जिसमें राजनैतिक मतभेदों को व्यक्तिगत नफरत के तौर पर नहीं देखा जाए। पवार ने कहा कि नेहरू परिवार ने तो कांग्रेस के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ही है, साथ में कुछ अन्य लोगों ने भी स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका निभाई है और स्वतंत्रता का इतिहास इसका साक्षी है।
पवार ने कहा कि उन्हें छह साल के लिए कांग्रेस से निकाला गया और इसके बाद उन्होंने खुद अलग रहने का फैसला किया। गौरतलब है कि पवार ने वर्ष 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रस से किनारा किया था। उन्होंने कहा के पार्टी के लिए ऐसी स्थिति नई नहीं है और सुभाषचंद्र बोस को भी कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा, जब महात्मा गांधी इस पद पर उनके चुने जाने से नाखुश थे।
पवार ने कहा कि अगले दशक में गठबंधन की राजनीति का बोलबाला होगा और ऐसी मानसिकता पैदा करने की जरूरत है, जिसमें राजनैतिक मतभेदों को व्यक्तिगत नफरत के तौर पर नहीं देखा जाए। पवार ने कहा कि नेहरू परिवार ने तो कांग्रेस के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ही है, साथ में कुछ अन्य लोगों ने भी स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका निभाई है और स्वतंत्रता का इतिहास इसका साक्षी है।
पवार ने कहा कि उन्हें छह साल के लिए कांग्रेस से निकाला गया और इसके बाद उन्होंने खुद अलग रहने का फैसला किया। गौरतलब है कि पवार ने वर्ष 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रस से किनारा किया था। उन्होंने कहा के पार्टी के लिए ऐसी स्थिति नई नहीं है और सुभाषचंद्र बोस को भी कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा, जब महात्मा गांधी इस पद पर उनके चुने जाने से नाखुश थे।
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