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'काम बराबर, फिर सौतेला व्यवहार क्यों?' इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद छलका दिव्यांग शिक्षामित्र का दर्द

UP Shikshamitra Special TET 2026: उत्तर प्रदेश के तमाम स्कूलों में काम कर रहे शिक्षा मित्रों ने हाईकोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. शिक्षकों जैसा काम करने के बावजूद वो स्पेशल टीईटी नहीं दे सकते हैं.

यूपी के शिक्षा मित्रों ने हाईकोर्ट के फैसले पर क्या कहा?

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सेवाएं दे रहे शिक्षामित्रों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को बड़ा झटका देते हुए स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET) में शामिल होने की राहत देने से इनकार कर दिया है. ये परीक्षा तीन नवंबर को आयोजित होनी है. कोर्ट ने शिक्षामित्रों की तरफ से दायर की गई उस याचिका को खारिज कर दिया, जिनमें विशेष रियायत या छूट के साथ स्पेशल टीईटी 2026 में शामिल होने और उसमें वेटेज की मांग की गई थी. इस फैसले के बाद एनडीटीवी ने यूपी में काम कर रहे शिक्षा मित्रों से बातचीत की और उनसे जाना कि आगे अब वो क्या करेंगे. इस दौरान एक दिव्यांग शिक्षा मित्र का दर्द छलका और उन्होंने कहा कि वो लड़ाई को आगे जारी रखेंगे. 

कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने साफ किया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के लिए निर्धारित योग्यता मानदंड, दिशानिर्देश और पात्रता शर्तें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) और राज्य सरकार के तय नियमों के अनुसार ही संचालित होती है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक एवं पेशेवर अर्हताओं को पूरा किए या नियमों के विपरीत जाकर किसी भी वर्ग विशेष के लिए स्पेशल टीईटी परीक्षा में अलग से प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती. 

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि नियमित सेवारत शिक्षक और संविदा या प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नियुक्त शिक्षामित्र कानूनी और सेवा स्थिति के आधार पर दो बिल्कुल अलग वर्ग है. इसलिए नियमित सेवारत शिक्षकों के लिए लाई गई विशेष व्यवस्था में शिक्षामित्रों को शामिल न करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समता के अधिकार का उल्लंघन या किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं माना जा सकता. 

क्या है शिक्षा मित्रों का तर्क?

शिक्षामित्रों का कहना है कि वो स्कूलों में नियमित सहायक अध्यापकों के बराबर ही शैक्षणिक और प्रशासनिक काम निपटाते हैं. वो प्रतिदिन लेसन तैयार करते हैं, कक्षाओं में पढ़ाते हैं, बच्चों का नामांकन बढ़ाने के लिए घर-घर अभियान चलाते हैं, मिड-डे मील का वितरण सुनिश्चित करते हैं और जनगणना व चुनाव जैसी महत्वपूर्ण सरकारी ड्यूटी भी करते हैं. 

शिक्षामित्रों का तर्क है कि जब सरकार शैक्षणिक जिम्मेदारियों और ट्रेनिंग में दोनों को एक समान मानती है तो स्पेशल टीईटी परीक्षा में बैठ कर अपनी योग्यता साबित करने का अवसर देते हुए शिक्षामित्रों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? 

बातचीत में छलका दिव्यांग शिक्षा मित्र का दर्द

उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष त्रिमोहन सिंह ने NDTV से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले से निराशा हुई है और जल्द ही इस पर विचार विमर्श करके हाई कोर्ट की डबल बेंच में यह मामला ले जाएंगे, उन्होंने ये भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो फिर आंदोलन किया जाएगा. उनके अलावा दिव्यांग शिक्षा मित्र मुकेश कुमार ने बातचीत में कहा कि, " ये रवैया ठीक नहीं है, इस जजमेंट से मैं निराश हूं और आगे की लड़ाई लडूंगा. उन्होंने ये भी कहा कि जजमेंट आने के बाद मेरी तमाम शिक्षामित्र साथियों से बातचीत हुई है वो भी निराशा में हैं, उनका कहना है कि ये हमारे साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है और बाकी शिक्षकों से हमें अलग किया जा रहा है."

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