आज यानी 1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जा रहा है. संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना के लिए महिलाएं यह व्रत रखती हैं. इस दिन अहोई माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है और शाम को तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है. लेकिन क्या आप जानती हैं कि अहोई अष्टमी के व्रत में किन चीजों को खाने से बचना चाहिए और पारण करते समय किन नियमों का ध्यान रखना जरूरी है. अगर आप पहली बार यह व्रत रख रही हैं तो आचार्य मदन मोहन से जानें व्रत के खानपान से लेकर पूजा और पारण तक के जरूरी नियम.
अहोई अष्टमी के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला या फलाहार के रूप में रखा जाता है. निर्जला व्रत में महिलाएं अन्न और पानी दोनों का त्यााग करती हैं. वहीं, फलाहारी व्रत रखने वाली महिलाएं फल और व्रत में खाईई जाने वाली चीजों का सेवन कर सकती हैं. व्रत के दौरान अनाज, दाल और नमक खाने से बचना चाहिए. इसके अलावा लहसून-प्याज और तामसिक भोजन का सेवन भी नहीं करना चाहिए. हालांकि, खानपाान के नियम परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.
अहोई अष्टमी का व्रत कैसे खोलें
अहोई अष्टमी के व्रत में शाम को पूजा और तारों को अर्घ्य देने के बाद पारण किया जाता है. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, व्रत खोलनेे के लिए दूध, खीर और पुए का सेवन किया जा सकता है. इसके अलावा सेंधा नमक से बना साात्विक भोजन, फलाहार और सात्विक पूड़ी भी खा सकती हैं. व्रत खोलते समय जल्दबाजी में भारी भोजन करने से बचें. पाारण के लिए क्या खाना है, यह अपने परिवार की परंपरा के अनुसार तय कर सकती हैं.
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अहोई माता की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
उन्होंने बताया कि अहोई अष्टमी की पूजा में अहोई माता की तस्वीर या प्रतिमाा स्थापित करें. इसके बाद विधि-विधान से पूजा करें और व्रत कथा जरूर सुनें या पढ़ें. कुछ जगहों पर कथाा सुनते समय हाथ में गेहूं रखने की परंपरा भी है. आचार्य के अनुसार, व्रत के दौरान मन शांत रखना चाहिए. किसी से झगड़ा करने, गुस्सा करने या अपशब्द बोोलने से बचना चाहिए. पूजा के समय घर का माहौल भी शांत और सकारात्मक बनाए रखने की कोशिश करें.
अहोई अष्टमी के व्रत के जान लें ये नियम
कई जगहों पर अहोई अष्टमी के दिन चाकू का इस्तेमाल करना और सब्जियां काटना वर्जित माना जाता है. शाम को ताारों को अर्घ्य देने के लिए पीतल या मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल किया जा सकता है. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, व्रत के नियमम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकते हैं. ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने घर की परंपराा के अनुसार पूजा और पारण करना चाहिए.
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