
प्रतीकात्मक तस्वीर
कानपुर:
कानपुर देहात जिले के मंगलपुर गांव में एक दलित महिला ने आरोप लगाया है कि वह गांव के चतुभरुज मंदिर में अपनी बेटी की शादी के लिये पूजा करने गई तो वहां की महिला पुजारिन ने उसके जाने के बाद मंदिर को धोया। लेकिन महिला पुजारिन ने पुलिस को इन आरोपों का खंडन करते हुए बताया कि मंदिर को जब भी बंद किया जाता है तो उससे पहले उसकी धुलाई की जाती है।
थाना प्रभारी जयप्रकाश यादव ने बताया कि चतरुभुज मंदिर के खुलने का समय सुबह तीन बजे से दोपहर बारह बजे तथा शाम तीन से सात बजे तक का है। गत 11 जुलाई को गांव की रहने वाली बिटानी देवी अपनी बेटी नीलम की शादी के पहले पूजा करने कुछ महिलाओं के साथ मंदिर गई।
उन्होंने बताया कि जब वह वहां पहुंची तो मंदिर बंद होने जा रहा था और उसकी सफाई की तैयारियां हो रही थीं। इस पर उन्होंने मंदिर की महिला पुजारिन बबिता त्रिवेदी से कहा कि उनकी बेटी की शादी के पहले की कुछ रस्में है जिन्हें वह पूरा करने दें। इसके बाद बिटानी देवी ने अपनी बेटी नीलम और रिश्तेदार महिलाओं के साथ मंदिर में पूजा अर्चना की।
पुलिस ने बताया कि जब पूजा खत्म हो गई तो नियमानुसार रोज की तरह त्रिवेदी ने मंदिर की सफाई की और उसकी धुलाई कराई। इस पर बिटानी को यह लगा कि मंदिर की सफाई और धुलाई उनकी बेटी की पूजा के कारण कराई गई है। इस पर उन्होंने पुलिस से अपनी बात मौखिक रूप से बताई।
यादव ने कहा कि इस पर उन्होंने महिला पुजारी बबिता त्रिवेदी को बुलाकर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि हर रोज मंदिर बंद होने से पहले सफाई की जाती है और पानी की धुलाई की जाती है तथा गंगाजल छिड़का जाता है ताकि जब दोबारा मंदिर खुले तो आने वाले भक्तों को कोई समस्या न हो और उन्हें मंदिर साफ सुथरा दिखे। उस दिन किसी विशेष कारण से ऐसा नहीं किया गया बल्कि रोजाना होने वाली सफाई और धुलाई की गई।
उन्होंने बताया कि इस पर बिटानी देवी और बबिता त्रिवेदी दोनों को बुलाकर आमने सामने बैठाया गया जिससे बिटानी की दलित होने के कारण मंदिर की धुलाई की बात साफ हो गयी। इसलिये उन्होंने पुलिस को कोई लिखित रिपोर्ट नहीं दी, इसलिये पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
थाना प्रभारी जयप्रकाश यादव ने बताया कि चतरुभुज मंदिर के खुलने का समय सुबह तीन बजे से दोपहर बारह बजे तथा शाम तीन से सात बजे तक का है। गत 11 जुलाई को गांव की रहने वाली बिटानी देवी अपनी बेटी नीलम की शादी के पहले पूजा करने कुछ महिलाओं के साथ मंदिर गई।
उन्होंने बताया कि जब वह वहां पहुंची तो मंदिर बंद होने जा रहा था और उसकी सफाई की तैयारियां हो रही थीं। इस पर उन्होंने मंदिर की महिला पुजारिन बबिता त्रिवेदी से कहा कि उनकी बेटी की शादी के पहले की कुछ रस्में है जिन्हें वह पूरा करने दें। इसके बाद बिटानी देवी ने अपनी बेटी नीलम और रिश्तेदार महिलाओं के साथ मंदिर में पूजा अर्चना की।
पुलिस ने बताया कि जब पूजा खत्म हो गई तो नियमानुसार रोज की तरह त्रिवेदी ने मंदिर की सफाई की और उसकी धुलाई कराई। इस पर बिटानी को यह लगा कि मंदिर की सफाई और धुलाई उनकी बेटी की पूजा के कारण कराई गई है। इस पर उन्होंने पुलिस से अपनी बात मौखिक रूप से बताई।
यादव ने कहा कि इस पर उन्होंने महिला पुजारी बबिता त्रिवेदी को बुलाकर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि हर रोज मंदिर बंद होने से पहले सफाई की जाती है और पानी की धुलाई की जाती है तथा गंगाजल छिड़का जाता है ताकि जब दोबारा मंदिर खुले तो आने वाले भक्तों को कोई समस्या न हो और उन्हें मंदिर साफ सुथरा दिखे। उस दिन किसी विशेष कारण से ऐसा नहीं किया गया बल्कि रोजाना होने वाली सफाई और धुलाई की गई।
उन्होंने बताया कि इस पर बिटानी देवी और बबिता त्रिवेदी दोनों को बुलाकर आमने सामने बैठाया गया जिससे बिटानी की दलित होने के कारण मंदिर की धुलाई की बात साफ हो गयी। इसलिये उन्होंने पुलिस को कोई लिखित रिपोर्ट नहीं दी, इसलिये पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं