Vikas Divyakirti On Education Minister: NEET पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके बाद अब प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाया गया है. इसी बीच मशहूर शिक्षक और UPSC मेंटर विकास दिव्यकीर्ति का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक छात्रा उनसे पूछती है, 'अगर आप शिक्षा मंत्री होते तो क्या-क्या करते?' इस सवाल के जवाब में विकास दिव्यकीर्ति ने पढ़ाई के सिस्टम में कई बड़े बदलावों की बात कही. उनका जवाब अब सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है.
शिक्षा मंत्री बनते ही सबसे पहले क्या करते?
विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि अगर वो शिक्षा मंत्री होते तो सबसे पहले देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ बैठक करते. उनका मानना है कि हर राज्य की अपनी जरूरत और अपनी भाषा होती है. इसलिए पढ़ाई से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले सभी राज्यों की राय लेना जरूरी है. इससे ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है जो पूरे देश के छात्रों के लिए बेहतर हो.
अपनी भाषा में पढ़ाई का मौका मिलता
उन्होंने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर और वकील जैसी पढ़ाई सिर्फ अंग्रेजी में ही नहीं होनी चाहिए. छात्रों को अपने राज्य की भाषा में भी पढ़ने का मौका मिलना चाहिए. जैसे तमिलनाडु में तमिल, कर्नाटक में कन्नड़ और हिंदी वाले राज्यों में हिंदी में पढ़ाई हो. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अंग्रेजी के जरूरी शब्द वैसे ही रहने चाहिए, ताकि आगे की पढ़ाई और नौकरी में छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो.
हिंदी और अंग्रेजी को लेकर क्या बोले?
विकास दिव्यकीर्ति का मानना है कि देश की बड़ी परीक्षाओं में हिंदी और अंग्रेजी दोनों को बराबर मौका मिलना चाहिए. वहीं राज्य की परीक्षाओं में वहां की भाषा को ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए. अगर किसी राज्य में एक से ज्यादा भाषाएं बोली जाती हैं, तो छात्रों को उन भाषाओं में भी परीक्षा देने की सुविधा मिलनी चाहिए. उनका कहना है कि इससे सरकारी नौकरी में आने वाले लोग आम लोगों से उनकी अपनी भाषा में आसानी से बात कर सकेंगे.
शिक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च करने की जरूरत
विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि अगर देश की पढ़ाई बेहतर बनानी है तो शिक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च करना होगा. अच्छे शिक्षक तैयार होंगे तो स्कूल और कॉलेज भी बेहतर बनेंगे. उन्होंने हर जिले में एक अच्छा विश्वविद्यालय बनाने की बात भी कही, ताकि छात्रों को अपने ही इलाके में अच्छी पढ़ाई का मौका मिल सके. साथ ही उन्होंने कहा कि नई तकनीक की मदद से अलग-अलग भाषाओं में पढ़ाई पहले से काफी आसान हो गई है. ऐसे में आने वाले समय में भाषा छात्रों के लिए बड़ी रुकावट नहीं बनेगी.
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