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सावरकर की एंट्री और हिटलर गायब, NCERT की किताब में विभाजन पर बदला गया कांग्रेस का रुख

NCERT Revised Textbook: एनसीईआरटी की तरफ से विवाद के बाद 8वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में कई बदलाव किए गए हैं. इस बार किताब में सावरकर का भी जिक्र है.

सावरकर की एंट्री और हिटलर गायब, NCERT की किताब में विभाजन पर बदला गया कांग्रेस का रुख
NCERT की नई किताब में कई बदलाव

न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत NCERT की नई किताबें जारी हो रही हैं. इसी बीच कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब को फिर से जारी किया गया, जिसे लेकर पिछले दिनों खूब विवाद हुआ था. ये वही किताब है, जिसमें 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाला चैप्टर जोड़ा गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हटा लिया गया है. इसके अलावा किताब में कई चीजों को हटाया गया है और और कुछ नई चीजें जोड़ी गई हैं. इस बार किताब में सावरकर की एंट्री हुई है, वहीं विभाजन पर कांग्रेस के रुख को बदल दिया है. इसके अलावा हिटलर को भी गायब कर दिया गया है. 

क्या-क्या हुए बदलाव?

नए बदलावों के तहत 1947 में विभाजन पर कांग्रेस के रुख को थोड़ा बदला गया है, जिसमें अब कहा गया है कि विभाजन को एकमात्र रास्ता मानकर स्वीकार करना आज भी बहस का विषय है. नई किताब में वीर सावरकर के 'स्वराज' की मांग किए जाने की बात को जोड़ा गया है, जबकि एडोल्फ हिटलर और नाजी विचारधारा के हिस्से को हटा दिया गया है. 

विभाजन और कांग्रेस पर क्या बदला?

NCERT ने कक्षा 8 की रिवाइज्ड बुक 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में इतिहास के चैप्टर से कांग्रेस के विभाजन पर रुख को थोड़ा बदल दिया है. इस चैप्टर का नाम 'इंडियाज लॉन्ग रोड टू इंडिपेंडेंस' है, इसमें कहा गया है कि विभाजन का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तरफ से भी व्यापक रूप से विरोध किया गया था और क्या इसे स्वीकार करना ही एकमात्र रास्ता था, यह आज भी बहस का विषय है. नए बदलाव में उस लाइन को भी हटा दिया गया है, जिसमें पहले कहा गया था कि विभाजन के दौरान जब उपमहाद्वीप में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे, तो कांग्रेस नेता मजबूर थे.

NCERT की पुरानी किताब में लिखा गया था कि, "हिंदू और मुस्लिम नेताओं के बीच मतभेदों का फायदा उठाकर अंग्रेजों ने भारत को विभाजित करने का फैसला किया. हालांकि महात्मा गांधी और ज्यादातर कांग्रेस नेताओं ने विभाजन का विरोध किया था, लेकिन आखिरकार उन्होंने इसे एकमात्र रास्ता मानकर स्वीकार कर लिया."

नई किताब में सावरकर का जिक्र

नई किताब में पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की कहानी को और बड़ा किया गया है. इसमें जोड़ा गया है कि इसी तरह की स्वराज की मांग 1925 में वीडी सावरकर ने भी की थी. पुरानी किताब में लिखा था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सेना बनाने के लिए हिटलर से समर्थन मांगा था और जर्मन नेता को एक तानाशाह के रूप में बताया गया था, जिसकी नस्लवादी नाजी विचारधारा और विस्तारवादी लक्ष्यों के कारण दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआ था. अब हिटलर और नाजी विचारधारा का जिक्र हटाकर सिर्फ ये लिखा गया है कि बोस ने ब्रिटिश विरोधी ताकतों से समर्थन मांगा था.

सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी माफी 

NCERT ने 8वीं की इस किताब के लिए सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी थी, वहीं सभी डिजिटल और हार्ड कॉपियों को वापस ले लिया था. अब तमाम बदलावों के साथ किताब को फिर से जारी किया गया है. पुरानी किताब को तैयार करने वाली टीम में 51 सदस्यों के नाम थे, जबकि इस बार जो बुक जारी हुई है, उसमें 48 नाम ही हैं. इस टीम से मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार के नाम हटा दिए गए हैं, जिन्हें शुरुआत में उस विवादित चैप्टर के लिए जिम्मेदार माना गया था.

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