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Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर बादलों के कारण चांद नहीं दिखे तो कैसे खोलें व्रत? स्वामी दिनेश भारती गुरुजी ने बताया अर्घ्य देने का तरीका

आज करवा चौथ का व्रत रखा जा रहा है. हालांकि, आज सुबह से ही मौसम खराब है, आसमान में बादल छाए हुए हैं, ऐसे में कई महिलाओं के मन में सवाल है कि अगर बादलों के कारण चांद के दर्शन न हों तो व्रत कैसे खोलें और पूजा किस तरह करें? आइए जानते हैं-

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर बादलों के कारण चांद नहीं दिखे तो कैसे खोलें व्रत? स्वामी दिनेश भारती गुरुजी ने बताया अर्घ्य देने का तरीका
चांद नहीं दिखे तो क्या करें?
(Photo Credit: NDTV)

आज 29 अक्टूबर, गुरुवार को करवा चौथ का व्रत रखा जा रहा है. ये व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला उपवास करती हैं. शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है. इसके बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर और पति का चेहरा देखकर अपना व्रत खोलती हैं. हालांकि, आज सुबह से ही मौसम खराब है, आसमान में बादल छाए हुए हैं, ऐसे में महिलाओं के मन में सवाल है कि अगर बादलों के कारण चांद के दर्शन न हों तो व्रत कैसे खोलें और पूजा किस तरह करें?

इस विषय पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु, कथावाचक और भगवती महाकाली शक्तिपीठ, जम्मू-कश्मीर के संस्थापक व पीठाधीश्वर स्वामी दिनेश भारती गुरुजी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. अपने इस वीडियो में उन्होंने बताया है कि अगर बादलों के कारण चांद दिखाई न दे, तो महिलाएं किस तरह चंद्रमा की पूजा करके अर्घ्य दे सकती हैं.

चांद नहीं दिखे तो क्या करें?

स्वामी दिनेश भारती गुरुजी के अनुसार, अगर मौसम खराब होने के कारण चंद्रमा के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं, तो महिलाएं घर पर ही श्रद्धा और विधि के साथ चंद्र देव की पूजा कर सकती हैं. इसके लिए एक थाली में सफेद चंदन से पूर्ण चंद्रमा बनाएं. चंद्रमा के चारों तरफ अक्षत और सफेद फूल लगाएं. इसके बाद  'ॐ चंद्राय नमः' और 'ॐ सोमाय नमः' मंत्र का जाप करते हुए तीन बार थाली में अर्घ्य दें. पूजा करते समय मन में चंद्र देव के प्रति श्रद्धा रखें और अपने पति की लंबी उम्र तथा परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.

स्वामी दिनेश भारती आगे बताते हैं, चंद्रमा की पूजा करने के बाद भगवान शिव को प्रणाम करने उनकी पूजा भी जरूर करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं. इसी कारण उन्हें चंद्रशेखर भी कहा जाता है. चंद्र देव की पूजा करने के बाद भगवान शिव को प्रणाम करें. इसके बाद हाथ जोड़कर तीन बार परिक्रमा करें और 'ॐ सोमाय नमः' तथा 'ॐ चंद्राय नमः' मंत्र का जाप करें.

अर्घ्य के जल का क्या करें?

पूजा के बाद अर्घ्य के जल को अपने मंगलसूत्र, मांग और पति के सिर पर लगाएं. इसके बाद पूजा में इस्तेमाल की गई सामग्री को तुलसी के पौधे में अर्पित कर दें. इस तरह चंद्रमा दिखाई न देने पर आप अपना व्रत खोल सकते हैं, 

यहां देखें वीडियो- 

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