- कुहू गर्ग ने एक समय देश की उभरती बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीते थे
- घुटने में लगी ACL इंजरी ने उनके खेल करियर को रोककर उन्हें सिविल सेवा की तैयारी की ओर मोड़ा
- कुहू ने UPSC 2023 में पहले प्रयास में 178वीं रैंक हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा में चयन पाया
Kuhoo Garg IPS Success Story: एक समय था जब कुहू गर्ग की पहचान देश की उभरती हुई बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में होती थी. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. लेकिन घुटने में लगी एक गंभीर चोट ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. जिस चोट ने खेल करियर पर विराम लगाया, उसी ने कुहू गर्ग को संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की राह दिखाई और भारतीय पुलिस की अधिकारी बना दिया.
12 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में आयोजित 78वीं रेगुलर भर्ती (78 RR) की पासिंग आउट परेड में गुजरात कैडर की आईपीएस अधिकारी कुहू गर्ग को ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' और सर्वश्रेष्ठ आउटडोर प्रोबेशनर के सम्मान से नवाजा गया. यह सम्मान प्रशिक्षण के दौरान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण माना जाता है.
पिता की विरासत, बेटी की नई पहचान
कुहू गर्ग के पिता अशोक कुमार 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए थे. दिलचस्प बात यह है कि जिस वर्ष उनके पिता ने वर्दी को विदाई दी, उसी वर्ष कुहू का चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हो गया. कुहू ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2023 में पहले ही प्रयास में 178वीं रैंक हासिल की. इस सफलता ने उन्हें उन युवाओं की सूची में शामिल कर दिया, जिन्होंने अपने पहले प्रयास में ही देश की सबसे कठिन परीक्षा में जगह बनाई.

kuhoo garg sword of honour svpnpa hyderabad ips success story Photo Credit: SVPNPA
56 राष्ट्रीय और 19 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं कुहू
22 सितंबर 1998 को जन्मी कुहू गर्ग की शुरुआती पढ़ाई देहरादून के सेंट थॉमस कॉलेज में हुई. बाद में उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. महज नौ साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू करने वाली कुहू ने अपने खेल करियर में 56 राष्ट्रीय और 19 अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल किए. वर्ष 2018 में वह विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं. खेल जगत में उनका भविष्य बेहद उज्ज्वल माना जा रहा था.
ACL इंजरी बनी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट
खेल के दौरान कुहू के घुटने में ACL इंजरी हो गई. डॉक्टरों ने उन्हें लंबे समय तक आराम की सलाह दी. किसी खिलाड़ी के लिए यह दौर बेहद मुश्किल होता है, लेकिन कुहू ने इसे हार नहीं बनने दिया. बेड रेस्ट के दौरान उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की. रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई की और पूरी ऊर्जा नए लक्ष्य पर केंद्रित कर दी. इसी अनुशासन और मेहनत का परिणाम रहा कि उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.
जो हुआ, अच्छे के लिए हुआ
यूपीएससी क्रैक करने के बाद सोशल मीडिया पर कुहू गर्ग ने अपनी सक्सेस स्टोरी शेयर करते हुए लिखा कि कुछ साल पहले तक उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि सिविल सेवा उनका करियर बनेगी. बैडमिंटन उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें नई राह दिखाई. उनका मानना है कि जीवन हमेशा हमें वहीं ले जाता है, जहां हमें होना चाहिए. बदलाव आसान नहीं था, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि जो कुछ हुआ, उसने उन्हें और मजबूत बनाया.
मां, परिवार और मार्गदर्शकों को दिया सफलता का श्रेय
कुहू अपनी सफलता का श्रेय परिवार, डॉक्टरों, शिक्षकों, दोस्तों और मार्गदर्शकों को देती हैं. खास तौर पर वह अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं, जिन्होंने मुश्किल दौर में लगातार उनका साथ दिया. वह कहती हैं कि किसी भी बड़े लक्ष्य तक पहुंचने की यात्रा अकेले तय नहीं होती. इसके पीछे परिवार का भरोसा, अपनों की दुआएं और कठिन समय में खुद पर विश्वास बनाए रखने की क्षमता सबसे ज्यादा मायने रखती है.
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