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बाढ़ के बीच पढ़ाई का जज्बा, नाद को नाव बनाकर स्कूल जा रहे दो भाई

कटिहार के समेली प्रखंड के दिरा चांदपुर गांव में गंगा और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति गंभीर कर दी है. हालात ऐसे हैं कि पांचवीं और छठी कक्षा के दो सगे भाई नाद को नाव बनाकर बाढ़ का पानी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से नाव और राहत सामग्री की मांग की है.

ग्रामीणों का कहना है कि नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से गांव में स्थिति और गंभीर होती जा रही है.

School Children Flood : कटिहार जिले के समेली प्रखंड क्षेत्र की पश्चिमी चांदपुर पंचायत स्थित दिरा चांदपुर गांव में गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है. गांव के कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल जाने से लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है. सड़कें और रास्ते जलमग्न होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

बता दें कि बाढ़ का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, छात्राओं और महिलाओं पर पड़ रहा है. जिसके चलते पिछले करीब एक सप्ताह से बच्चों को स्कूल आने-जाने में कठनियों का सामना करना पड़ रहा है. गांव में सुरक्षित आवागमन की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बच्चे स्थानीय स्तर पर जुगाड़ के सहारे स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं.

नाद के सहारे स्कूल जाने को मजबूर

ऐसी ही एक तस्वीर दिरा चांदपुर गांव से सामने आई है. गांव के रहने वाले आदित्य कुमार, जो कक्षा 5 के छात्र हैं, और उनके बड़े भाई मयंक कुमार, जो कक्षा 6 में पढ़ते हैं, बाढ़ के पानी के बीच भी अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों भाई मध्य विद्यालय मोरसंडा के छात्र हैं. स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें हर दिन बाढ़ का पानी पार करना पड़ता है. नाव की सुविधा नहीं होने के कारण दोनों भाई घर में रखे नाद का इस्तेमाल नाव की तरह कर रहे हैं और उसी के सहारे बाढ़ का पानी पार कर विद्यालय पहुंच रहे हैं.

अभिभावकों में बढ़ रही चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से हालात दिन पर दिन और गंभीर होते जा रहे हैं. ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. 

प्रशासन से मदद की मांग

स्थानीय ग्रामीण सचित कुमार यादव ने जिला प्रशासन से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नाव की व्यवस्था, सुरक्षित आवागमन के साधन और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और ग्रामीणों को राहत मिल सके.
 

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