Fearless Officers Of India : महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर तुकाराम मुंढे इन दिनों अपनी सख्त कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने अपनी ईमानदार छवि, बेबाक फैसलों और अलग कार्यशैली से पहचान बनाई. लेकिन तुकाराम मुंढे के पहले भी ऐसे कुछ अधिकारियों के नाम चर्चा में रहे हैं,, जो अपने बेबाक फैसलों, ईमानदारी और अलग अंदाज़ से व्यवस्था में बदलाव लाने और लोगों का ध्यान खींचने के लिए जाने जाते हैं. इस सूची में कई मशहूर नाम शामिल हैं. किसी ने आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा संभाला, किसी ने चुनाव व्यवस्था में सुधार किए तो किसी ने लगातार तबादलों के बावजूद अपने फैसलों पर डटे रहने की पहचान बनाई. आइए जानते हैं इन सख्त, दबंग और ईमानदार छवि के अधिकारियों को.
तुकाराम मुंढे
तुकाराम मुंढे 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आयुक्त हैं. इन दिनों वह अपनी सख्त, ईमानदार और बेबाक कार्यशैली के लिए चर्चा में हैं. अपने प्रशासनिक करियर में वह कई बार अपने फैसलों और काम करने के तरीके को लेकर सुर्खियों में रहे हैं.
अजीत डोभाल
अजीत डोभाल भारत के मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक भी रह चुके हैं. वह पंजाब, कश्मीर और पूर्वोत्तर में अंडरकवर और आतंकवाद-रोधी अभियानों से जुड़े रहे हैं. खुफिया अभियानों से जुड़े उनके लंबे अनुभव के कारण उन्हें अक्सर 'स्पाईमास्टर' भी कहा जाता है.
किरण बेदी
किरण बेदी भारत की पहली महिला IPS अधिकारी हैं. वह तिहाड़ जेल में किए गए सुधारों के लिए खास तौर पर चर्चित रहीं. नशे और शराब के खिलाफ अभियानों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही. बाद में उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में भी काम किया और संयुक्त राष्ट्र की पहली महिला सिविलियन पुलिस सलाहकार रहीं. किसी भी करप्शन या फिर अपराध के मामले में उनकी सख्ती आज भी याद रखी जाती है.
संजुक्ता पराशर
संजुक्ता पराशर असम में उग्रवाद के खिलाफ अभियानों के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने दुर्गम इलाकों में काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन का नेतृत्व किया. साहस और सख्त कार्रवाई के कारण उन्हें 'आयरन लेडी ऑफ असम' के नाम से भी पहचाना गया.
नरेन्द्र कुमार
नरेन्द्र कुमार अवैध खनन और सैंड माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाने गए. 2012 में ड्यूटी के दौरान अवैध खनन रोकने की कोशिश करते हुए वह शहीद हो गए. उनकी कहानी प्रशासनिक दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल के रूप में याद की जाती है.
हेमंत करकरे
हेमंत करकरे मुंबई एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड यानी ATS के प्रमुख रहे. 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान वह मोर्चे पर डटे रहे और आतंकियों से मुकाबला करते हुए शहीद हो गए. उनका नाम देश के बहादुर पुलिस अधिकारियों में सम्मान से लिया जाता है.
टी. एन. शेषन
टी. एन. शेषन 1990 से 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे. उन्होंने चुनाव व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण सुधारों को सख्ती से लागू कराया. चुनाव आचार संहिता के प्रभावी पालन के लिए वह विशेष रूप से चर्चित रहे और भारतीय चुनाव प्रणाली को मजबूत बनाने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है.
प्रदीप कासनी
IAS अफसर प्रदीप कासनी करीब तीन दशकों में 70 बार तबादला होने के लिए चर्चित रहे. उन्हें कठिन प्रशासनिक फैसलों के लिए जाना जाता है. बार-बार तबादलों के बावजूद वह अपने फैसलों पर डटे रहे, जिसके कारण सिस्टम में उनकी छवि एक सख्त और बेबाक अधिकारी की बनी.
आर्मस्ट्रॉन्ग पामे
मणिपुर के आर्मस्ट्रॉन्ग पामे 'मिरेकल मैन' के नाम से मशहूर हैं. उन्होंने ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली करीब 100 किमी सड़क बनवाई. इस काम के लिए क्राउडफंडिंग और सामुदायिक सहयोग जुटाया गया. खास बात यह रही कि इस परियोजना में सरकारी फंड का इस्तेमाल नहीं किया गया.
इन अधिकारियों की राह और जिम्मेदारियां भले ही अलग-अलग रहीं, लेकिन एक बात उन्हें जोड़ती है. किसी ने आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ मोर्चा संभाला, किसी ने माफिया के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जान दे दी, किसी ने चुनाव व्यवस्था को सख्ती से लागू किया तो किसी ने बार-बार तबादलों और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने फैसलों से समझौता नहीं किया. यही वजह है कि ये नाम आज भी अपनी अलग कार्यशैली और साहस के लिए याद किए जाते हैं.
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