दिवाली का त्योहार आज यानी धनतेरस से शुरू हो गया है. ये त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है. इस साल दिवाली रविवार यानी 8 नवंबर को मनाई जाएगी. इससे एक दिन पहने छोटी दिवाली होती है. इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. ये पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध करके हजारों महिलाओं को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था. छोटी दिवाली के दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. चलिए आपको बताते हैं छोटी दिवाली पर क्या करें और नरक चतुर्दशी की कथा क्या है?
नरक चतुर्दशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण अपनी पत्नियों के साथ द्वारिका में रहते थे. एक दिन देवराज इंद्र भगवान कृष्ण के पास आए और कहा कि हे कृष्ण दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार की वजह से देवतागण त्राहि त्राहि कर रहे हैं. भौमासुर को ही नरकासुर कहा जाता है. क्रूर भौमासुर ने वरुण का छत्र, अदिती के कुंडल और देवताओं से मणि छीन ली है और वो तीनों लोकों का राजा बन गया है. भौमासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं और आमजन की कन्याओं का भी हरण कर लिया है और उनको बंदीगृह में डाल दिया है, कृपया करके इन तीनों लोकों को उस क्रूर राक्षस से बचाइए.
देवराज इंद्र की बात सुनकर भगवान कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ गरूड़ पर सवार होकर प्रागज्योतषपुर पहुंचे, जहां क्रूर भौमासुर रहता था. भगवान कृष्ण ने पहले अपनी पत्नी की मदद से मुर नामक दैत्य के साथ उसके 6 पुत्रों का वध कर दिया. मुर दैत्य का वध हो जाने का समाचार सुनकर भौमासुर अपनी सेना के साथ युद्ध के लिए निकला. भौमासुर को शाप था कि वो स्त्री के हाथों मारा जाएगा. इसलिए भगवान कृष्ण ने पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया और युद्ध के अंत में सत्यभामा की मदद से भौमासुर का अंत कर दिया. इसके बाद भौमासुर के पुत्र भगदत्त को अभय का वरदान देकर प्रागज्योतिष का राजा बना दिया.
भगवान कृष्ण ने जिस दिन भौमासुर का वध किया था, उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी इसलिए इस तिथि को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान कृष्ण ने ना सिर्फ नरकासुर का वध किया बल्कि उसकी कैद से लगभग 16 हजार महिलाओं को मुक्त भी करवाया था. इसी खुशी के कारण उस दिन दीपक जलाए गए और चारों तरफ दीपदान भी किया गया. नरकासुर की मृत्यु के बाद भगवान श्रीकृष्ण के शरीर पर पड़े रक्त के छींट को साफ करने के लिए उन्होंने स्वयं तेल से स्नान किया था. यही वजह है कि तब ये इस हमेशा से शरीर पर तेल लगाकर स्नान करते हैं और उबटन भी लगाते हैं.
छोटी दिवाली पर क्या करें?
छोटी दिवाली के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल लगाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. इसे अभ्यंग स्नान या नरक स्नान भी कहते हैं. ऐसा करने से व्यक्ति को नरक के भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन घर की अच्छी तरह साफ-सफाई की जाती है. शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं. कुछ जगहों पर यमराज के नाम का दीपक जलाने की भी परंपरा है. इसे यम दीपदान कहा जाता है. इसके अलावा छोटी दिवाली पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है. कई जगहों पर घरों को रंगोली और फूलों से सजाया जाता है. इस दिन लोग अपने परिवार के साथ खुशियां बांटते हैं और मिठाइयां भी बांटते हैं.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
यह भी पढ़ें:- तुलसी की मंजरी से घर पर बनाएं धूपबत्ती? बिना केमिकल के धूपबत्ती बनाने का आसान तरीका
यह भी पढ़ें:- पुराने पीतल को कैसे साफ करें? काला पीतल कैसे साफ करें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं