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टूट गया था पढ़ाई का रूटीन, अब सता रहा ये डर...कोटा में NEET की तैयारी कर रही लड़कियों ने बताया अपना दर्द

NEET Re-Exam Coaching: नीट पेपर लीक के बाद अब 21 जून को दूसरी परीक्षा होगी, कोटा में एक बार फिर छात्रों ने इसे लेकर कमर कस ली है और तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि उनका कहना है कि पढ़ाई के रूटीन में खुद को वापस लाना थोड़ा मुश्किल हो रहा है.

टूट गया था पढ़ाई का रूटीन, अब सता रहा ये डर...कोटा में NEET की तैयारी कर रही लड़कियों ने बताया अपना दर्द
NEET Re-Exam: नीट पेपर लीक के बाद तनाव में छात्र

NEET Re-Exam: कोटा के लैंडमार्क सिटी इलाके में देश के अलग-अलग हिस्सों से आईं आठ लड़कियां एक साथ बैठकर लंच कर रही हैं. नीट परीक्षा खत्म होने के बाद ये सभी अपना सामान पैक कर घर लौट गई थीं, लेकिन महज एक हफ्ते के भीतर फिर से देश के सबसे बड़े कोचिंग हब कोटा लौटना पड़ा है. हंसी-मजाक और बातचीत के बीच यह उनके लिए राहत का एक छोटा सा पल है. दोस्तों के साथ लंच का एक ब्रेक, इससे पहले कि वे फिर से कोचिंग और पढ़ाई की उसी कठिन दिनचर्या में लौट जाएं. इन सभी के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर खुद को रीस्टार्ट कैसे किया जाए. 

पढ़ाई के रूटीन में वापस आना चुनौती

19 वर्षीय सृजन दीक्षित जबलपुर की रहने वाली हैं और अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं. उनके पिता कलेक्टरेट में सरकारी नौकरी करते हैं, जबकि मां एक निजी स्कूल में टीचर हैं. सृजन कहती हैं, “मैं पूरी तरह रिलैक्स मोड में चली गई थी. मेरा एग्जाम बहुत अच्छा गया था और मुझे पूरा भरोसा था कि मेडिकल सीट मिल जाएगी, लेकिन अब फिर से वही दबाव शुरू हो गया है. मैं घर चली गई थी, लेकिन मेरा सामान, किताबें और बाकी चीजें यहीं थीं, इसलिए वापस आना पड़ा. मैं सुबह साढ़े छह बजे उठती हूं और आधे घंटे की सुबह की दिनचर्या के बाद पढ़ाई शुरू कर देती हूं. पहले मैं कम से कम 12 घंटे तक अच्छी और प्रोडक्टिव पढ़ाई कर लेती थी, लेकिन अब आठ घंटे से ज्यादा नहीं हो पा रहा. रिदम ही नहीं बैठ पा रहा है. हम पूरी तरह रिलैक्स हो गए थे और हमारी पढ़ाई का रूटीन टूट गया था.”

कोटा में सृजन का यह दूसरा साल है. उन्होंने 2025 में नीट परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर कठिन लगने के बाद एक साल ड्रॉप लेने का फैसला किया. इस बार उन्हें सफलता का पूरा भरोसा था, लेकिन नीट 2026 पेपर लीक ने उन्हें गहरी निराशा में डाल दिया है. अब उन्हें चिंता है कि री-टेस्ट का पेपर कैसा होगा और क्या वह दोबारा अपना बेस्ट प्रदर्शन कर पाएंगी. सृजन कहती हैं, “हर परीक्षा अलग होती है और हर छात्र अलग समय पर अपने पीक पर होता है.”

देश की सबसे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में शामिल इस मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हर साल करीब 23 लाख छात्र बैठते हैं, जबकि देशभर के मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटें लगभग एक लाख ही हैं. ऐसे में कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा हाई होता है. राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में हर साल कम से कम एक लाख छात्र नीट परीक्षा देते हैं. 

ऑनलाइन टेस्ट का ले रहे सहारा

शहर के लैंडमार्क इलाके के एक प्रीमियम गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली बीकानेर की चित्राक्षी कहती हैं, “मैं 15 तारीख को वापस आई. थोड़ा रिदम टूट गया था, लेकिन अब फिर से 12-12 घंटे पढ़ाई शुरू हो गई है. हम ऑनलाइन टेस्ट और स्पेशल टेस्ट सीरीज कर रहे हैं ताकि दोबारा तैयारी हो सके. मैं 4 तारीख को नीट के बाद घर गई थी. मुझे अपने सिलेक्शन का पूरा भरोसा था, लेकिन अब क्या करें, फिर से पढ़ाई करनी पड़ेगी.” 

लीक के बाद सता रहा है डर

चित्तौड़गढ़ की सुमन कहती हैं, “अब पढ़ाई का उतना दबाव महसूस नहीं हो रहा, और असली समस्या भी यही है. हम रिलैक्स मोड में आ गए थे और एक तरह से ब्रेक ले चुके थे, इसलिए दोबारा उसी रूटीन में लौटना मुश्किल लग रहा है. माता-पिता कहते हैं कि बस एक महीने की बात है, एक और कोशिश कर लो, लेकिन हमने तो पहले ही घूमने-फिरने और एंजॉय करने के प्लान बना लिए थे. ऐसे में दोबारा पढ़ाई में लौटना चुनौती बन गया है.”
इस साल कोटा आई एक फ्रेशर छात्रा भी इस पूरे घटनाक्रम को देख रही है. वह कहती हैं, “इससे हम जैसे नए छात्रों के बीच डर का माहौल बन गया है. उम्मीद है कि हमारे साथ ऐसा नहीं होगा. उम्मीद है कि फिर से पेपर लीक नहीं होगा या इन घटनाओं की वजह से परीक्षा बहुत ज्यादा कठिन नहीं बनाई जाएगी.”

ज्यादातर छात्र घर से कर रहे तैयारी

कोटा के प्रीमियम वंश गुड होम्स गर्ल्स हॉस्टल के मैनेजर हितेश गोस्वामी कहते हैं कि ज्यादातर छात्रों ने हालात को संभालने की कोशिश की है. हॉस्टल में कुल 187 छात्राओं की क्षमता है, जिनमें से 80 नीट अभ्यर्थी थीं. अधिकांश छात्राएं घर लौट चुकी हैं, लेकिन कुछ वापस आ गई हैं. बाकी छात्रों ने घर के पास रहने का फैसला किया है, क्योंकि अब उन्हें री-सेंटर का विकल्प मिल गया है और ज्यादातर ने अपने घरों के नजदीक परीक्षा केंद्र चुने हैं. कोचिंग ऑनलाइन भी चल रही है, इसलिए यहां लौटना जरूरी नहीं है. 

मध्य प्रदेश या राजस्थान के नजदीकी शहरों से कुछ छात्राएं वापस आई हैं, जबकि बाकी घर से पढ़ाई कर रही हैं. खाने के समय वे सामान्य और खुश दिखती हैं. तनाव तो है, लेकिन उन्होंने हालात को काफी हद तक संभाल लिया है.  वह आगे कहते हैं, कोटा का अपना एक माहौल है, पढ़ाई और तैयारी का माहौल. यही वजह है कि यहां लौटने पर छात्र जल्दी पढ़ाई की लय में वापस आ जाते हैं.

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