UPSC सिविल सर्विस एग्जाम का नाम सुनते ही कई लोगों के पसीने छूट जाते हैं, खासतौर पर हिंदी मीडियम से आने वाले छात्रों को ये किसी पहाड़ की तरह दिखता है. हालांकि कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूल से हिंदी मीडियम में पढ़ाई करने के बाद यूपीएससी क्लियर किया और टॉपर भी बने. प्रिंस कुमार का नाम भी ऐसे ही छात्रों में शामिल है, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी दो बार क्रैक किया और आज बतौर IAS अधिकारी काम कर रहे हैं. प्रिंस कुमार ने यूपीएससी में 89वीं रैंक हासिल की और अपना सपना पूरा किया. उन्होंने एक इंटरव्यू में हिंदी मीडियम के छात्रों को टिप्स दिए हैं, जिसमें उन्होंने उस कॉन्सेप्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें सोशल मीडिया या फिर पूरी दुनिया से कटने की बात कही जाती है.
कौन हैं IAS प्रिंस कुमार?
प्रिंस कुमार बिहार के शिवहर जिले के एक छोटे गांव से आते हैं. उन्होंने खुद बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक सरकारी स्कूल से हुई. उन्होंने बगल के गांव से अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद बिहार की भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी से 2018 में ज्योग्राफी विषय में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. इस दौरान उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें यूपीएससी की तैयारी करनी है.
न्यूज पेपर पढ़ने की आदत
प्रिंस कुमार बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही अखबार पढ़ने की आदत थी, जो उनके इस पूरे सफर में काफी मददगार साबित हुई. उन्होंने कहा, " मैंने 7वीं क्लास से ही न्यूज पेपर पढ़ना शुरू कर दिया था. पापा न्यूज पेपर लेते थे तो मुझे वो आदत लग गई थी. मुझे लगता है अगर कोई न्यूज़पेपर पढ़ता है तो अच्छी इंफॉर्मेशन मिलती है, हम ज्यादा अवेयर हो जाते हैं, तो ये एक अच्छी आदत है."

Photo Credit: X handle IAS Prince Kumar
सोशल मीडिया से दूरी नहीं है जरूरी
IAS प्रिंस कुमार ने यूपीएससी को हौव्वा बनाने को भी गलत बताया. उन्होंने कहा, "ये पूरी तरह से मिथ है कि आप तैयारी के दौरान सबसे दूर रहिए, सोशल मीडिया और सारी चीजें छोड़ दीजिए. मैं इस लॉजिक से सहमत नहीं हूं. मेरा मानना है कि आपके दोस्त भी होने चाहिए, बाकी जो आपकी लाइफ है, वो भी चलनी चाहिए, उसमें एक डिसिप्लिन होना चाहिए, हालांकि उसका ये मतलब नहीं है कि आप फ्रेंडशिप को पूरी तरीके से अवॉइड कर दें. आप बहुत लंबे टाइम तक तभी सर्वाइव कर पाएंगे जब आप नॉर्मल लाइफ जी रहे हों."

Photo Credit: X handle IAS Prince Kumar
छात्रों की दी ये सलाह
छात्रों से बातचीत करते हुए प्रिंस कुमार ने कहा कि हर साल करीब 6 लाख लोग प्रीलिम्स देते हैं, लेकिन उनमें से करीब 13 हजार लोग ही आगे बढ़ते हैं. फाइनल सिलेक्शन तक करीब 900 लोग जाते हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सिर्फ 900 लोगों ने ही मेहनत की थी, परीक्षा देने वाले कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो 10 घंटे लगातार पढ़ते हैं. लोग मेहनत करते हैं और एफर्ट डालते हैं, लेकिन वो रिजल्ट में कंवर्ट नहीं होता है. इसके लिए सही रणनीति होना जरूरी है.
प्रिंस कुमार ने बताया कि उन्होंने चार अटेंप्ट दिए, जिसमें उन्होंने भी कई तरह की गलतियां कीं. उन्होंने कहा कि यूपीएससी की तैयारी में सबसे जरूरी सिलेबस और पिछले साल के क्वेश्चन पेपर्स हैं. अगर कोई किताब 600 पेज की है तो सभी को पढ़ना जरूरी नहीं है, इसमें ये देखना होगा कि किन टॉपिक्स को सबसे ज्यादा पूछा जाता है. इससे आपका टाइम बचेगा और आप सही दिशा में आगे बढ़ेंगे.
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