महाराष्ट्र के प्रवेश नियामक प्राधिकरण (एआरए) ने नागपुर संभाग के छह इंजीनियरिंग कॉलेजों में अल्पसंख्यक कोटे के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर प्रवेश लिए जाने के मामले में जांच के बाद एक बड़ा कदम उठाया है. इस प्रकार प्रवेश पाने वाले लगभग 320 छात्रों के प्रवेश को मंजूरी देने से एआरए ने इनकार कर दिया है. भाषाई अल्पसंख्यक का दर्जा साबित करने के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में उपनाम (सरनेम) की स्पेलिंग और दिए गए अन्य दस्तावेजों आदि में बड़ी विसंगति पाए जाने के कारण यह निर्णय लिया गया है.
वेरिफिकेशन के दौरान खुली पोल
इन छात्रों ने हिंदी भाषाई अल्पसंख्यक कोटे के तहत पात्रता का दावा किया था, लेकिन उनकी मातृभाषा साबित करने के लिए दिए गए दस्तावेजों की जांच करने पर उनमें भारी विसंगति का खुलासा हुआ. साल 2025-26 के शैक्षणिक सत्र के एडिमशन के सत्यापन के दौरान यह बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है.
जून महीने में हुई बैठक में, एआरए ने संबंधित छह कॉलेजों और लगभग 320 छात्रों को सुनवाई के लिए बुलाया था. इनमें से कुल 301 छात्र और चार छात्रों के अभिभावक उपस्थित रहे, जबकि 15 छात्र अनुपस्थित थे. सुनवाई के दौरान, छात्रों को उनके अल्पसंख्यक दावे का समर्थन करने वाले दस्तावेज देने के लिए कहा गया था. लेकिन ये छात्र ऐसा करने में नाकाम रहे और अपनी बात साबित करने से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं कर सके. इसके बाद एआरए ने एक्शन लिया एडमिशन को रद्द कर दिया.
कुछ महीने पहले, तकनीकी उच्च शिक्षा के सह-संचालक ने एनडीटीवी से बात करते हुए स्पष्ट किया था कि इस मामले में बड़ी कार्रवाई की जाएगी. जिसके बाद ये कार्रवाई की गई. हालांकि, इन छात्रों और उनके अभिभावकों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने को लेकर आपराधिक कार्रवाई होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है.
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