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करवा चौथ की कथा

इस साल करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 48 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. पूजा के दौरान आप यहां से करवा चौथ की संपूर्ण कथा पढ़ सकते हैं-

करवा चौथ की कथा
यहां से पढ़ें करवा चौथ व्रत की कथा-
(Photo Credit: NDTV)

करवा चौथ के त्योहार में बस 2 दिन बाकी हैं. इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखती हैं. व्रत की शुरुआत सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाकर होती है, इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. शाम को भगवान गणेश, मां गौरी और करवा माता की पूजा की जाती है. इसके बाद करवा चौथ की व्रत कथा सुनी जाती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है.

करवा चौथ पूजा शुभ मुहूर्त

इस साल करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 48 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. इस समय आप भगवान गणेश, मां गौरी और करवा माता की पूजा कर सकते हैं. वहीं, पूजा में व्रत कथा जरूर पढ़ी जाती है. ऐसे में पूजा के दौरान आप यहां से संपूर्ण करवा चौथ की कथा पढ़ सकते हैं- 

यहां से पढ़ें करवा चौथ व्रत की कथा- 

पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी. बेटी का नाम करवा था. सातों भाई अपनी बहन पर जान छिड़ते थे और उसपर एक आंच नहीं आने देते थे. एक बार करवा अपने मायके आई हुई थी. शाम के समय उसके भाई घर लौटे तो उन्होंने देखा कि उनकी बहन भूख और प्यास से परेशान है. भाइयों ने उसे खाना खाने के लिए कहा, लेकिन करवा ने बताया कि उसने करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा है और वह चंद्रमा को देखकर, अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करेगी.

काफी समय बीत जाने के बाद भी चांद दिखाई नहीं दिया. अब, भाइयों से अपनी बहन की ऐसी हालत देखी नहीं जा रही थी. तब सबसे छोटे भाई ने एक तरकीब निकाली. वह दूर पीपल के पेड़ पर दीपक जलाकर उसे चलनी की आड़ में रख आया. दूर से देखने पर ऐसा लगा, जैसे आसमान में चांद निकल आया हो. इसके बाद उसने करवा से कहा कि चंद्रमा निकल आया है और अब वह भोजन कर सकती है. भाई की बात पर भरोसा करके करवा ने दीपक की रोशनी को चांद समझ लिया. अर्घ्य दिया और भोजन करने बैठ गई.

अब, करवा ने जैसे ही भोजन का पहला कौर मुंह में डाला, उसे छींक आ गई. दूसरे कौर में खाने में बाल निकल आया. तीसरा कौर खाने से पहले ही उसे अपने पति की मृत्यु की खबर मिल गई. यह सुनकर करवा के पैरों तले जमीन खिसक गई. खबर मिलने के बाद करवा की भाभी ने उसे बताया कि ये सब व्रत तोड़ने का नतीजा है. भाभी का कहना था कि बिना चांद देखे व्रत तोड़ने की वजह से ही उसके पति की मृत्यु हुई है. 

सच्चाई का पता चलने के बाद करवा ने निश्चय किया कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपनी तपस्या से उन्हें दोबारा जीवित करके रहेगी. वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रही और दिन रात उनकी देखभाल करती रही. समय बीतता गया और अगले साल करवा चौथ का दिन आ गया. इस बार करवा ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया और चांद को अर्घ्य देकर उपवास खोला. 

कथा के अनुसार, इतनी कठोर तपस्या देख भगवान गणेश ने करवा के पति के प्राण लौटा दिए. करवा का पति फिर से जीवित हो उठा और जय श्री गणेश, जय श्री गणेश कहने लगा.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिस प्रकार करवा को अपने सुहाग की रक्षा का आशीर्वाद मिला, करवा चौथ का व्रत करने और ये कथा सुनने से उसी प्रकार सभी सुहागिन महिलाओं को भी सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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