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NEET UG 2026 Paper: क्या नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के मानकों पर खरा नहीं उतरा नीट का पेपर? जानें एक्सपर्ट की राय

NEET-UG 2026 : एक्सपर्ट्स ने फिजिक्स के पेपर को बताया असंतुलित. जानें क्यों यह पेपर नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के मापदंडों पर खरा नहीं उतरा.

NEET UG 2026 Paper: क्या नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के मानकों पर खरा नहीं उतरा नीट का पेपर? जानें एक्सपर्ट की राय
देव शर्मा ने बताया कि केमिस्ट्री विषय में फिजिकल, इनॉर्गेनिक तथा ऑर्गेनिक तीनों ही भागों से स्टेटमेंट बेस्ड तथा कालम मैचिंग प्रश्न पूछे गए.

NEET UG 2026 Paper Analysis:  देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 संपन्न हो चुकी है, लेकिन इसके प्रश्नपत्र को लेकर अब बहस छिड़ गई है. कोटा के जाने-माने एजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार का पेपर न केवल असंतुलित था, बल्कि यह 'नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020' के उन मूल सिद्धांतों के भी अनुरूप नहीं था, जो रटने के बजाय छात्रों की विश्लेषणात्मक क्षमता (Analytical Skills) को परखने पर जोर देते हैं.

एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने के अनुसार, प्रश्नपत्र में विद्यार्थियों की विश्लेषण-क्षमता तथा तर्कशक्ति को परखने वाले प्रश्नों की संख्या मापदंडों के अनुरूप नहीं थी. देव शर्मा ने बताया कि फिजिक्स तथा केमिस्ट्री में पूछे गए अधिकतर प्रश्न फॉर्मूला तथा फैक्ट आधारित थे, बायोलॉजी का प्रश्न पत्र एनसीईआरटी आधारित रहा लेकिन बहुत लेंदी था.

पेपर एनालिसिस

फिजिक्स का पेपर बैलेंस्ड नहीं था

देव शर्मा ने बताया कि फिजिक्स का प्रश्न पत्र असंतुलित रहा. जहां एक और सिंपल पेंडुलम जैसे छोटे से टॉपिक से 3-प्रश्न पूछ लिए गए वहीं थर्मोडायनेमिक्स जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक से एक भी प्रश्न का नहीं पूछा जाना आश्चर्यजनक रहा, सिर्फ और सिर्फ एक प्रश्न काइनेटिक थ्योरी ऑफ गैसेस से पूछा गया. 

देव शर्मा ने आगे बताया कि सेमीकंडक्टर फिजिक्स में डायोड, डायोड-सर्किट्स तथा डायोड के हाफ-वेव-रेक्टिफायर की तरह उपयोग जैसे टॉपिक्स से कुल 3-प्रश्न पूछे गए. कैपेसिटर्स, करंट-इलेक्ट्रिसिटी तथा रेडियोएक्टिविटी और न्यूक्लियर फिजिक्स से भी अच्छी खासे प्रश्न पूछे गए‌.

यूनिट्स एंड डाइमेंशंस तथा प्रोजेक्टाइल-मोशन जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स से प्रश्न नहीं पूछा जाना चौकाने वाला था. वहीं, फ्री-फॉल से संबंधित एक प्रश्न में अस्पष्टता है.

केमिस्ट्री: शब्दों के जाल में उलझे छात्र

देव शर्मा ने बताया कि केमिस्ट्री विषय में फिजिकल, इनॉर्गेनिक तथा ऑर्गेनिक तीनों ही भागों से स्टेटमेंट बेस्ड तथा कालम मैचिंग प्रश्न पूछे गए. फिजिकल केमिस्ट्री में केमिकल-काइनेटिक्स, केमिकल-थर्मोडायनेमिक्स, इलेक्ट्रोकेमेस्ट्री तथा इक्लिइब्रियम से संबंधित परंपरागत प्रश्न पूछे गए. ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में रिएक्टेंट, रीजेंट तथा प्रोडक्ट आईडेंटिफिकेशंस से संबंधित आसान प्रश्न पूछे गए.

इनॉर्गेनिक केमेस्ट्री में कोऑर्डिनेशन-कंपाउंड से संबंधित प्रश्न परंपरागत थे लेकिन प्रैक्टिकल केमेस्ट्री से संबंधित प्रश्नों ने स्टूडेंट्स को जरूर परेशान किया. देव शर्मा ने बताया कि कई प्रश्नों में शब्द-संख्या बहुत अधिक थी इस कारण विद्यार्थियों को उन्हें पढ़ने में काफी समय लगा. 

बायोलॉजी का पेपर रहा बैलेंस्ड

बायोलॉजी का प्रश्नपत्र पूरी तरह से एनसीईआरटी आधारित रहा लेकिन यहां भी 'ऑप्शन इन ऑप्शन' टाईप तथा कालम-मैचिंग टाइप प्रश्नों को हल करने में विद्यार्थियों को काफी समय लगा.
 

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