पुणे से छात्रों के लिए एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है, यहां जिस यूनिवर्सिटी को 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' कहा जाता है, उसी सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री बांटने का खेल चल रहा था. आरोप है कि यूनिवर्सिटी के ही कुछ अधिकारी और कर्मचारी चंद रुपयों की खातिर फर्जी डिग्रियां बांट रहे हैं. इन जालसाजों के झांसे में गरीब और किसी तरह अपना घर चलाने वाले लोग भी आ गए थे. अब इस मामले को लेकर जांच शुरू हो चुकी है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है.
रिक्शा चालक को थमाई फर्जी डिग्री
पाई-पाई जोड़कर अपना घर चलाने वाले महेश कदम, जो पेशे से एक रिक्शा चालक हैं, अपने बेटे की उच्च शिक्षा के सपने लेकर पुणे यूनिवर्सिटी पहुंचे थे. लेकिन वहां उनकी मुलाकात शिक्षा के सौदागरों से हो गई. वित्त और लेखा विभाग Finance & Accounts Department के अधिकारी रमेश मुखेकर ने अपने तीन-चार लोगों के साथ मिलकर महेश कदम को एक बड़ा ऑफर दिया. ऑफर था- महज 3 लाख रुपये में बी.कॉम की पक्की डिग्री!
ऐसे खुली पूरी पोल
इतना ही नहीं, जब महेश ने सवाल किए, तो रमेश मुखेकर ने घबराहट में अलग-अलग सालों की चार अलग-अलग डिग्रियां थमा दीं, जिससे इस पूरे फर्जीवाड़े की पोल खुल गई. फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद महेश कदम ने तुरंत इस पूरे खेल की शिकायत कुलपति VC डॉ. सुरेश गोसावी से की, लिखित शिकायत भी दी गई. लेकिन शिकायत के बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन पूरे एक महीने तक शांत रहा.
लगातार दबाव के बाद अब जाकर आरोपी अधिकारी रमेश मुखेकर और उसके साथियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. प्रफुल्ल पवार ने आश्वासन दिया है कि अगर ये अधिकारी जांच में दोषी पाए गए, तो उनके खिलाफ सीधा आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा.
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