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Shardiya Navratri Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन होती है मां महागौरी की पूजा, यहां पढ़ें मां महागौरी चालीसा, मां की आरती और मंत्र

आज शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन है. ऐसे में आज पूजा के दौरान आप यहां से मां महागौरी चालीसा, मां महागौरी की आरती और मंत्र पढ़ सकते हैं.

Shardiya Navratri Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन होती है मां महागौरी की पूजा, यहां पढ़ें मां महागौरी चालीसा, मां की आरती और मंत्र
मां महागौरी चालीसा
(Photo Credit: NDTV)

आज यानी 18 अक्टूबर, रविवार को नवरात्रि का आठवां दिन है. नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी का स्वरूप बेहद उज्ज्वल और दिव्य है. मां का वाहन वृषभ है, इसलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से मां महागौरी की पूजा-अर्चना करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होने लगती हैं. ऐसे में अगर आप भी नवरात्रि के उपवास कर रहे हैं और माता की पूजा करते हैं, तो आज पूजा के दौरान आप यहां से मां महागौरी चालीसा, मां महागौरी की आरती और मंत्र पढ़ सकते हैं.  

मां महागौरी चालीसा | Maa Mahagauri Chalisa

           ॥ दोहा ॥

मन मंदिर मेरे आन बसो, आरम्भ करूं गुणगान,
गौरी माँ मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान।
पूजन विधी न जानती, पर श्रद्धा है आपर,
प्रणाम मेरा स्विकारिये, हे माँ प्राण आधार।

          ॥ चौपाई ॥

नमो नमो हे गौरी माता, आप हो मेरी भाग्य विधाता,
शरनागत न कभी घबराता, गौरी उमा शंकरी माता।

आपका प्रिय आदर पाता, जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,
महादेव गणपति संग आओ, मेरे सकल कलेश मिटाओ।

सार्थक हो जाए जग में जीना, सत्कर्मों से कभी हटु ना,
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो, सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।

हे माँ भाग्य रेखा जगा दो, मन भावन सुयोग मिला दो,
मन को भाए वो वर चाहुं, ससुराल पक्ष का स्नेहा मैं पायु।

परम आराध्या आप हो मेरी, फिर क्यूं वर में इतनी देरी,
हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो, थोड़े में बरकत भर दीजियो।

अपनी दया बनाए रखना, भक्ति भाव जगाये रखना,
गौरी माता अनसन रहना, कभी न खोयूं मन का चैना।

देव मुनि सब शीश नवाते, सुख सुविधा को वर में पाते,
श्रद्धा भाव जो ले कर आया, बिन मांगे भी सब कुछ पाया।

हर संकट से उसे उबारा, आगे बढ़ के दिया सहारा,
जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे, निराश मन में आस जगावे।

शिव भी आपका काहा ना टाले, दया दृष्टि हम पे डाले,
जो जन करता आपका ध्यान, जग में पाए मान सम्मान।

सच्चे मन जो सुमिरन करती, उसके सुहाग की रक्षा करती,
दया दृष्टि जब माँ डाले, भव सागर से पार उतारे।

जपे जो ओम नमः शिवाय, शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,
जिसपे आप दया दिखावे, दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।

सता गुन की हो दता आप, हर इक मन की ग्याता आप,
काटो हमरे सकल कलेशा, निरोग रहे परिवार हमेशा।

दुख संताप मिटा देना माँ, मेघ दया के बरसा देना माँ,
जबही आप मौज में आय, हठ जय माँ सब विपदाए।

जिसपे दयाल हो माता आप, उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,
फल-फूल मैं दुग्ध चढ़ाऊ, श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।

अवगुन मेरे ढ़क देना माँ, ममता आँचल कर देना माँ,
कठिन नहीं कुछ आपको माता, जग ठुकराया दया को पाता।

बिन पाऊ न गुन माँ तेरे, नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,
जितने आपके पावन धाम, सब धामो को माँ प्राणम।

आपकी दया का है ना पार, तभी को पूजे कुल संसार,
निर्मल मन जो शरण मे आता, मुक्ति की वो युक्ति पाता।

संतोष धन्न से दामन भर दो, असम्भव को माँ सम्भव कर दो,
आपकी दया के भारे, सुखी बसे मेरा परिवार।

अपकी महिमा अती निराली, भक्तो के दुःख हरने वाली,
मनोकामना पुरन करती, मन की दुविधा पल में हरती।

चालीसा जो भी पढ़े-सुनाया, सुयोग वर् वरदान पाए,
आशा पूर्ण कर देना माँ, सुमंगल साखी वर देना माँ।
           
         ॥ दोहा ॥

गौरी माँ विनती करूँ, आना आपके द्वार,
ऐसी माँ कृपा किजिये, हो जाए उद्धहार।
हीं हीं हीं शरण में, दो चरणों का ध्यान,
ऐसी मां कृपा कीजिये, पाऊँ मान सम्मान।

मां महागौरी की आरती | Maa Mahagauri Ki Aarti 

जय महागौरी जगत की माया ।
जय उमा भवानी जय महामाया ॥

हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहा निवास ॥

चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥

भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता ॥

हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥

सती 'सत' हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥

बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥

तभी मां ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥

'चमन' बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो ॥

मां महागौरी का मंत्र | Maa Mahagauri Mantra

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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