NDTV LearnNXT 2026 Conclave : NDTV LearnNXT कॉन्क्लेव 2026 में आज NCERT के डायरेक्टर प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी ने Redesigning the Indian Mind: The evolution of the school Curriculam पर अपनी राय रखी. NCERT के डायरेक्टर ने कहा कि न्यू एजुकेशन पॉलिसी को समझना जरूरी है. भारत के संविधान को बनाने के लिए जितनी चर्चा हुई थी, उसके बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसे बनाने के लिए हुई. आजादी के बाद पॉलिसी को बदलना चाहिए था, लेकिन ये नहीं हुआ.
कोलोनियल एजुकेशन का असर आज भी हैराष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भारत की शिक्षा व्यवस्था को कैसे बदलेगी पूछे जाने पर कहा कि NEP की मूल भावना पूरे देश में हुए व्यापक परामर्शों के जरिए तय की गई, ताकि यह समझा जा सके कि भारत को असल में किस तरह की शिक्षा की जरूरत है. आजादी के बाद उम्मीद थी कि शिक्षा नीति बदलेगी, लेकिन दशकों तक वही औपनिवेशिक (Colonial) व्यवस्था चलती रही, और उसका असर आज भी दिखाई देता है.
सकलानी ने बताया कि रटने वाली पढ़ाई कोलोनियल एजुकेशन मॉडल की सबसे बड़ी विरासतों में से एक है, जिसे असल में नौकरशाह तैयार करने के लिए बनाया गया था.
NEP 2020 रटने वाली शिक्षा पर जोर नहीं देती हैउन्होंने आगे कहा, "कोलोनिएल एजुकेशन मॉडल रटने वाली शिक्षा पर जोर देता था. NEP 2020 इस सोच से अलग हटती है.दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा महात्मा गांधी की 'बुनियादी शिक्षा की वर्धा योजना' (Wardha Scheme of Basic Education), जो 1937 में शुरू हुई थी, उसके कई सिद्धांत इस नई नीति में भी दिखाई देते हैं.
उन्होंने कहा, "गांधीजी की बुनियादी शिक्षा की सोच से जुड़े लगभग 65 फीसदी विचार NEP 2020 में देखे जा सकते हैं. हमें रटने वाली पढ़ाई से दूर हटकर एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनानी होगी जो समझ, कौशल और सर्वांगीण विकास पर जोर दे."
साथ ही उन्होंने एनसीआरटी द्वारा चलाई जा रही 'जादुई पिटारा' के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि इसमें लगभग 53 एक्टिविटीज हैं, जिसमें कहानी, कविताएं, खिलौने, वर्कशीट, कठपुतलियां, पहेलियां पोस्टर इत्यादि हैं, जो बच्चे की ज्वॉयफुल लर्निंग को बढ़ावा देते हैं.
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