
अपनी मां रोहिना कियानी के साथ इफ्तिखार अहमद
नई दिल्ली:
साल भर से अपनी पाकिस्तानी मां से अलग रह रहा उसका पांच वर्षीय बेटा भारतीय अधिकारियों की मदद से शनिवार को अंतत: अपनी मां की गोद में पहुंच गया. मां-बेटे का यह मिलन भारत और पाकिस्तान के बीच अटारी-वाघा सीमा पर हुआ. पांच वर्षीय इफ्तिखार को जम्मू एवं कश्मीर के रहने वाले उसके पिता गुलजार अहमद साल भर पहले 'जबरन' लेकर भारत चले आए थे. बच्चे को उसकी मां के पास पहुंचाने में मदद करने के लिए पाकिस्तान ने भारत का आभार व्यक्त किया है. नई दिल्ली में स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग ने कहा कि इफ्तिखार को पहले कुछ घंटे एक वरिष्ठ राजनयिक के साथ अमृतसर में एक होटल में रखा गया, जहां से बाद में उसे वाघा पहुंचा दिया गया.
पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा, "इफ्तिखार को उसकी मां तक वापस पहुंचाने में भारत सरकार की सहयोगपूर्ण भूमिका की मैं सराहना करता हूं." इफ्तिखार के पिता गुलजार मार्च, 2016 में उसे लेकर जम्मू एवं कश्मीर के गांदरबल चले आए थे. इसके बाद बच्चे की मां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की रहने वाली रोहिना कियानी ने बच्चे का संरक्षण हासिल करने के लिए भारत की एक अदालत में मामला दाखिल किया. मामले में फैसला तो पिछले ही वर्ष मई में आ गया था, लेकिन सीमा पर चल रहे तनाव के चलते आठ महीने तक बच्चे को उसकी मां को नहीं सौंपा जा सका.
कथित तौर पर बच्चे के पिता ने अपनी पत्नी से झूठ बोला था कि वह इफ्तिखार को एक विवाह समारोह में लेकर जा रहा है. लेकिन वह इफ्तिखार को लेकर पहले दुबई गया और वहां से गांदरबल चला आया. लेकिन जब मामला पाकिस्तानी उच्चायोग पहुंचा और यह साबित हो गया कि इफ्तिखार पाकिस्तानी नागरिक है, तो बच्चे को उसकी मां को सौंपने का फैसला दिया गया.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा, "इफ्तिखार को उसकी मां तक वापस पहुंचाने में भारत सरकार की सहयोगपूर्ण भूमिका की मैं सराहना करता हूं." इफ्तिखार के पिता गुलजार मार्च, 2016 में उसे लेकर जम्मू एवं कश्मीर के गांदरबल चले आए थे. इसके बाद बच्चे की मां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की रहने वाली रोहिना कियानी ने बच्चे का संरक्षण हासिल करने के लिए भारत की एक अदालत में मामला दाखिल किया. मामले में फैसला तो पिछले ही वर्ष मई में आ गया था, लेकिन सीमा पर चल रहे तनाव के चलते आठ महीने तक बच्चे को उसकी मां को नहीं सौंपा जा सका.
कथित तौर पर बच्चे के पिता ने अपनी पत्नी से झूठ बोला था कि वह इफ्तिखार को एक विवाह समारोह में लेकर जा रहा है. लेकिन वह इफ्तिखार को लेकर पहले दुबई गया और वहां से गांदरबल चला आया. लेकिन जब मामला पाकिस्तानी उच्चायोग पहुंचा और यह साबित हो गया कि इफ्तिखार पाकिस्तानी नागरिक है, तो बच्चे को उसकी मां को सौंपने का फैसला दिया गया.
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