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विवाद के महीनों बाद, NCERT की नई टेक्स्टबुक में न्यायपालिका को 'निष्पक्ष और स्वतंत्र' बताया

नौवीं कक्षा की NCERT की नई किताब में न्यायपालिका को स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था बताया गया है, जो संविधान की रक्षा करती है. इस साल फरवरी में आठवीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका पर विवाद के बाद NCERT ने माफी मांगी और किताबें वापस ली गई थीं.

विवाद के महीनों बाद, NCERT की नई टेक्स्टबुक में न्यायपालिका को 'निष्पक्ष और स्वतंत्र' बताया
NCERT की नई टेक्स्टबुक में न्यायपालिका को 'निष्पक्ष और स्वतंत्र'
नई दिल्‍ली:

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की आठवीं कक्षा की एक पुस्‍तक में न्यायपालिका की छवि खराब किये जाने से जुड़े आरोप को लेकर विवाद पैदा होने के कुछ महीनों बाद, नौवीं कक्षा की एक नई किताब में इसे 'एक ऐसी निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था' बताया गया है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है और संविधान की भावना को अछूता रखती है. हालांकि, हैरान करने वाली बात यह है कि नौवीं कक्षा की नई पुस्‍तक, आठवीं कक्षा की किताब को लेकर पैदा हुए विवाद से पहले ही तैयार कर ली गई थी.

न्यायपालिका को लेकर नई पुस्‍तक में क्‍या? 

नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में न्यायपालिका के अलग-अलग कार्यों के बारे में बताया गया है. इसमें कहा गया है कि यह सरकार के फैसलों और संविधान संशोधनों की समीक्षा करती है, असंवैधानिक कानूनों को रद्द कर सकती है, संविधान को अक्षुण्ण रखती है तथा 'लोकतांत्रिक मूल्यों और समाज के सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने एवं उन्हें बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती है.' लोकतंत्र पर बेस्‍ड चैप्‍टर में 'शक्तियों का पृथक्करण' नामक पार्ट में, पुस्‍तक इस बात पर जोर देती है कि न्यायपालिका समय-समय पर जनहित याचिका पर विचार करती है, ताकि सभी को न्याय मिल सके.

...तब NCERT ने मांगी थी माफी 

इससे पहले फरवरी में एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. इस पुस्तक में एक अध्याय में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' पर एक चैप्‍टर शामिल था. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, पाठ्यपुस्तक की प्रतियां वापस ले ली गईं और इसके डिजिटल फॉर्मेट को भी हटा दिया गया. इसके साथ ही एनसीईआरटी ने माफी भी मांगी थी.

क्‍या था पूरा विवाद?

11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया कि वे उन तीन विशेषज्ञों- मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार से दूरी बना लें, जो उस चैप्टर को तैयार करने में शामिल थे. हालांकि, 22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश में बदलाव किया. कोर्ट ने विशेषज्ञों की यह बात मान ली कि टेक्स्टबुक एक सामूहिक प्रयास का नतीजा थी और न्यायपालिका को नकारात्मक रूप से दिखाने का कोई इरादा नहीं था.

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इस विवाद के बाद, शिक्षा मंत्रालय ने 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई. पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और वाइस-चांसलर प्रकाश सिंह को इसके सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया. केंद्र ने कक्षा 8 और उससे ऊपर की कक्षाओं के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के प्रमुख को भी शामिल किया. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि तीन सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ समिति कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका वाले चैप्टर को फिर से लिखे.

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