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बिहार की बेटी पुष्पा की सफलता की कहानी, छोटे से स्कूल की टीचर अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से होंगी सम्मानित

पुष्पा ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनका नाम राष्ट्रीय पुरस्कार की लिस्ट में आया है. गोपालगंज के दियारा इलाके के एक छोटे से गांव के स्कूल में जो बदलाव का प्रयास किया था. उसका आज फल मिल रहा है. 

बिहार की बेटी पुष्पा की सफलता की कहानी, छोटे से स्कूल की टीचर अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से होंगी सम्मानित
पुष्पा के पति ने उन्हें शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया.

गोपालगंज की सहायक शिक्षिका पुष्पा प्रसाद का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार सम्मान के लिए हुआ है. वैसे तो पूरे देश में कई शिक्षकों को 5 सितंबर को सम्मानित किया जाएगा. इस सम्मानित होने वाली सूची में बिहार की भी दो शिक्षिकाएं शामिल है. बिहार के बांका से खुशबू कुमारी और गोपालगंज से पुष्पा प्रसाद. कुचायकोट प्रखंड मुख्यालय स्थित कन्या मध्य विद्यालय कुचायकोट की सहायक शिक्षिका पुष्पा प्रसाद की शुरूआत की पढ़ाई बेंगलुरु में हुई है. वहां से उन्होंने केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई पूरी की थी. उनके पिता का नाम रघुनंदन प्रसाद है. वे एयरफोर्स में बतौर कर्मी तैनात थे, उनकी पोस्टिंग बेंगलुरु में थी और वहीं से पुष्पा का एडमिशन केंद्रीय विद्यालय में हुआ था.

केंद्रीय विद्यालय बंगलौर में पुष्पा ने नौवीं तक पढ़ाई की. उसके बाद उनके पिता का ट्रांसफर हरियाणा के नजफगढ़ हो गया. यहां पर केंद्रीय विद्यालय से ही पुष्पा ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की. पुष्पा के पिता बिहार के बाढ़ के पण्डारा के रहने वाले है. जबकि पुष्पा की शादी 16 मई, 2004 को बाढ़ के ही घोसवरी पंचायत के धनकडोह निवासी बाल्मिकी प्रसाद से हुई. तब उनके पति बाल्मिकी प्रसाद 1999 बैच के बीपीएससी शिक्षक हैं.

पति ने शिक्षक बनने के लिए किया प्रेरित

पति वाल्मीकि प्रसाद ने बताया की शादी के बाद एक साल में ही उन्हें एक बेटा पैदा हुआ. उसके बाद भी पुष्पा घर के काम से समय निकाल कर अपनी पढ़ाई करती थी. वह घर से समय निकाल कर कंप्यूटर सेंटर खोलना चाहती थी. उसने कंप्यूटर में डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी की थी. इसलिए वह कंप्यूटर सेंटर खोलकर बच्चों को तालीम देना चाहती थी, लेकिन उनके पति ने उन्हें शिक्षक बनने को लेकर प्रेरित किया.  फिर पुष्पा प्रसाद का पंचायत नियोजन में गोपालगंज में वर्ष 2006 में चयन हुआ. क्योंकि उनके पति गोपालगंज के बलिवन सागर में सरकारी शिक्षक के तौर पर तैनात थे. यहां पुष्पा से प्राथमिक विद्यालय बलिवन सागर में योगदान देने के साथ ही अपने बेहतरीन शिक्षा कार्यकलाप से जिले में चर्चा में आईं.

खाली समय में बच्चों को पढ़ाती थी

बलिवन सागर में वे करीब 7 साल तक रही. इस दौरान उन्हें यहां पर भी स्थानीय स्तर पर बेहतरीन शिक्षा और अच्छे मैनेजमेंट के लिए सम्मानित किया गया था.  फिर 25 मार्च 2013 को पुष्पा प्रसाद का ट्रांसफर कुचायकोट के कन्या मध्य विद्यालय में हुआ. जहां पर वे वर्तमान में सहायक शिक्षिका के पद पर तैनात हैं. वैसे तो पुष्पा यहां पर गणित से लेकर के हिंदी और अंग्रेजी तक सब विषयों की पढ़ाई कराती है. लेकिन जब उन्हें स्कूल में खाली समय मिलता है या छुट्टी का दिन होता है तो वे उस दौरान भी स्कूल में  पहुंचकर बच्चियों को पेंटिंग सहित अन्य एक्स्ट्रा आर्डिनरी गुण सिखाती है. जिसकी वजह से पुष्पा को जिला स्तर पर भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मानित किया गया है. इसके पहले भी इन्हें राज्य स्तर पर भी पटना में राजकीय पुरस्कार से दो- दो बार सम्मानित किया जा चुका है.  

पुष्पा ने एनडीटीवी को बताया कि जब उनका नाम राष्ट्रीय पुरस्कार की लिस्ट में आया तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ. फिर उन्हें मीडिया के माध्यम से पता चला कि उनका भी सम्मानित होने शिक्षकों की सूची में नाम चयनित हुआ है और उन्हें सम्मानित किया जाएगा. जिसको लेकर वे काफी उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि गोपालगंज के दियारा इलाके के एक छोटे से गांव के स्कूल में बदलाव का जो प्रयास किया था. उसका उन्हें आज उन्हें प्रतिफल मिल रहा है. 

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