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NEET PG में पास होने के लिए जरूरी हैं इतने नंबर, पिछली बार खाली रह गई थीं हजारों सीटें

उम्मीदवार MD, MS और PG Diploma जैसे कोर्सों में दाखिले के लिए यह परीक्षा देते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि NEET PG में पास होने के लिए कितने नंबर जरूरी हैं और आखिर कई बार हजारों सीटें खाली क्यों रह जाती हैं.

NEET PG में पास होने के लिए जरूरी हैं इतने नंबर, पिछली बार खाली रह गई थीं हजारों सीटें
पिछले काउंसलिंग सत्र में बड़ी संख्या में पीजी मेडिकल सीटें खाली रहने की खबरें सामने आई थीं.

NEET PG Passing Number : नीट पीजी परीक्षा 2026 का शेड्यूल जारी कर दिया गया है. यह परीक्षा 30 अगस्त को देश के 340 शहरों के लगभग 1300 सेंटर्स पर आयोजित की जाएगी. इस परीक्षा में 2.73 लाख उम्मीदवार शामिल होंगे. बता दें कि यह परीक्षा मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए आयोजित की जाती है. इस बार नीट पीजी परीक्षा के लिए पिछली साल की तुलना में 12.5 फीसदी ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए हैं. यह परीक्षा सिंगल शिफ्ट में आयोजित की जाएगी. 

वहीं, इस बार नीट पीजी परीक्षा में प्रश्नों की संख्या घटा दी गई है. लेकिन समय अवधि में बदलाव नहीं किया गया है यानी एग्जाम 210 मिनट का ही होगा. ऐसे में आइए जानते हैं देशभर के मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए आयोजित होने वाली NEET PG परीक्षा में पास होने के लिए कितने फीसदी अंक हासिल करने होते हैं.

कैटेगरी वाइज नंबर

  • जनरल कैटेगरी/EWS के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत अंक हासिल करने होते हैं, 
  • वहीं, OBC, SC और ST (PWBD) अभ्यर्थियों को 40 पर्सेंटाइल लाना होता है 
  • जबकि PWD जनरल के लिए 45 पर्सेंट तय है

हालांकि, सीटें खाली रहने की स्थिति में समय-समय पर कटऑफ में बदलाव भी कर सकते हैं. पिछले काउंसलिंग सेशन में बड़ी संख्या में पीजी मेडिकल सीटें खाली रहने की खबरें सामने आई थीं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कई निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों की हाई फीस, कुछ नॉन-क्लिनिकल शाखाओं में कम रुचि और कठिन काउंसलिंग प्रोसेस सीटें खाली रहने के मेन कारण होते हैं. यही वजह है कि सीटों के बेहतर उपयोग के लिए कई बार क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में रिलैक्सेशन दिया जाता है.

ऐसे में उम्मीदवारों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि केवल न्यूनतम पर्सेंटाइल हासिल करना ही काफी नहीं है. अपनी पसंदीदा कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए काफी बेहतर रैंक और स्कोर की जरूरत पड़ती है.  इसलिए अभ्यर्थियों को कटऑफ पर नजर रखने के साथ-साथ काउंसलिंग प्रोसेस को भी गंभीरता से समझना चाहिए.

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