उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में मां भगवती मंदिर में भीषण आग लग गई, जिससे यहां भारी नुकसान होने की खबर आई है. नवरात्रि में आग लगने की वजह से हड़कंप भी मच गया, क्योंकि यहां भक्तों की भीड़ रहती है. बदियाकोट में मां भगवती का यह मंदिर लकड़ी से बना हुआ था और मंदिर लकड़ी पर की गई सुंदर नक्काशी के लिए जाना जाता था. मंदिर की पारंपरिक काष्ठकला इसे खास पहचान देती थी.
दरअसल, नवरात्रि चल रहे हैं और हिंदू धर्म में नवरात्रि का खास महत्व है. इन 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन दिनों सच्चे मन से मां की पूजा करने और व्रत रखने से देवी दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है. नवरात्रि के मौके पर भक्त माता रानी के दर्शन करने अलग-अलग मंदिर और शक्तिपीठ पहुंचते हैं. उत्तराखंड में भी ये एक ऐसा शक्तिपीठ स्थित है, जहां पर मां भगवती ने निशुम्भ दैत्य का वध किया था. चलिए आपको बताते हैं आदि बद्री मां भगवती मंदिर का इतिहास और महत्व.
आदि बद्री मां भगवती मंदिर का महत्व
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के बदियाकोट में प्रसिद्ध मां आदि बद्री भगवती मंदिर स्थित है. इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है. पौराणिक कथा के अनुसार, मां भगवती ने इसी मंदिर के पास निशुम्भ नामक दैत्य का वध किया था. मां भगवती के द्वारा निशुम्भ दैत्य का वध करने का वर्णन मार्कण्डेय पुराण में भी देखने को मिलता है. वहीं, शुम्भ दैत्य का वध मां भगवती ने सुमगढ़ में किया था. इसी वजह से बाद में इसे सुमगढ़ कहा जाने लगा.
आदि बद्री मां भगवती मंदिर की कहानी
उत्तराखंड का ये देवी मंदिर प्रसिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है. मान्यता है कि यहां मां भगवती ने दैत्य निशुम्भ का वध किया था. जिसकी वजह से इस जगह का नाम पहले वधकोट पड़ा था. बाद में यहां का नाम बदियाकोट हो गया है. मंदिर दानपुर घाटी में बना हुआ है, जिससे यह गढ़वाल और कुमाऊं दोनों रीजन में फेमस हैं, यहां दूसरे राज्यों से भी भक्त आते हैं. यहां सल्पाती मेले का आयोजन भी होता है.
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