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This Article is From Mar 30, 2014

सोनिया गांधी ने दिल्ली की रैली में नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल पर साधा निशाना

नई दिल्ली:

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि जो धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में विश्वास नहीं रखते, वह देशभक्ति की भावना को नहीं समझ सकते और अगर उन्हें सत्ता मिल जाती है तो इससे देश तबाह हो जाएगा।

मोदी को निशाने पर लेते हुए सोनिया गांधी ने आज कहा कि वह देशभक्ति का नगाड़ा बजा रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं।

लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद दिल्ली में अपनी पहली सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार से भागने के लिए अरविंद केजरीवाल की भी आलोचना की।

सोनिया ने यूपीए सरकार द्वारा किए गए ‘ऐतिहासिक’ कार्यो’ का जिक्र किया और जनता से एक बार और यूपीए की सरकार बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देशभक्ति का नगाडा बजा रहे हैं। 'आप बताइए कि जो लोग धर्म निरपेक्ष मूल्यों में यकीन नहीं करते, देशभक्ति की भावना को क्या समझ सकेंगे। वे आपको गुमराह कर केवल अपने और अपने लोगों के लिए सत्ता हथियाना चाहते हैं।'

सोनिया ने मोदी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा मोदी की ही ओर था। कुछ दिन पहले ही मोदी ने रक्षा मंत्री एके एंटनी को पाकिस्तानी एजेंट बताया था।

सोनिया ने कहा कि देशभक्ति कांग्रेस की नसों में है और कांग्रेस नेताओं की ‘कुर्बानी’ से इसे सीखा जा सकता है। उन्होंने लोकसभा चुनावों को दो विचारधाराओं की लड़ाई बताया और जनता से कहा कि वह भाजपा की चरमपंथी और विभाजनकारी विचारधारा को परास्त करे।

वहीं केजरीवाल पर निशाना साधते हुए सोनिया ने कहा कि कुछ लोग सोचते थे कि सरकार चलाना बच्चों का खेल है। 'आपने देखा कि किस तरह वे दिल्ली (सरकार) से भाग गए।'

दलितों और गरीबों को लुभाने की कवायद में सोनिया ने सिर पर मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने और फेरीवालों को कानूनी दर्जा देने को लेकर बने कानूनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन अब फेरीवालों को तंग नहीं कर सकेंगे। मुस्लिमों के लिए संप्रग सरकार द्वारा किए गए कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने सच्चर समिति की अधिकांश सिफारिशों को लागू किया है। उन्होंने कहा कि अगर सत्ता में फिर आयी तो कांग्रेस जनता को स्वास्थ्य सुरक्षा और जरूरतमंदों को पेंशन की व्यवस्था करेगी।

सोनिया ने कहा कि उनके लिए गंगा जमुनी परंपरा सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण है और बुरे इरादे वाले लोग देश और समाज को तबाही और अंधेरे की ओर ले जाएंगे। उन्होंने जनता से कहा, 'मुझे आपकी बुद्धिमत्ता में विश्वास है। मुझे यकीन है कि आप कोई गलती नहीं करेंगे और कांग्रेस का समर्थन करेंगे।' उन्होंने कहा कि भाजपा की विचारधारा समाज को बांटती है और एक भाई को दूसरे से लड़ाती है जबकि कांग्रेस समाज को एकजुट रखने में यकीन करती है और हर किसी को एक नजर से देखती है।

 

इससे पहले सोनिया ने असम के लखीमपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए बीजेपी और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर प्रहार तेज करते हुए लोगों से इस विपक्षी पार्टी की ‘नफरत की राजनीति’ से सावधान रहने और उसके झूठे वादे एवं बड़ी-बड़ी बातों के झांसे में नहीं आने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, 'विपक्ष खासकर बीजेपी पूरे देश में घूम घूमकर बड़ी बड़ी बातें कर रही है और जब केंद्र में उसकी सरकार थी, तब उसने क्या किया?' उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके नेता ‘नफरत की राजनीति’ करने में लगे हैं।

उन्होंने लोगों से विपक्ष के झूठे वादों के झांसे में नहीं आने बल्कि अपने विवेक का इस्तेमाल कर कांग्रेस के समर्थन में निर्णय लेने तथा उसके उम्मीदवारों को वोट देने की अपील की। उन्होंने कि कांग्रेस ने देश की गंगा-जमुना संस्कृति मजबूत की है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'हम झूठे वादे नहीं करते। हम जो वादे करते हैं, उसे पूरा करते हैं। कांग्रेस ‘हर हाथ शक्ति, हर हाथ तरक्की’ में विश्वास करती है।'

सोनिया ने कहा, 'हमने 2009 के घोषणापत्र में जो भी वादे किए थे, सारे पूरे किए। हम 2014 के घोषणापत्र के मामले में भी यही करेंगे और उसके लिए हमें आपका समर्थन चाहिए।' यूपीए अध्यक्ष ने कहा, '(विपक्ष की) कथनी और करनी में काफी अंतर है। पूर्वोत्तर के लोग असली राष्ट्रवाद जानते हैं, आशा है कि आप उनके झांसे में नहीं आएंगे जो बस राष्ट्रवाद का ढोल पीटते हैं।'

बीजेपी पर निशाना साधते उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने हमेशा देश के लिए अपना खून बहाया और बलिदान दिया है। दूसरी तरफ, ऐसा दल है जिसने बस देश को बांटा है।' उन्होंने कहा कि आजादी से पहले असम और अन्य स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ता देश के लिए बलिदान देते रहे और आजादी के बाद कांग्रेस ही राष्ट्रनिर्माण में लगी रही।

सोनिया ने आरोप लगाया, 'तब बीजेपी और अन्य दल कहां थे? आजादी से पहले और उसके बाद विपक्ष का कहीं कोई नामो निशान ही नहीं था। वे बस देश को बांटने में लगे हैं।'

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