
कड़े मुकाबले के बीच अहमद पटेल को 8 वोट के साथ जीत मिली थी...
अहमदाबाद:
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल के चुनाव जीतने के एक दिन बाद ही कांग्रेस ने पार्टी के खिलाफ क्रॉस वोटिंग करने वाले 8 विधायकों को निलंबित कर दिया है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक इन सभी विधायकों को 6 साल के लिए निलंबित किया गया है. इन विधायकों ने मंगलवार को राज्यसभा चुनाव के लिए हुई वोटिंग में कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल के खिलाफ वोटिंग की थी. पार्टी ने बाकायदा व्हिप जारी किया लेकिन उसका उल्लंघन करके विधायकों ने बगावत की थी.
जिन विधायकों पर कार्रवाई की गई है उनमें महेन्द्र वाघेला, राघवजी पटेल, हकुभा जाडेजा, सीके राउलजी, अमित चौधरी, कमसी मकवाना और भोलाभाई गोहिल सहित एक अन्य विधायक शामिल है. गौरलतब है कि राघव जी पटेल और भोला भाई गोहिल का वोट चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया था, जिससे अहमद पटेल जीतने में कामयाब रहे. इन दोनों विधायकों पर बीजेपी अध्यक्ष को मत पर्ची दिखाकर वोट डालने का आरोप कांग्रेस ने लगाया था जिसे बाद में चुनाव आयोग ने सही पाया था.
पढ़ें: कुछ ऐसा रहा है कांग्रेस के 'चाणक्य' अहमद पटेल का राजनीतिक सफर
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने बताया, "हमने इन आठों विधायकों को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है. हम इनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत भी कार्रवाई करेंगे."
VIDEO : हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद अहमद पटेल की जीत
गौरतलब है कि गुजरात राज्यसभा सभा में कड़े मुकाबले के बीच अहमद पटेल 44 वोट के साथ जीत मिली थी. यदि गणित और दावों को समझा जाए तो उनको 45 वोट मिलने चाहिए थे. दरअसल मामला कुछ यूं है कि कांग्रेस के 45 वोट थे. उनमें से चुनाव आयोग ने दो वोट को अमान्य करार दे दिया. यानी कांग्रेस के पास 43 वोट बचे. ये वोट पटेल को मिले. शरद पवार की एनसीपी के दो वोट थे. पवार ने कांग्रेस का समर्थन किया लेकिन कहा कि उनमें से एक वोट बीजेपी के खाते में चला गया. वहीं दूसरी तरफ जदयू के एकमात्र विधायक छोटू वसावा ने कहा कि उन्होंने अहमद पटेल को वोट दिया. यानी इन दो वोटों की बदौलत अहमद पटेल को 45 मिलने थे. लेकिन केवल उनको 44 वोट ही मिले. यही एक ऐसा रहस्य है जिस पर अभी तक पर्दा नहीं उठा है. एक बात साफ है कि इनमें से कोई एक झूठ रहा है.
जिन विधायकों पर कार्रवाई की गई है उनमें महेन्द्र वाघेला, राघवजी पटेल, हकुभा जाडेजा, सीके राउलजी, अमित चौधरी, कमसी मकवाना और भोलाभाई गोहिल सहित एक अन्य विधायक शामिल है. गौरलतब है कि राघव जी पटेल और भोला भाई गोहिल का वोट चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया था, जिससे अहमद पटेल जीतने में कामयाब रहे. इन दोनों विधायकों पर बीजेपी अध्यक्ष को मत पर्ची दिखाकर वोट डालने का आरोप कांग्रेस ने लगाया था जिसे बाद में चुनाव आयोग ने सही पाया था.
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गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने बताया, "हमने इन आठों विधायकों को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है. हम इनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत भी कार्रवाई करेंगे."
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गौरतलब है कि गुजरात राज्यसभा सभा में कड़े मुकाबले के बीच अहमद पटेल 44 वोट के साथ जीत मिली थी. यदि गणित और दावों को समझा जाए तो उनको 45 वोट मिलने चाहिए थे. दरअसल मामला कुछ यूं है कि कांग्रेस के 45 वोट थे. उनमें से चुनाव आयोग ने दो वोट को अमान्य करार दे दिया. यानी कांग्रेस के पास 43 वोट बचे. ये वोट पटेल को मिले. शरद पवार की एनसीपी के दो वोट थे. पवार ने कांग्रेस का समर्थन किया लेकिन कहा कि उनमें से एक वोट बीजेपी के खाते में चला गया. वहीं दूसरी तरफ जदयू के एकमात्र विधायक छोटू वसावा ने कहा कि उन्होंने अहमद पटेल को वोट दिया. यानी इन दो वोटों की बदौलत अहमद पटेल को 45 मिलने थे. लेकिन केवल उनको 44 वोट ही मिले. यही एक ऐसा रहस्य है जिस पर अभी तक पर्दा नहीं उठा है. एक बात साफ है कि इनमें से कोई एक झूठ रहा है.
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