विज्ञापन

NDTV LearnNXT Conclave : 'हम ऐसे दौर में हैं जहां सब कुछ संभव है, लेकिन निश्चित कुछ भी नहीं'- दीपक बागला

NDTV LearnNXT कॉन्क्लेव में आज शिक्षा जगत से जुड़े कई लोग शामिल हो रहे हैं. इस दौरान शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर बात की जाएगी. कार्यक्रम में शामिल हुई रूबल नागी ने इस दौरान अपने कई अनुभव साझा किए. बच्चों की पढ़ाई पर जोर दिया.

NDTV LearnNXT Conclave : 'हम ऐसे दौर में हैं जहां सब कुछ संभव है, लेकिन निश्चित कुछ भी नहीं'- दीपक बागला
May 25, 2026 12:55 (IST) Share TwitterWhatsAppFacebookRedditEmail LearnNXT Conclave 2026 LIVE:नागी ने वंचित बच्चों को सशक्त बनाने के लिए कला का उपयोग किया.

LearnNXT Conclave 2026 LIVE: NDTV LearnNXT कॉन्क्लेव में आज भारत के शिक्षा जगत के जाने-माने लोग और नीति-निर्माता एक साथ मिलकर शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे. कॉन्क्लेव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, ग्लोबल क्लासरूम,  भविष्य के लिए जरूरी कौशल और 'विकसित भारत 2047' जैसे मुद्दों पर अपना विजन रखेंगे. इस कार्यक्रम की शुरुआत ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 पाने वाली रूबल नागी से हुई. रूबल नागी ने बच्चों की शिक्षा पर जोर दिया और अपने कई सारे अनुभव शेयर किए. जब रूबल नागी से पूछा गया कि उन्हें दीवारों के जरिए बच्चों को पढ़ाने का आइडिया कहां से आया? इस सवाल का जवाब देते हुए रूबल नागी ने कहा, मैं एक आर्टिस्ट हूं, आर्टिस्ट होने के नाते हम सोते नहीं हैं. मुझे बच्चे बहुत पसंद हैं. जब मैं उनके बीच होती हूं तो सबसे ज़्यादा खुश होती हूं.

झुग्गी-झोपड़ियों की दीवारों के जरिए बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा

नागी ने अनोखा तरीका आजमाते हुए झुग्गी-झोपड़ियों की दीवारों पर गणित, इतिहास के पाठ लिखे. मोहल्लों को इंटरैक्टिव किताबों में बदल दिया. विजुअल लिटरेसी की ताकत से दस लाख बच्चे वापस मुख्यधारा में आ गए और पढ़ाई से जुड़े. NDTV LearnNXT कॉन्क्लेव में अपने अनुभव साझा करते हुए नागी ने कहा, लोग उनसे यह सवाल पूछते थे कि वो अपने बच्चों को स्कूल क्यों भेजे, इसकी जरूरत क्या है?  कॉन्क्लेव के दौरान एक किस्से को याद करते हुए नागी ने बताया कि वो एक छह साल के बच्चे से मिली थी. जिसने कभी पेंसिल नहीं देखी थी. ये मेरे लिए एक 'वेक-अप कॉल' थी. 

ये जरूरी मानवीय कौशल जो CA को अपरिहार्य बनाते हैं

चरणजोत सिंह नंदा ने NDTV LearnNXT कॉन्क्लेव में इस बात पर जोर दिया कि कंप्यूटर चाहे जितनी कैलकुलेशन कर ले, लेकिन इंसानी समझदारी, ईमानदारी, सही समय पर सही सलाह देना और लोगों से रिश्ते निभाना सिर्फ एक इंसान ही कर सकता है. यही खूबियां CA को 'अपरिहार्य' बनाती हैं.

“एंटरप्रेन्योरशिप बन रही है मुख्य केंद्र”

विकसित भारत 2047: क्या भारतीय शिक्षा का भविष्य एंटरप्रेन्योरशिप है?' विषय पर बोलते हुए नीति आयोग (NITI Aayog) के अटल इनोवेशन मिशन के मिशन डायरेक्टर दीपक बागला ने कहा कि एंटरप्रेन्योरशिप अब देश के विकास का मुख्य केंद्र बन रही है.

स्टार्टअप्स में भारत दुनिया में सबसे आगे

कॉन्क्लेव में भारत की इस उपलब्धि को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा:
“आज भारत यूनिकॉर्न के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर है, स्टार्टअप्स के मामले में दूसरे नंबर पर है, और हर दिन नए स्टार्टअप्स जोड़ने के मामले में दुनिया में पहले नंबर पर है.”

1.1 करोड़ से ज्यादा युवा एंटरप्रेन्योर्स

दीपक बागला ने देश के युवाओं की क्षमता पर भरोसा जताते हुए आगे कहा, “हमारे पास आज 1.1 करोड़ से ज़्यादा ऐसे युवा एंटरप्रेन्योर हैं, जो अटल टिंकरिंग लैब्स (Atal Tinkering Labs) से ट्रेनिंग लेकर निकले हैं.” इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के दौर में एआई (AI) ने ज्ञान का पूरी तरह से लोकतंत्रीकरण (Democratization) कर दिया है.

हम ऐसे दौर में हैं जहां सब कुछ संभव है, लेकिन निश्चित कुछ भी नहीं

डायरेक्टर दीपक बागला ने आगे कहा कि मानव इतिहास में यह पहली बार है कि हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जो अभूतपूर्व है और जिसके लिए हमारे पास कोई तयशुदा रूपरेखा (playbook) नहीं है. हम जीवन के एक ऐसे दौर में कदम रख रहे हैं जहां सब कुछ संभव है, लेकिन कुछ भी निश्चित नहीं है.

NEP 2020 पर रखी राय

'प्रथम' की CEO, डॉ. रुक्मिणी बनर्जी का कहना है कि प्री-स्कूल में जाना बच्चों के लिए एक मुश्किल बदलाव होता है. बच्चा इसके लिए कितना तैयार है? बच्चे अलग-अलग तरह के अनुभवों से आते हैं. सीखना और शिक्षा तो बाद की बात है, शुरुआती पांच सालों में, बच्चों का समूह काफी अलग-अलग तरह का होता है. ये बच्चे 'फाउंडेशन स्टेज'  का हिस्सा होते हैं. इस चरण में, बच्चे सामाजिक और संज्ञानात्मक, दोनों तरह के अलग-अलग कौशलों में प्रगति कर सकते हैं. उन्होंने आगे कहा, "NEP 2020 के तहत आने वाली 'बालवाटिकाएं' और 'आंगनवाड़ियां' इसी के लिए तैयार हैं."

"आंगनवाड़ी को एजुकेशनल सेंटर बनाने पर जोर"

NDTV LearnNXT कॉन्क्लेव में  शामिल हुए रॉकेट लर्निंग के को-फाउंडर सिद्धांत सचदेवा ने कहा कि आंगनवाड़ी का रोल काफी ज्यादा अहम है. हम लोग आंगनवाड़ी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. हम सरकार के साथ करीबी से काम कर रहे हैं कि आंगवाड़ी सेंटर्स को सिर्फ न्यूट्रिशियन सेंटर बनाने की बजाय एजुकेशनल सेंटर बनाया जाए. सरकारी ने पोषण भी पढ़ाई भी कैंपेन लॉन्च किया है, अगर वाकई 14 लाख आंगनवाड़ी में ये हो जाए तो हम काफी कुछ बदल सकते हैं.

पोषण और शैक्षिक सहायता किसी की भी जिंदगी बदल सकती है

कॉन्क्लेव में 'द अक्षय पात्र फाउंडेशन' के CEO श्रीधर वेंकट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पोषण और शिक्षा तक पहुंच, स्कूलों में पढ़ाई छोड़ने की दर को कम करने और लोगों की ज़िंदगी बदलने में खास तौर पर लड़कियों के लिए अहम भूमिका निभा सकती है. पोषण और पढ़ाई छोड़ने की समस्या से निपटने के तरीकों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए, वेंकट ने अमेरिका की एक इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी कंपनी द्वारा आयोजित एक वर्कशॉप का एक किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि सेशन खत्म होने के बाद, कंपनी के CSR हेड ने उन्हें 'सुमा' नाम की एक युवती से मिलवाया. उसने मुझे बताया कि वह एक अनाथ थी और उसे लगभग 10 सालों तक अपने अनाथालय में 'अक्षय पात्र फाउंडेशन' से भोजन मिलता रहा. आज सुमा एक 'परचेज़ एनालिस्ट' के तौर पर काम करती है. उन्होंने सुमा के इस सफ़र को इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण बताया कि किस तरह पोषण और शैक्षिक सहायता किसी की भी ज़िंदगी बदल सकती है.

स्कूल गुणवत्ता पर ध्यान दें

आगा खान फाउंडेशन की CEO टिन्नी साहनी ने कहा कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सफल हो.  पिछले कुछ सालों में स्कूलों में दाखिले बढ़े हैं, इसलिए अब यह ज़रूरी है कि हम स्कूलों में गुणवत्ता, सीखने की प्रक्रिया और माता-पिता की भागीदारी पर ध्यान दें.

'किताब-मुक्त शिक्षा' पर दिया जोर

राजस्थान के झुंझुनू स्थित लंबी अहीर ग्राम पंचायत की सरपंच, नीरू यादव ने कहा कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो आपकी परिस्थितियों को बदल सकता है. उनका लक्ष्य अपने गांव के सभी बच्चों को बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराना है. उन्होंने बच्चों के लिए 'किताब-मुक्त शिक्षा' (book-free learning) के बारे में भी बात की.

बचपन के शुरुआती आठ साल बेहद जरूरी

EkStep फाउंडेशन की दीपिका मोगिलिशेट्टी ने कहा, "हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है. अगर हम बचपन के शुरुआती आठ सालों पर ध्यान नहीं देंगे, तो बाकी सभी चीज़ें बेकार हो जाएंगी". उन्होंने आगे कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमसे यह अपेक्षा करती है कि हम शुरुआती आठ सालों को सीखने की एक निरंतर प्रक्रिया के तौर पर देखें. उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "हमें बचपन के शुरुआती आठ सालों में इस तरह निवेश करना चाहिए, मानो हमारी ज़िंदगी ही इस पर निर्भर हो क्योंकि असल में ऐसा ही है."

स्मार्ट परीक्षा प्रणाली की जरूरत

Antier के फाउंडर और CEO, विक्रम आर. सिंह ने एग्जाम सिस्टम, चुनौतियों, पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बात की. इस दौरान उन्होंने स्मार्ट परीक्षा प्रबंधन प्रणालियां (Smart Exam Management Systems) डिज़ाइन करने का विचार सामने रखा है

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
NDTV LearnNXT Conclave, Rubal Nagi Global Teacher Prize 2026, Rubal Nagi, LearnNXT Conclave 2026 LIVE
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com