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PCS मेन्स रिजल्ट को लेकर विवाद बढ़ा, PPSC चेयरमैन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों के सफल होने के आरोपों को चेयरमैन ने पूरी तरह निराधार बताया. उन्होंने स्पष्ट किया कि एक भी ऐसा अभ्यर्थी नहीं है, जो परीक्षा में अनुपस्थित रहा हो और उसे इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया हो. उन्होंने बताया कि सभी परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक के साथ मैनुअल उपस्थिति भी दर्ज की गई थी.

PCS मेन्स रिजल्ट को लेकर विवाद बढ़ा, PPSC चेयरमैन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
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पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) की ओर से पीसीएस मेन्स परीक्षा-2025 के परिणाम को लेकर उठ रहे सवालों और कथित अनियमितताओं के आरोपों पर कमीशन ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. पीपीएससी के चेयरमैन रिटायर्ड मेजर जनरल विनायक सैनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि परीक्षा परिणामों को लेकर लगाए जा रहे आरोप आंकड़ों की गलत व्याख्या पर आधारित हैं. उन्होंने सेंटर और क्लासरूम के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों के आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि परिणाम में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई है. चेयरमैन ने बताया कि पटियाला में कुल 12 परीक्षा केंद्रों पर पीसीएस मेन्स की परीक्षा आयोजित की गई थी. इन केंद्रों पर कुल 3,959 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 751 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है. अनुपस्थित अभ्यर्थियों को ध्यान में रखने के बाद कुल सफलता दर लगभग 19 प्रतिशत बनती है.

एक सेंटर से 24 प्रतिशत चयन का दावा गलत

पीपीएससी चेयरमैन ने कहा कि यह आरोप गलत है कि कुल चयनित अभ्यर्थियों में से 24 प्रतिशत उम्मीदवार एक ही परीक्षा केंद्र से सफल हुए हैं. उनके अनुसार किसी भी एक सेंटर से अधिकतम 106 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जो कुल 751 चयनित उम्मीदवारों का 14.1 प्रतिशत है. संबंधित परीक्षा केंद्र पर 496 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी और यह 12 केंद्रों में दूसरा सबसे बड़ा सेंटर था. ऐसे में वहां से अधिक संख्या में उम्मीदवारों का चयन होना स्वाभाविक है.

179 क्लासरूम में से केवल तीन में 10 या अधिक अभ्यर्थी सफल

क्लासरूम में एक साथ अधिक संख्या में अभ्यर्थियों के चयन पर उठे सवालों के जवाब में चेयरमैन ने बताया कि कुल 179 क्लासरूम में परीक्षा आयोजित की गई थी. इनमें से केवल तीन क्लासरूम ऐसे थे, जहां से 10 या उससे अधिक अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए सफल हुए. इन तीन क्लासरूम में क्रमशः 11, 10 और 10 उम्मीदवार सफल हुए हैं. उन्होंने कहा कि 751 सफल अभ्यर्थियों को 179 क्लासरूम के हिसाब से देखा जाए तो औसतन प्रत्येक क्लासरूम से लगभग 4.2 उम्मीदवारों का चयन बनता है. ऐसे में किसी क्लासरूम से दो और किसी से आठ या 10 उम्मीदवारों का सफल होना सामान्य सांख्यिकीय अंतर के दायरे में आता है.

चेयरमैन ने वर्ष 2018 और 2020 की पीसीएस मेन्स परीक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि उन परीक्षाओं में भी एक ही क्लासरूम से आठ से नौ उम्मीदवारों तक का चयन हुआ था, जबकि उस समय चयनित अभ्यर्थियों की कुल संख्या मौजूदा परीक्षा से काफी कम थी.

लगातार रोल नंबर वाले उम्मीदवारों के चयन का पुराना ट्रेंड

लगातार रोल नंबर वाले अभ्यर्थियों के इंटरव्यू के लिए चयनित होने के मुद्दे पर भी पीपीएससी ने आंकड़े पेश किए. चेयरमैन के अनुसार वर्ष 2018 में 153 शॉर्टलिस्ट अभ्यर्थियों के बीच लगातार रोल नंबर वाले 26 समूह सामने आए थे, जबकि वर्ष 2020 में 177 चयनित अभ्यर्थियों के बीच ऐसे 28 समूह थे. वहीं, वर्ष 2025 में 751 अभ्यर्थियों के चयन के बीच लगातार रोल नंबर वाले 118 समूह बने हैं. चेयरमैन ने कहा कि पिछले वर्षों के आंकड़ों की तुलना में यह संख्या असामान्य नहीं है और इसे अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता.

राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों पर चेयरमैन ने क्या कहा?

परीक्षा केंद्रों के चयन को लेकर राजनीतिक आरोपों पर चेयरमैन ने कहा कि केंद्रों का निर्धारण प्रशासनिक, लॉजिस्टिक और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया था. पटियाला और आसपास के क्षेत्रों में केंद्र बनाए गए, ताकि परीक्षा एक समान और सुरक्षित व्यवस्था के तहत संपन्न कराई जा सके. उन्होंने कहा कि पीपीएससी की ओर से अब तक आयोजित सिविल सर्विसेज मेन्स परीक्षाओं में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जाती रही है.

किसी विशेष विधानसभा क्षेत्र में केंद्र होने और वहां के विधायक के सत्ताधारी पार्टी से संबंधित होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पंजाब में वर्तमान में आम आदमी पार्टी की सरकार है, इसलिए कई विधानसभा क्षेत्रों के विधायक सत्ताधारी पार्टी से हो सकते हैं. भविष्य में दूसरी पार्टी की सरकार बनने पर भी संबंधित क्षेत्रों में केंद्र होने का यही सवाल उठ सकता है.

उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक मामलों से दूर रहते हैं और इस विषय पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहते. उन्होंने यह भी दावा किया कि पीपीएससी में अपने करीब डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान उन्हें किसी भी राजनीतिक पार्टी या राजनीतिक व्यक्ति की ओर से कभी फोन या दबाव नहीं आया और न ही कमीशन के कामकाज में किसी तरह का हस्तक्षेप हुआ.

तीन गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए क्यों नहीं बुलाया गया?

331 पदों के मुकाबले 993 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किए जाने के सवाल पर चेयरमैन ने कहा कि तीन गुना उम्मीदवारों का चयन करने का नियम सभी 21 श्रेणियों (कैटेगरी) के लिए अलग-अलग लागू होता है. प्रत्येक श्रेणी में पदों की संख्या, पुरुष-महिला आरक्षण और अन्य निर्धारित नियमों के अनुसार चयन किया जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन गुना उम्मीदवारों को तभी शॉर्टलिस्ट किया जा सकता है, जब वे प्रत्येक पेपर में निर्धारित न्यूनतम अंक और कुल निर्धारित योग्यता अंक हासिल करते हों. यदि किसी श्रेणी में पर्याप्त उम्मीदवार न्यूनतम योग्यता पूरी नहीं करते तो कमीशन नियमों के अनुसार उपलब्ध योग्य उम्मीदवारों को ही शॉर्टलिस्ट कर सकता है.

परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का दावा

पीपीएससी की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल रूम, बायोमेट्रिक उपस्थिति और प्रत्येक क्लासरूम में जैमर लगाए गए थे. कमीशन ने दावा किया कि पूरी परीक्षा के दौरान सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया.

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