दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार में धनतेरस और नरक चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व है. इन दोनों दिनों में यमराज के नाम से दीपक जलाने और दीपदान करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि यमराज के निमित्त दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और उनकी लंबी उम्र की कामना की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यम का दीपक किस दिशा में जलाना चाहिए, इसमें कितनी बातियां लगानी चाहिए और दीपदान के लिए कौन-सी जगह शुभ मानी जाती है. आइए आचार्य मदन मोहन से जानते हैं यम का दीपक जलाने और दीपदान की सही विधि.
किस दिशा में जलाना चाहिए यम का दीपक?
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में दक्षिण दिशा का संबंध यमराज से माना गया है. इसलिए धनतेरस के दिन घर की दक्षिण दिशा में यम के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिशा में दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि और सदस्यों की लंबी उम्र की कामना पूरी होती है.
कैसे बनाएं और जलाएं यम का दीपक?
यम का दीपक बनाने के लिए आटे का चौमुखा यानी चार मुख वाला दीपक तैयार करें. इसमें चार बातियां लगाएं और सरसों का तेल भरें. इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाएं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन इस तरह दीपक जलाने से परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है.
नरक चतुर्दशी पर कैसे करें दीपदान?
आचार्य के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन घर के सबसे बड़े सदस्य को यम के नाम का एक बड़ा दीपक जलाना चाहिए. इसके बाद इस दीपक को पूरे घर में घुमाकर घर से बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर रख देना चाहिए. परंपरा के अनुसार, दीपक लेकर जाते समय परिवार के दूसरे सदस्य घर के अंदर रहते हैं और इस दीपक को नहीं देखते हैं.
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कहां करना चाहिए दीपदान?
आचार्य ने आगे बताया कि दीपदान के लिए नदी, तालाब या किसी जलाशय के किनारे जगह चुन सकते हैं. इसके अलावा तुलसी, पीपल, केला और आंवले के पेड़ के नीचे भी दीपक जलाने की परंपरा है. मंदिर के पास भी दीपदान किया जा सकता है. पानी के पास दीपक रखते समय उसे सुरक्षित जगह पर रखें, ताकि आग या पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे.
दीपदान करने का क्या है शुभ समय
आचार्य के अनुसार, धनतेरस और नरक चतुर्दशी के दिन प्रदोष काल में दीपदान करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त में भी दीपदान किया जा सकता है. हालांकि, पूजा का सटीक समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए. धार्मिक मान्यता में दीपदान को यमराज के प्रति श्रद्धा और परिवार की मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है.
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